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Thane : पानी संकट गहराया, अल नीनो प्रभाव से सप्लाई में कमी

Maharashtra महाराष्ट्र: ठाणे शहर में अल नीनो के असर और मॉनसून में हुई देरी के कारण गंभीर जल संकट पैदा हो गया है। जून के अंत तक जलाशयों में पानी का स्तर काफी नीचे पहुंचने से ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (TMC) को रोजाना पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि शहर की कुल मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर आ गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, ठाणे में रोजाना लगभग 630 मिलियन लीटर (MLD) पानी की मांग है, जबकि TMC केवल करीब 590 MLD पानी ही सप्लाई कर पा रहा है। इस तरह शहर को हर दिन लगभग 40 MLD पानी की कमी झेलनी पड़ रही है। इस कमी के कारण कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति प्रभावित हुई है।
पिछले 160 दिनों में, यानी मार्च से जून के अंत तक, नगर प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए बड़े पैमाने पर टैंकरों का सहारा लिया। इस दौरान करीब 9,830 पानी के टैंकर भेजे गए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति जारी रखी जा सके। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में टैंकरों के बावजूद संकट पूरी तरह हल नहीं हो सका है।
इस जल संकट ने शहर में पानी के वितरण को लेकर असमानता की बहस को भी तेज कर दिया है। कई क्षेत्रों में लोगों को बुनियादी जरूरतों के लिए निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि कुछ इलाकों में नगर निगम की सप्लाई अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है।
विशेष रूप से घोड़बंदर रोड के आसपास के इलाके—पाटलीपाड़ा, भयंदरपाड़ा और गायमुख—के निवासी सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। यहां के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए निजी पानी के टैंकरों पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नियमित जलापूर्ति बाधित होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।
इसके विपरीत, मुंब्रा और दिवा जैसे क्षेत्रों में ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा पानी की आपूर्ति टैंकरों के माध्यम से पूरी तरह मुफ्त में की जा रही है। इस अंतर ने शहर में पानी के वितरण प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पानी के वितरण में समानता नहीं है और कुछ इलाकों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों को निजी व्यवस्था पर निर्भर छोड़ दिया गया है। इससे नगर निगम की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि यह स्थिति असामान्य मौसम और जलाशयों में कम भंडारण के कारण उत्पन्न हुई है। अल नीनो प्रभाव के चलते मॉनसून में देरी हुई, जिससे जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं भर पाया। इसके परिणामस्वरूप सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में बारिश सामान्य नहीं रही, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। जल प्रबंधन व्यवस्था पर दबाव बढ़ने से शहर के कई हिस्सों में पानी की कटौती और बढ़ सकती है।
TMC ने लोगों से पानी का समझदारी से उपयोग करने की अपील की है और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, जल संरक्षण और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
फिलहाल ठाणे में जल संकट को लेकर चिंता बनी हुई है और लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।





