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कूरियर नेटवर्क से 475 करोड़ के सोने की तस्करी, DRI ने 11 आरोपियों को किया गिरफ्तार

मुंबई। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने विदेशी सोने की तस्करी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि इस गिरोह ने पिछले करीब नौ महीनों के दौरान देशभर में फैले कूरियर नेटवर्क का इस्तेमाल कर लगभग 318 किलोग्राम विदेशी सोने की डिलीवरी की। तस्करी किए गए सोने की अनुमानित कीमत करीब 475 करोड़ रुपये बताई गई है। मामले में पांच शहरों में चलाए गए अभियान के बाद कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह के कथित मास्टरमाइंड में से एक भी शामिल बताया गया है।
DRI की मुंबई जोनल यूनिट ने इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन बॉर्डर बुलियन बस्ट’ नाम दिया है। ऑपरेशन की शुरुआत 23 सितंबर को विशेष खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई थी। एजेंसी को सूचना मिली थी कि पश्चिम बंगाल और असम में भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते विदेशी सोने की तस्करी की जा रही है। सीमा पार से भारत लाए जाने के बाद सोने को देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाने के लिए कूरियर नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा था।
खुफिया जानकारी के आधार पर DRI ने पूरे नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया। जांच के दौरान एजेंसी का ध्यान ऐसे कूरियर नेटवर्क पर गया, जिसके माध्यम से कथित तौर पर तस्करी का सोना अलग-अलग शहरों तक पहुंचाया जा रहा था। इसके बाद अधिकारियों ने पांच शहरों में एक साथ कार्रवाई करते हुए नेटवर्क से जुड़े लोगों को पकड़ा।
एजेंसी की कार्रवाई में कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इनमें कथित रूप से नेटवर्क का संचालन करने वाले प्रमुख लोगों में से एक भी शामिल है। आरोपियों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि सीमा पार से आने वाला सोना किन लोगों के माध्यम से भारत में दाखिल होता था और इसके बाद इसे कूरियर नेटवर्क तक किस तरह पहुंचाया जाता था।
प्रारंभिक जांच में सामने आए आंकड़े इस नेटवर्क के बड़े पैमाने पर सक्रिय होने की ओर इशारा करते हैं। आरोप है कि करीब नौ महीने के भीतर ही लगभग 318 किलोग्राम विदेशी सोना देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाया गया। इसकी अनुमानित कीमत करीब 475 करोड़ रुपये बताई गई है। इतनी बड़ी मात्रा में सोने की कथित तस्करी सामने आने के बाद एजेंसी अब इससे जुड़े वित्तीय लेनदेन और दूसरे संपर्कों की भी जांच कर रही है।
इस पूरे ऑपरेशन में कूरियर नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कथित तौर पर सीमा पार से सोना आने के बाद इसे सीधे अंतिम खरीदार तक पहुंचाने के बजाय अलग-अलग माध्यमों से भेजा जाता था। इससे तस्करी के नेटवर्क को छिपाने और एजेंसियों की नजर से बचने की कोशिश की जाती थी।
DRI को मिली खुफिया जानकारी में पश्चिम बंगाल और असम में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लेख सामने आया था। आरोप है कि विदेशी सोना पहले सीमा पार से इन क्षेत्रों में पहुंचाया जाता और उसके बाद इसे देश के अन्य हिस्सों के लिए रवाना किया जाता था। जांच में अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क में सीमा क्षेत्र से जुड़े कितने लोग शामिल थे।
अधिकारियों के सामने बड़ी चुनौती पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की है। गिरफ्तार लोगों से पूछताछ और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तस्करी के सोने की मांग कहां से आती थी और इसे आखिर में किन लोगों तक पहुंचाया जाता था।
जांच का दायरा उन कूरियर चैनलों तक भी पहुंच रहा है, जिनका कथित तौर पर इस काम में इस्तेमाल किया गया। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि सामान्य कूरियर सेवाओं की आड़ में सोने को किस तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता था। इसके लिए पैकेजिंग, बुकिंग और डिलीवरी से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
करीब नौ महीने तक कथित रूप से संचालित इस नेटवर्क के जरिए 318 किलोग्राम सोना पहुंचाए जाने का आंकड़ा सामने आने के बाद एजेंसी पुराने लेनदेन की भी जांच कर रही है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि नेटवर्क वास्तव में कब से सक्रिय था और क्या नौ महीने से पहले भी इसी तरीके से विदेशी सोना देश में पहुंचाया जा रहा था।
गिरफ्तार 11 आरोपियों से नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। कथित मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उससे पूरे नेटवर्क की संरचना और काम करने के तरीके के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।
सोने की तस्करी के मामलों में अक्सर अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर स्थानीय स्तर तक कई अलग-अलग कड़ियां सक्रिय होती हैं। इस मामले में भी DRI अब सीमा पार संपर्क, परिवहन, कूरियर नेटवर्क, डिलीवरी और भुगतान से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
‘ऑपरेशन बॉर्डर बुलियन बस्ट’ के तहत की गई कार्रवाई ने इस बात की ओर ध्यान खींचा है कि कथित तस्करी नेटवर्क पारंपरिक तरीकों के अलावा सामान्य लॉजिस्टिक्स और कूरियर व्यवस्था का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी वजह से एजेंसी के लिए कूरियर नेटवर्क से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
फिलहाल DRI की जांच जारी है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 318 किलोग्राम विदेशी सोने के पीछे पूरा आर्थिक नेटवर्क कितना बड़ा था और इससे जुड़े अन्य लोग कौन हैं। साथ ही सीमा पार से सोना भारत में लाने से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में उसकी डिलीवरी तक की पूरी श्रृंखला को खंगाला जा रहा है।
पांच शहरों में एक साथ की गई कार्रवाई और 11 लोगों की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है। फिलहाल गिरफ्तार लोगों पर लगे आरोप जांच के दायरे में हैं और उनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।





