महाराष्ट्र

बेल पर Supreme Court का बड़ा फैसला

Kanchan Paikara
1 July 2026 2:43 PM IST
बेल पर Supreme Court का बड़ा फैसला
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New Delhi | नई दिल्ली :डिफॉल्ट जमानत से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपी को चार्जशीट की प्रति उपलब्ध न कराए जाने मात्र से उसे डिफॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं मिल जाता। शीर्ष अदालत ने इस संबंध में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी की दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की संयुक्त पीठ ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 187(3) के तहत आरोपी को चार्जशीट की कॉपी न मिलना डिफॉल्ट जमानत का आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि डिफॉल्ट जमानत का अधिकार उन परिस्थितियों में लागू होता है, जहां जांच एजेंसी निर्धारित समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाती। यदि समय पर चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, तो उसकी प्रति उपलब्ध कराने में देरी अपने आप में डिफॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं देती।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें आरोपी की याचिका खारिज कर दी गई थी। आरोपी ने दावा किया था कि उसे चार्जशीट की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई, इसलिए उसे डिफॉल्ट जमानत दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया था और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उसी निष्कर्ष पर अपनी सहमति जताई है।
मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एक साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला करीब 3.81 करोड़ रुपये की कथित साइबर ठगी से संबंधित है। इसी मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया गया था और जांच के दौरान समय सीमा के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि डिफॉल्ट जमानत से जुड़े कानूनी प्रावधानों की व्याख्या कानून के निर्धारित ढांचे के अनुसार ही की जानी चाहिए। केवल चार्जशीट की प्रति उपलब्ध न होने के आधार पर डिफॉल्ट जमानत का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता, यदि जांच एजेंसी ने समय पर चार्जशीट दाखिल कर दी हो।
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