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SIT जांच में सामने आया: अशोक खरात को एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम से मिली मदद

Maharashtra महाराष्ट्र: स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में खुलासा हुआ है कि अशोक खरात, जो खुद को भगवान मानता है और जिस पर अंधविश्वास और धोखाधड़ी के माध्यम से लोगों को ठगने का आरोप है, को कथित तौर पर प्रशासनिक प्रणाली के अंदर से सीधे सपोर्ट मिला। जांच में यह संकेत मिले हैं कि खरात को मदद करने में कुछ उच्च अधिकारियों की भूमिका भी रही है।
SIT सूत्रों के अनुसार, नासिक में पहले पोस्टेड एक पूर्व महिला सीनियर ऑफिसर और दो अन्य सीनियर पुलिस अधिकारियों के संभावित शामिल होने की जांच की जा रही है। आरोप है कि महिला ऑफिसर ने खरात को प्रशासनिक मामलों में मदद करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। इसके बदले में इन्वेस्टिगेटर का अनुमान है कि महिला ऑफिसर को कई फायदे प्राप्त हुए।
जांच के दौरान यह भी पता चला है कि खरात ने अपने पॉलिटिकल नेटवर्क का इस्तेमाल करके महिला ऑफिसर की पसंदीदा पोस्टिंग सुनिश्चित करवाई। SIT ने महिला ऑफिसर और खरात के बीच कथित फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का पता लगाया है। इन्वेस्टिगेटर अब सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स और बैंक डिटेल्स की जांच कर रहे हैं ताकि यह पुष्टि की जा सके कि वित्तीय लेन-देन में कोई गड़बड़ी या आपराधिक इरादा था या नहीं।
जांचकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रशासनिक पद का दुरुपयोग गंभीर अपराध माना जाता है, और यदि आरोप साबित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। SIT ने कहा कि मामले में सभी संभावित लिंक और कनेक्शन्स की पूरी तरह से छानबीन की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, खरात ने अंधविश्वास और धोखाधड़ी के जरिए लोगों को प्रभावित किया और उन्हें आर्थिक लाभ और अन्य सुविधाएँ दिलाई। जांच में यह सामने आया है कि प्रशासनिक प्रणाली में मिली मदद ने उसके संचालन को और मजबूत किया। SIT ने कहा कि वह किसी भी स्तर पर मिली मदद की जांच पूरी करेंगे, चाहे वह प्रशासनिक हो या राजनीतिक।
जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि महिला ऑफिसर और अन्य अधिकारियों के निर्णय और हस्तक्षेप ने खरात को कई मामलों में लाभ पहुंचाया। SIT के अधिकारी अब इन सभी मामलों की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या दुरुपयोग को दस्तावेजीकृत किया जा सके।
इस मामले में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी ध्यान दिया जा रहा है। SIT ने कहा कि जांच में किसी भी सरकारी अधिकारी की भूमिका की पुष्टि होने पर उन्हें कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में प्रशासनिक और राजनीतिक मदद मिलने से अपराधी अपने दुष्प्रभाव को और बढ़ा सकते हैं। SIT ने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और सभी तथ्य सामने लाए जाएंगे।
कुल मिलाकर, SIT की जांच ने संकेत दिए हैं कि अशोक खरात को सिर्फ़ अपने नेटवर्क के जरिए ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी मदद मिली। मामले की आगे की जांच से यह साफ होगा कि किन अधिकारियों ने उसके साथ सहयोग किया और किस हद तक वित्तीय लेन-देन में संलिप्तता रही।





