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ठाणे पुलिस की सब-इंस्पेक्टर स्नेहा करनाले ने जीता सिल्वर मेडल

ठाणे। कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी के साथ खेल के मैदान में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए ठाणे पुलिस की सब-इंस्पेक्टर स्नेहा सुनील करनाले ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने प्रतिष्ठित 75वीं ऑल इंडिया पुलिस रेसलिंग क्लस्टर चैंपियनशिप में महिलाओं की 55 किलोग्राम बॉडीबिल्डिंग कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीतकर महाराष्ट्र और ठाणे पुलिस का नाम रोशन किया है।
हरियाणा के करनाल में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की टीमों ने हिस्सा लिया। कड़े मुकाबले के बीच स्नेहा करनाले ने अपनी फिटनेस, अनुशासन और शानदार प्रदर्शन के दम पर दूसरा स्थान हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि को पुलिस सेवा के साथ खेल के क्षेत्र में मेहनत और समर्पण की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
75वीं ऑल इंडिया पुलिस रेसलिंग क्लस्टर का आयोजन हरियाणा पुलिस की ओर से करनाल में 23 से 27 सितंबर तक किया गया। इस मल्टी-डिसिप्लिन चैंपियनशिप में देश भर से विभिन्न राज्य पुलिस विभागों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कुल 37 टीमों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में कुश्ती, मुक्केबाजी, बॉडीबिल्डिंग और आर्म रेसलिंग जैसे खेल शामिल किए गए थे।
देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे पुलिस खिलाड़ियों के कारण प्रतियोगिता में मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण रहा। प्रत्येक खिलाड़ी अपने राज्य, पुलिस विभाग और बल का प्रतिनिधित्व करते हुए मैदान में उतरा। इसी प्रतिस्पर्धा के बीच महाराष्ट्र की ओर से हिस्सा लेने वाली सब-इंस्पेक्टर स्नेहा सुनील करनाले ने महिलाओं की 55 किलोग्राम बॉडीबिल्डिंग कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन किया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
पुलिस सेवा में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ड्यूटी के साथ खेल की तैयारी करना आसान नहीं होता। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच नियमित अभ्यास के लिए समय निकालना बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में स्नेहा करनाले की उपलब्धि उनके अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
बॉडीबिल्डिंग में सफलता हासिल करने के लिए लगातार अभ्यास के साथ शरीर की फिटनेस और ताकत पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। इसके अलावा खानपान, नियमित प्रशिक्षण और मानसिक एकाग्रता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पदक हासिल करने के लिए लंबे समय तक लगातार तैयारी की जरूरत होती है। स्नेहा ने अपनी पुलिस ड्यूटी के साथ इन सभी चुनौतियों का सामना करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल किया।
उनकी उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न पुलिस संगठनों से चुने गए बेहतरीन खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंचे थे। 37 टीमों के बीच आयोजित प्रतियोगिता में पदक जीतना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। महिलाओं की 55 किलोग्राम बॉडीबिल्डिंग कैटेगरी में स्नेहा ने अपनी मजबूत तैयारी और प्रदर्शन के जरिए सिल्वर मेडल तक का सफर तय किया।
ऑल इंडिया पुलिस रेसलिंग क्लस्टर पुलिस बलों के खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण मंच है। यहां अलग-अलग राज्यों और केंद्रीय बलों के खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। प्रतियोगिता का उद्देश्य पुलिसकर्मियों में खेल भावना, शारीरिक दक्षता और आपसी समन्वय को बढ़ावा देना भी है। इस तरह की प्रतियोगिताएं पुलिसकर्मियों को अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों से अलग खेल के क्षेत्र में प्रतिभा दिखाने का अवसर देती हैं।
स्नेहा करनाले की सफलता ने यह भी दिखाया है कि पुलिस सेवा में महिलाएं अपनी जिम्मेदारियां निभाने के साथ खेल के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही हैं। पुलिस की वर्दी में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली स्नेहा ने बॉडीबिल्डिंग के मंच पर अपनी मेहनत और फिटनेस का दम दिखाया।
महिला पुलिसकर्मियों के लिए भी उनकी उपलब्धि प्रेरणादायक मानी जा रही है। पुलिस की नौकरी में शारीरिक और मानसिक फिटनेस का विशेष महत्व होता है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में पदक जीतना फिटनेस के प्रति उनकी गंभीरता को भी दर्शाता है।
हरियाणा पुलिस द्वारा आयोजित पांच दिवसीय प्रतियोगिता में विभिन्न खेलों में खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। कुश्ती और मुक्केबाजी जैसे पारंपरिक मुकाबलों के साथ बॉडीबिल्डिंग तथा आर्म रेसलिंग ने भी प्रतियोगिता को खास बनाया। अलग-अलग राज्यों और बलों के खिलाड़ियों के बीच हुए मुकाबलों ने पूरे आयोजन को राष्ट्रीय स्तर का बड़ा खेल मंच बनाया।
स्नेहा सुनील करनाले ने महिलाओं की 55 किलोग्राम बॉडीबिल्डिंग कैटेगरी में सिल्वर मेडल हासिल कर महाराष्ट्र के खाते में महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ी। उनकी सफलता ठाणे पुलिस के लिए भी गौरव का अवसर है। पुलिस सेवा और खेल के बीच संतुलन बनाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करने वाली स्नेहा करनाले ने साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति, अनुशासन और लगातार मेहनत से पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ खेल के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।





