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विदेश में नौकरी का झांसा देकर ठगी तीन राज्यों से तीन आरोपी गिरफ्तार

मुंबई। पायधुनी पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर नौकरी चाहने वाले युवाओं से कथित धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में पुलिस ने अभियान चलाकर तीन अलग-अलग राज्यों से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने मस्जिद बंदर पश्चिम में कार्यालय खोलकर बेरोजगार युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और उनसे मूल पासपोर्ट, बायोडाटा तथा रुपये जमा कराए। रकम मिलने के बाद आरोपियों ने कार्यालय बंद कर दिया और मोबाइल फोन बंद करके फरार हो गए।
पुलिस के अनुसार, आरोपी मस्जिद बंदर पश्चिम में ‘अल शिफा ट्रेवल्स’ नाम से कार्यालय संचालित कर रहे थे। कार्यालय में आने वाले युवाओं को विभिन्न विदेशी कंपनियों में अच्छी नौकरी, आकर्षक वेतन और अन्य सुविधाएं दिलाने का दावा किया जाता था। विदेश में रोजगार पाने की उम्मीद में कई लोगों ने आरोपियों से संपर्क किया और उनके बताए नियमों के अनुसार जरूरी दस्तावेज जमा कराए।
आरोप है कि गिरोह के सदस्यों ने प्रत्येक आवेदक से मूल पासपोर्ट और बायोडाटा लिया। इसके साथ ही नौकरी दिलाने की प्रक्रिया, वीजा, दस्तावेजों की जांच और अन्य खर्चों के नाम पर हर व्यक्ति से 15 हजार रुपये जमा कराए गए। पीड़ितों को कथित तौर पर भरोसा दिलाया गया था कि रकम और दस्तावेज जमा करने के बाद जल्द ही उनकी नौकरी की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
काफी समय बीतने के बावजूद आवेदकों को नौकरी से संबंधित कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। जब उन्होंने कार्यालय से संपर्क किया तो पहले उन्हें अलग-अलग कारण बताकर इंतजार करने को कहा गया। कथित रूप से किसी आवेदक से वीजा प्रक्रिया जारी होने की बात कही गई तो किसी को विदेशी कंपनी से स्वीकृति आने का इंतजार करने के लिए कहा गया।
लगातार आश्वासन मिलने के कारण पीड़ित कुछ समय तक आरोपियों की बातों पर विश्वास करते रहे। बाद में जब वे मस्जिद बंदर स्थित कार्यालय पहुंचे तो वह बंद मिला। कार्यालय के कर्मचारियों और संचालकों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सभी मोबाइल नंबर बंद मिले। इससे नौकरी के लिए रुपये और मूल दस्तावेज जमा कराने वाले लोगों में हड़कंप मच गया।
पीड़ितों को सबसे अधिक चिंता अपने मूल पासपोर्ट को लेकर थी। पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण पहचान और यात्रा दस्तावेज है। इसके गलत हाथों में पहुंचने से पहचान के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने का खतरा बना रहता है। कार्यालय बंद मिलने के बाद पीड़ितों ने आरोपियों को खोजने का प्रयास किया, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला।
इसके बाद पीड़ित पायधुनी पुलिस के पास पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लेने, मूल पासपोर्ट जमा कराने और बाद में संपर्क बंद करने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद मामला दर्ज किया तथा आरोपियों की तलाश शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने कार्यालय के किराये से संबंधित दस्तावेज, आवेदन पत्र, भुगतान की जानकारी और आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों का विवरण जुटाया। कार्यालय और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली गई। तकनीकी सूचनाओं और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों के अलग-अलग राज्यों में छिपे होने की जानकारी मिली।
पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें गठित कीं। मोबाइल फोन बंद होने के बावजूद आरोपियों के पुराने संपर्कों, यात्रा से जुड़ी जानकारी और संभावित ठिकानों का पता लगाया गया। कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाने के बाद तीन संदिग्ध आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए मुंबई लाया गया।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि गिरोह ने कुल कितने लोगों से रुपये और दस्तावेज लिए थे। आरोपियों के पास जमा मूल पासपोर्ट कहां रखे गए और क्या किसी दस्तावेज का दुरुपयोग किया गया, इसका भी पता लगाया जा रहा है। पुलिस की प्राथमिकता पीड़ितों के पासपोर्ट तथा अन्य मूल दस्तावेज सुरक्षित बरामद करने की है।
यह भी जांच की जा रही है कि ‘अल शिफा ट्रेवल्स’ नाम से चलाए जा रहे कार्यालय के पास विदेश में भर्ती कराने का कोई वैध लाइसेंस या अनुमति थी या नहीं। विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों के लिए सरकारी नियमों और पंजीकरण की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है। एजेंसी के दस्तावेजों और उसके कथित विदेशी संपर्कों की सत्यता की जांच की जा रही है।
पुलिस आरोपियों के बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन का विवरण भी खंगाल रही है। पीड़ितों से मिली रकम नकद ली गई थी या बैंक एवं ऑनलाइन माध्यम से जमा कराई गई थी, इसकी जानकारी एकत्र की जा रही है। लेनदेन के आधार पर ठगी की कुल रकम का आकलन किया जाएगा। गिरोह से जुड़े अन्य बैंक खाते सामने आने पर उन्हें फ्रीज करने की कार्रवाई की जा सकती है।
मामले में अन्य लोगों की भूमिका होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है। कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों, युवाओं को वहां भेजने वाले एजेंटों और कथित विदेशी कंपनियों से जुड़े संपर्कों की पहचान की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपियों ने इसी तरीके से किसी अन्य स्थान पर कार्यालय खोलकर लोगों को ठगा था या नहीं।
अधिकारियों ने विदेश में नौकरी तलाश रहे युवाओं से अपील की है कि किसी भी एजेंसी को मूल पासपोर्ट और रुपये देने से पहले उसके पंजीकरण तथा सरकारी मान्यता की जांच करें। केवल विज्ञापन, सोशल मीडिया पोस्ट या आकर्षक वेतन के दावे के आधार पर रकम जमा नहीं करनी चाहिए। भुगतान करने पर वैध रसीद लेना और सभी बातचीत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
पुलिस ने इस गिरोह से संपर्क करने वाले अन्य पीड़ितों से सामने आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। अधिक शिकायतें मिलने से ठगी के वास्तविक दायरे, वसूली गई रकम और जमा कराए गए पासपोर्ट की संख्या का पता चल सकेगा। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और अपराध न्यायालय में सिद्ध होना बाकी है।





