महाराष्ट्र

कूरियर पार्सल से 169 किलो सोने की तस्करी का खुलासा, DRI ने आठ आरोपियों को किया गिरफ्तार

Kavita2
27 Sept 2026 10:55 AM IST
कूरियर पार्सल से 169 किलो सोने की तस्करी का खुलासा, DRI ने आठ आरोपियों को किया गिरफ्तार
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मुंबई। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने विदेशी सोने की तस्करी से जुड़े एक कथित पार्सल नेटवर्क का खुलासा किया है। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल और असम के रास्ते विदेशी सोना भारत में लाया जाता था और इसके बाद कूरियर सर्विस के माध्यम से मुंबई, अहमदाबाद और दिल्ली में अलग-अलग रिसीवर तक पहुंचाया जाता था। जांच में करीब 169 किलोग्राम तस्करी के सोने की कथित डिलीवरी की जानकारी सामने आई है।

DRI ने इस मामले में बुधवार और गुरुवार के बीच अलग-अलग कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों पर कथित रूप से सोने की तस्करी के नेटवर्क में अलग-अलग भूमिका निभाने का आरोप है। सभी आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों में सोलापुर निवासी राजेंद्र गुंगे भी शामिल हैं। DRI के मुताबिक उन्हें कथित तौर पर एक कूरियर पार्सल लेते समय पकड़ा गया। जांच में इस पार्सल से 1,217.78 ग्राम तस्करी का सोना मिलने की बात सामने आई है। बरामद सोने की अनुमानित कीमत करीब 1.91 करोड़ रुपये बताई गई है।

राजेंद्र गुंगे की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने पार्सल की आवाजाही और उससे जुड़े संपर्कों की जांच आगे बढ़ाई। इसी दौरान नेटवर्क की दूसरी कड़ियों के बारे में जानकारी सामने आई। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कूरियर के जरिए भेजे जाने वाले सोने को कौन बुक करता था और अलग-अलग शहरों में इसे प्राप्त करने वाले लोगों की क्या भूमिका थी।

मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों की पहचान नई दिल्ली के प्रदीप पाटिल और धर्मेंद्र कुमार, पश्चिम बंगाल के दिलीप निकम और उनके बेटे गणेश, कोलकाता के नवनाथ जाधव तथा अहमदाबाद के अक्षित सोनी और प्रकाश सोनी के रूप में हुई है।

DRI की जांच में सामने आया है कि कथित नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। विदेशी सोना पहले बांग्लादेश से भारत में लाया जाता था। इसके लिए पश्चिम बंगाल और असम के रास्तों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। इसके बाद सोने को कूरियर पार्सल के माध्यम से देश के बड़े शहरों तक पहुंचाया जाता था।

मुंबई, अहमदाबाद और दिल्ली इस नेटवर्क के प्रमुख डिलीवरी केंद्रों में शामिल बताए जा रहे हैं। इन शहरों में मौजूद रिसीवर कथित तौर पर कूरियर पार्सल प्राप्त करते थे। एजेंसी अब इन रिसीवरों और सोने की आगे की सप्लाई से जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।

करीब 169 किलोग्राम सोने की कथित डिलीवरी सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह पूरा नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इस दौरान कुल कितने कूरियर पार्सल अलग-अलग शहरों में भेजे गए।

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कूरियर नेटवर्क से जुड़े रिकॉर्ड भी हैं। पार्सल की बुकिंग, भेजने वाले और प्राप्त करने वाले लोगों से संबंधित विवरण के जरिए तस्करी की पूरी श्रृंखला को समझने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही पार्सल की आवाजाही के पुराने रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

DRI यह भी पता लगाने में जुटी है कि बांग्लादेश से भारत में कथित रूप से सोना लाने के बाद इसे कूरियर नेटवर्क तक कौन पहुंचाता था। पश्चिम बंगाल और असम में इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। एजेंसी के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि सीमा पार से आने वाले सोने और देश के भीतर मौजूद रिसीवरों के बीच संपर्क किस तरह स्थापित किया जाता था।

सोलापुर के राजेंद्र गुंगे को कथित रूप से 1.91 करोड़ रुपये कीमत का सोना वाला पार्सल लेते हुए पकड़े जाने के बाद मामले की कई कड़ियां सामने आईं। एजेंसी अब इस पार्सल के स्रोत और इसकी अंतिम मंजिल से जुड़ी जानकारी की भी जांच कर रही है।

इसी तरह दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कोलकाता और अहमदाबाद से गिरफ्तार किए गए आरोपियों के आपसी संपर्क की जांच की जा रही है। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि क्या सभी आरोपी एक ही नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे और यदि हां, तो उनकी जिम्मेदारियां किस तरह तय की गई थीं।

कूरियर सर्विस के इस्तेमाल ने इस मामले को महत्वपूर्ण बना दिया है। सामान्य तौर पर सामान और दस्तावेज पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पार्सल नेटवर्क को कथित रूप से तस्करी का सोना भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी अब यह देख रही है कि पार्सलों में सोने को किस तरीके से छिपाया जाता था और सामान्य जांच से बचाने के लिए क्या तरीका अपनाया जाता था।

मामले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। सभी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद एजेंसी अपनी जांच जारी रखे हुए है। गिरफ्तार लोगों से मिली जानकारी और बरामद रिकॉर्ड के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। करीब 169 किलोग्राम सोने की कथित सप्लाई बड़े आर्थिक नेटवर्क की ओर संकेत करती है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सोने की खरीद और बिक्री से मिलने वाली रकम का भुगतान किस तरीके से किया जाता था और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

DRI की जांच फिलहाल तस्करी की पूरी श्रृंखला को सामने लाने पर केंद्रित है। इसमें बांग्लादेश से सोना भारत लाने वाले लोगों से लेकर पश्चिम बंगाल और असम के रास्ते इसे आगे भेजने वाले तथा मुंबई, अहमदाबाद और दिल्ली में पार्सल प्राप्त करने वाले लोगों तक की भूमिका खंगाली जा रही है।

इस मामले में गिरफ्तार सभी लोगों पर लगे आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। उनकी जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल DRI करीब 169 किलोग्राम विदेशी सोने की कथित आवाजाही से जुड़े दस्तावेज, कूरियर रिकॉर्ड और अन्य सबूतों की जांच कर रही है। एजेंसी की कार्रवाई आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और सोने की तस्करी के पूरे तरीके के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

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