महाराष्ट्र

स्वामी गोविंददेव गिरी ने ऐप ‘पवित्रं’ और आयोजन की सराहना की

SHIDDHANT
16 Nov 2025 11:35 PM IST
स्वामी गोविंददेव गिरी ने ऐप ‘पवित्रं’ और आयोजन की सराहना की
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Maharashtra महाराष्ट्र: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी ने पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह आयोजन अपने समय से विलंबित था और इसे पहले ही संपन्न कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य राम जन्मभूमि ट्रस्ट के उद्देश्यों और योजनाओं के बारे में जनता और भक्तों को जागरूक करना है। स्वामी गोविंददेव गिरी ने विशेष रूप से पुणे ट्रस्ट के आयोजकों की सराहना की, जिन्होंने मिलकर एक डिजिटल पहल शुरू की है। उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत एक ऐप 'पवित्रं' विकसित किया गया है, जो भक्तों और लोगों को ट्रस्ट के कार्यक्रमों, मंदिर निर्माण गतिविधियों और अन्य धर्मिक आयोजनों की जानकारी उपलब्ध कराएगा। ऐप का उद्देश्य भक्तों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़कर मंदिर से संबंधित सेवाओं और अपडेट्स तक आसान पहुंच प्रदान करना है।
उन्होंने कहा, “पुणे में यह आयोजन ट्रस्ट की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। ऐप 'पवित्रं' के माध्यम से हम भक्तों को सीधे जोड़ सकते हैं और उन्हें मंदिर निर्माण, धार्मिक अनुष्ठान और दर्शन से जुड़े सभी कार्यक्रमों की जानकारी तुरंत प्रदान कर सकते हैं। स्वामी गोविंददेव गिरी ने कहा कि ट्रस्ट का मिशन केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को सहेजना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। उन्होंने भक्तों और आयोजकों से आग्रह किया कि वे इस पहल में अधिक सक्रिय भागीदारी करें और डिजिटल माध्यम से राम जन्मभूमि आंदोलन और ट्रस्ट के कार्यों में योगदान दें।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने ऐप के डिज़ाइन और इसकी सुविधाओं की भी सराहना की। भक्तों और आयोजकों ने इसे एक अत्याधुनिक और उपयोगकर्ता के अनुकूल डिजिटल टूल बताया, जिससे मंदिर से जुड़ी सभी जानकारी और सेवाएं सरलता से उपलब्ध होंगी। स्वामी गोविंददेव गिरी ने अंत में कहा कि इस तरह के आयोजनों और डिजिटल पहलों से मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और भक्तों को ट्रस्ट के कार्यों की वास्तविक जानकारी प्राप्त होगी। उन्होंने सभी भक्तों से आग्रह किया कि वे इस ऐप के माध्यम से ट्रस्ट के कार्यों में सक्रिय योगदान दें और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में सहयोग करें।
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