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ठाणे। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के कथित पेपर लीक मामले में ठाणे सिटी पुलिस ने भिवंडी की स्थानीय अदालत में करीब 3,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस के मुताबिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र आगरा की एक प्रिंटिंग प्रेस से जूते के सोल में छिपाकर बाहर निकाले गए थे। चार्जशीट में कुल 18 आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता का नाम भी है, जिस पर इससे पहले ओडिशा में पेपर लीक मामले में शामिल होने का आरोप लग चुका है।
पुलिस के अनुसार प्रश्न-पत्र को प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकालने के लिए वहां काम करने वाले दो कर्मचारियों को कथित तौर पर केवल 8,000 रुपये दिए गए थे। जांच में सामने आया कि प्रश्न-पत्र की गोपनीयता बनाए रखने के लिए आरोपियों ने इसे बाहर निकालने का तरीका इस तरह तैयार किया था कि प्रिंटिंग प्रेस में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को आसानी से चकमा दिया जा सके।
चार्जशीट में पुलिस ने पेपर लीक की पूरी कथित कड़ी का विवरण दिया है। जांच एजेंसी के मुताबिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र को प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकालने के बाद उसे आगे संबंधित लोगों तक पहुंचाया गया। इस नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की गई और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को चार्जशीट का हिस्सा बनाया गया।
पुलिस की जांच के मुताबिक आगरा स्थित प्रिंटिंग प्रेस में परीक्षा सामग्री की छपाई के दौरान दो कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने प्रश्न-पत्रों को जूतों के सोल के अंदर छिपाकर प्रेस से बाहर निकाला। इसके बदले उन्हें 8,000 रुपये दिए गए। हालांकि किस आरोपी ने यह रकम दी और पूरी रकम किस माध्यम से पहुंचाई गई, इसका विस्तृत विवरण पुलिस ने जांच में दर्ज किया है।
पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी थी। जांच के दौरान आरोपियों के बीच संपर्क, पैसों के लेन-देन और प्रश्न-पत्र की आवाजाही से जुड़े साक्ष्यों को खंगाला गया। पुलिस ने मोबाइल फोन, डिजिटल डाटा और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की।
इस मामले में पुलिस ने अब तक 16 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। चार्जशीट में कुल 18 आरोपियों को आरोपी बनाया गया है। दो आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है और उनके संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही है।
जांच में कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता का नाम सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक गुप्ता पहले ओडिशा में पेपर लीक से जुड़े एक मामले में जांच के दायरे में आ चुका था। महाराष्ट्र TET मामले में उसकी भूमिका और अन्य आरोपियों के साथ उसके संपर्क को लेकर पुलिस ने चार्जशीट में कई बिंदुओं का उल्लेख किया है।
पेपर लीक मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह पता लगाना था कि प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्न-पत्र बाहर निकलने के बाद किस तरह अलग-अलग लोगों तक पहुंचा। पुलिस ने कथित नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका को अलग-अलग स्तर पर जांचा। चार्जशीट में प्रश्न-पत्र की कथित आवाजाही और आरोपियों के बीच संपर्क से संबंधित जानकारी शामिल की गई है।
TET जैसी प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्न-पत्र की गोपनीयता बेहद महत्वपूर्ण होती है। परीक्षा से पहले प्रश्न-पत्र किसी बाहरी व्यक्ति तक पहुंचने की स्थिति में उम्मीदवारों के बीच असमानता पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में परीक्षा की विश्वसनीयता और पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
महाराष्ट्र TET का आयोजन शिक्षक पात्रता निर्धारित करने के लिए किया जाता है। सरकारी और निजी स्कूलों में शिक्षक भर्ती की पात्रता प्रक्रिया में TET का महत्व है। इसलिए परीक्षा से संबंधित पेपर लीक की किसी भी घटना का असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है।
ठाणे सिटी पुलिस ने चार्जशीट में कथित पेपर लीक की शुरुआत से लेकर आरोपियों के बीच संपर्क और प्रश्न-पत्र के इस्तेमाल तक की कड़ी जोड़ने का प्रयास किया है। करीब 3,500 पन्नों की चार्जशीट में आरोपियों के बयान, जांच से मिले दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का विवरण शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस ने यह भी जांच की कि आरोपियों ने पेपर लीक के लिए किस तरह संपर्क स्थापित किया और किस भूमिका में कौन व्यक्ति शामिल था। इस दौरान डिजिटल उपकरणों और संचार माध्यमों से मिले डेटा को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।
चार्जशीट में 18 आरोपियों को शामिल किए जाने के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत चार्जशीट और पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों की जांच करेगी। इसके बाद आरोप तय करने और मुकदमे की आगे की कार्रवाई से संबंधित प्रक्रिया शुरू होगी।
फरार बताए जा रहे दो आरोपियों की गिरफ्तारी भी जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण होगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि दोनों की भूमिका क्या थी और वे कथित नेटवर्क में किस स्तर पर जुड़े हुए थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद मामले से संबंधित अन्य जानकारियां सामने आने की संभावना है।
पेपर लीक की घटनाओं में अक्सर प्रश्न-पत्र की छपाई, परिवहन, सुरक्षित भंडारण और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया सबसे संवेदनशील मानी जाती है। इस मामले में प्रश्न-पत्र को प्रिंटिंग प्रेस से ही कथित तौर पर बाहर निकाले जाने का आरोप है। इसलिए प्रिंटिंग प्रेस में सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की पहुंच भी जांच के केंद्र में रही।
प्रिंटिंग प्रेस से परीक्षा सामग्री बाहर निकालने के लिए जूते के सोल का इस्तेमाल किए जाने की बात इस मामले को अलग बनाती है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने प्रश्न-पत्रों को छिपाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया जिससे सामान्य जांच के दौरान सामग्री आसानी से नजर न आए।
हालांकि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक कानून की नजर में निर्दोष माना जाता है। चार्जशीट पुलिस की जांच और उसके आधार पर लगाए गए आरोपों का दस्तावेज है, अंतिम दोषसिद्धि नहीं।
मामले में अब अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। अभियोजन पक्ष पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित करने का प्रयास करेगा, जबकि आरोपियों को अपना बचाव पेश करने का अधिकार होगा।
TET पेपर लीक मामले में 3,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद जांच का एक बड़ा चरण पूरा हो गया है। पुलिस ने 18 आरोपियों के खिलाफ अपना पक्ष अदालत के सामने रखा है, जिनमें 16 गिरफ्तार आरोपी और दो फरार बताए गए लोग शामिल हैं। अब मामले की अगली दिशा अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण से तय होगी।





