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डेढ़ किलो सोना और 1.95 करोड़ नकद चोरी पूर्व व्यापारी की शिकायत

मुंबई। कारोबार के नए अवसर तलाश रहे 67 वर्षीय पूर्व गारमेंट व्यापारी ने दो लोगों पर भरोसा जीतकर सोना और बड़ी मात्रा में नकदी चुराने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, दुबई-मुंबई फ्लाइट के दौरान उनके साथ यह घटनाक्रम हुआ। उन्होंने करीब 1.5 किलोग्राम सोना, 1.95 करोड़ रुपये नकद और 1.28 लाख यूएई दिरहम चोरी होने की शिकायत की है। दिरहम की कीमत लगभग 33.35 लाख रुपये बताई गई है। मामले में धोखाधड़ी और चोरी का केस दर्ज किया गया है।
एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता की पहचान अब्दुल रज्जाक उमरभाई सौदागर के रूप में हुई है। वह सूरत के रहने वाले हैं और पहले शहर में गारमेंट का कारोबार करते थे। पिछले चार महीनों से उनका कारोबार बंद था। इसके बाद वह व्यवसाय के नए अवसरों की तलाश कर रहे थे। शिकायत में उनके कारोबारी संपर्कों और दुबई की यात्राओं का भी उल्लेख है। सौदागर का आरोप है कि दो लोगों ने उनका विश्वास हासिल किया और बाद में उनके सोने तथा नकदी की चोरी की।
सौदागर ने पुलिस को बताया कि करीब दो साल पहले उनकी मुलाकात केरल के रहने वाले मोहम्मद आसिफ से हुई थी। उस समय वह अपने गारमेंट कारोबार के सिलसिले में अक्सर दुबई आते-जाते थे। इसी दौरान दोनों की पहचान हुई। शिकायतकर्ता के अनुसार, आसिफ ने उन्हें बताया था कि वह सोने की खरीद-बिक्री और अन्य कारोबार से जुड़ा है। उसने अलग-अलग व्यावसायिक क्षेत्रों में अपनी जान-पहचान होने का भी दावा किया था। यह जानकारी शिकायतकर्ता के बयान का हिस्सा है।
आसिफ के कथित कारोबारी दावों की पृष्ठभूमि इस मामले में महत्वपूर्ण है। सौदागर पहले से व्यापार से जुड़े थे और उनका दुबई आना-जाना रहता था। बाद में गारमेंट कारोबार बंद होने के कारण वह नए अवसर तलाश रहे थे। ऐसे में सोने की खरीद-बिक्री और दूसरे व्यवसायों में संपर्क होने की बात उनके लिए प्रासंगिक रही होगी। हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों के बीच किसी कारोबार के लिए औपचारिक समझौता हुआ था या नहीं।
शिकायतकर्ता ने दुबई-मुंबई उड़ान के दौरान दो लोगों द्वारा भरोसा जीतने और फिर कथित चोरी का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, चोरी हुए सामान में डेढ़ किलोग्राम सोने के अलावा भारतीय मुद्रा और यूएई दिरहम शामिल थे। उपलब्ध जानकारी में सोने का स्वरूप स्पष्ट नहीं किया गया है। वह आभूषण, सिक्कों या किसी अन्य रूप में था, इसका विवरण सामने नहीं है। इसी तरह सोना और नकदी किस सामान में रखे थे, इसकी जानकारी भी नहीं दी गई है।
इस मामले में भारतीय रुपये और विदेशी मुद्रा की बताई गई रकम बड़ी है। शिकायत में 1.95 करोड़ रुपये नकद तथा 1.28 लाख दिरहम का उल्लेख है। दिरहम का अनुमानित मूल्य लगभग 33.35 लाख रुपये बताया गया है। सोने की कीमत अलग से नहीं दी गई है। इसलिए कुल नुकसान की निश्चित राशि का आकलन उपलब्ध विवरण से नहीं किया जा सकता। सोने के वजन और नकदी की रकम संबंधी आंकड़े शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर सामने आए हैं।
भरोसा जीतने के आरोप के साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि शिकायतकर्ता और आसिफ की पहचान लगभग दो साल पुरानी बताई गई है। हालांकि, उनकी पहली मुलाकात के बाद संपर्क किस तरह बना रहा, इसका विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, शिकायत में शामिल दूसरे व्यक्ति की पहचान भी दिए गए विवरण में नहीं है। दोनों की कथित भूमिका अलग-अलग क्या थी और घटनाक्रम में किसने क्या किया, इन बातों का स्पष्ट होना मामले को समझने के लिए आवश्यक होगा।
धोखाधड़ी और चोरी का केस दर्ज होने के बाद आरोपों से संबंधित तथ्यों की पुष्टि महत्वपूर्ण है। एफआईआर में दर्ज शिकायत किसी घटना का शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत विवरण होती है। आरोपों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों और आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इस मामले में उपलब्ध जानकारी से किसी आरोपी की गिरफ्तारी या सामान की बरामदगी की पुष्टि नहीं होती। इसलिए शिकायत दर्ज होने और आरोप साबित होने के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
घटना की सटीक तारीख, उड़ान का विवरण और चोरी का पता चलने के समय की जानकारी भी दिए गए घटनाक्रम में शामिल नहीं है। शिकायतकर्ता को सोना और नकदी गायब होने का पता विमान में चला या यात्रा पूरी होने के बाद, यह स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा केस किस थाने में दर्ज हुआ, उसका विवरण भी उपलब्ध नहीं है। आगे इन पहलुओं की जानकारी सामने आने पर कथित चोरी के क्रम और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल मामला पूर्व व्यापारी की शिकायत के आधार पर दर्ज धोखाधड़ी और चोरी के आरोपों से जुड़ा है। सौदागर ने दो लोगों पर विश्वास हासिल करके सोना, भारतीय नकदी और दिरहम चुराने का आरोप लगाया है। शिकायत में आसिफ से पुरानी कारोबारी पहचान तथा उसके सोने के व्यापार से जुड़े होने के कथित दावों का उल्लेख है। अब आरोपों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य, सामान की स्थिति और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होने पर मामले की पूरी पृष्ठभूमि सामने आएगी।





