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UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क को लेकर व्यापारियों में मतभेद

मुंबई : नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से 2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 40 बेसिस पॉइंट (MDR) शुल्क लगाने के फैसले को लेकर व्यापार जगत में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां कुछ व्यापारिक संगठन इसे डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ संगठनों ने आशंका जताई है कि इससे कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत का दबाव बढ़ सकता है।
UPI भुगतान व्यवस्था देश में डिजिटल लेन-देन का एक बड़ा माध्यम बन चुकी है। ऐसे में मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लागू करने के प्रस्ताव ने व्यापारियों, छोटे कारोबारियों और उद्योग संगठनों के बीच चर्चा शुरू कर दी है।
CAIT ने फैसले का किया समर्थन
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने NPCI के इस कदम का समर्थन किया है। CAIT के बी.सी. भरतिया ने इसे संतुलित फैसला बताया है।
उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए साइबर सिक्योरिटी और UPI सिस्टम के प्रबंधन पर बड़ी राशि खर्च कर रही है। ऐसे में व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ शुल्क की जरूरत हो सकती है।
बी.सी. भरतिया ने कहा कि वह इस फैसले को पूरी तरह सही ठहराने की बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनके अनुसार सरकार ने इस मामले में संतुलन बनाने की कोशिश की है।
कुछ संगठनों ने जताई चिंता
वहीं, मुंबई स्थित फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (FRTWA) ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। संगठन ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से MDR शुल्क के फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है।
FRTWA का कहना है कि यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो इसका असर व्यापारियों की लागत पर पड़ सकता है। लंबे समय में यह खर्च ग्राहकों तक पहुंचने की संभावना भी जताई गई है।
संगठन का तर्क है कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान पहले से ही कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क उनके लिए आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।
कैश भुगतान बढ़ने की आशंका
कुछ व्यापारिक संगठनों ने आशंका जताई है कि MDR लागू होने के बाद कुछ लोग दोबारा नकद भुगतान की ओर बढ़ सकते हैं। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए अब तक इसकी सबसे बड़ी वजह बिना अतिरिक्त शुल्क के आसान लेन-देन रही है।
इसके अलावा कुछ व्यापारियों ने यह भी आशंका जताई है कि शुल्क से बचने के लिए कुछ लोग बड़े भुगतान को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट सकते हैं या अन्य तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर असर की चर्चा
UPI ने भारत में भुगतान के तरीके को काफी बदल दिया है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
व्यापार जगत में चर्चा है कि MDR शुल्क लागू होने से डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा। कुछ लोग इसे भुगतान प्रणाली को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त बोझ बता रहे हैं।
साइबर सुरक्षा और सिस्टम खर्च का मुद्दा
CAIT की ओर से दिए गए तर्क में साइबर सुरक्षा और डिजिटल भुगतान नेटवर्क को सुरक्षित रखने की लागत का मुद्दा उठाया गया है। संगठन का कहना है कि UPI जैसे बड़े सिस्टम को लगातार बेहतर बनाने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है।
वहीं, विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए शुल्क व्यवस्था पर सावधानी से विचार किया जाना चाहिए, ताकि छोटे कारोबारियों और ग्राहकों पर अतिरिक्त भार न पड़े।
आगे की व्यवस्था पर नजर
UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क को लेकर व्यापार संगठनों की अलग-अलग राय सामने आने के बाद अब आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
जहां एक ओर कुछ संगठन इसे डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए आवश्यक कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई व्यापारी इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि शुल्क व्यवस्था किस तरह लागू होती है और इसका व्यापार एवं ग्राहकों पर कितना असर पड़ता है।





