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नासिक में सिंहस्थ कुंभ 2026-28 का आगाज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रामकुंड में फहराया धर्मध्वज

नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी के पवित्र तट पर शनिवार, 31 अक्टूबर को सिंहस्थ कुंभ पर्व 2026-2028 का विधिवत शुभारंभ हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोपहर 12 बजकर 2 मिनट के शुभ मुहूर्त पर पंचवटी स्थित ऐतिहासिक रामकुंड में धर्मध्वजारोहण कर इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन की शुरुआत की। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच संपन्न हुए इस समारोह में देशभर से आए संत-महात्मा, धर्माचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। धर्मध्वज फहराए जाने के साथ ही नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ की लगभग 21 महीने लंबी धार्मिक अवधि शुरू हो गई है। यह पर्व 24 जुलाई 2028 को ध्वज अवतरण के साथ संपन्न होगा।
इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति ने सबसे पहले गोदावरी नदी के तट पर स्थित रामकुंड में विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद निर्धारित शुभ मुहूर्त में धर्मध्वज फहराया गया। समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार सहित कई वरिष्ठ नेता, अधिकारी और धार्मिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
President Droupadi Murmu inaugurated the 2026–28 Simhastha Kumbh Parva by hoisting the Dharmadhwaja at Nashik’s Ramkund at 12:02 pm on Saturday. The grand spiritual festival will continue until July 24, 2028, with its first Amrut Snan scheduled for August 2, 2027. https://t.co/RdIG4X05eQ
— Varad Bhatkhande | Journalist (@VaradBhatkhande) October 31, 2026
12:02 बजे धर्मध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ सिंहस्थ पर्व
31 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 2 मिनट का समय इस बार के सिंहस्थ कुंभ के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इसी शुभ मुहूर्त में नासिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में एक साथ धर्मध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
नासिक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य धर्मध्वज फहराया, जबकि त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुशावर्त तीर्थ पर ध्वजारोहण किया। इस तरह दोनों प्रमुख तीर्थस्थलों पर एक साथ धार्मिक आयोजन के माध्यम से सिंहस्थ पर्व की औपचारिक शुरुआत हुई।
राष्ट्रपति ने रामकुंड में पूजा-अर्चना के साथ गोदावरी नदी के प्रति अपनी श्रद्धा भी व्यक्त की। इस दौरान संतों और श्रद्धालुओं ने धार्मिक मंत्रों के उच्चारण के साथ भगवान का जयघोष किया।
भगवान राम से जुड़ी है रामकुंड की पौराणिक मान्यता
नासिक का रामकुंड हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। यह गोदावरी नदी के किनारे स्थित है और पंचवटी क्षेत्र में होने के कारण इसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान पंचवटी में निवास किया था। रामकुंड को भी भगवान राम से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के कारण पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के चरणों के स्पर्श से यह भूमि पवित्र हुई थी।
कुंभ के दौरान यहां स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु गोदावरी में पवित्र स्नान करने और मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
नासिक के साथ त्र्यंबकेश्वर भी सिंहस्थ कुंभ का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और कुशावर्त तीर्थ श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।
2 अगस्त 2027 को होगा पहला अमृत स्नान
धर्मध्वजारोहण के साथ कुंभ की औपचारिक अवधि शुरू हो गई है, लेकिन श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी भीड़ वर्ष 2027 में होने वाले अमृत स्नान के दौरान उमड़ने की उम्मीद है। कुंभ के दौरान निर्धारित शुभ तिथियों पर गोदावरी नदी में स्नान करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
करीब 12 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इतने बड़े आयोजन को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क, परिवहन, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, चिकित्सा और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा गोदावरी नदी के घाटों का विकास, साफ-सफाई और भीड़ नियंत्रण के लिए भी योजनाएं तैयार की गई हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने सिंहस्थ कुंभ से जुड़ी विकास परियोजनाओं के लिए करीब 22,425 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत सड़क संपर्क, जलापूर्ति, सीवेज व्यवस्था, नदी तट विकास, स्वच्छता और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है।
कुंभ मेले के संचालन और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय के लिए नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला प्राधिकरण को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
अखाड़ों और संतों की भागीदारी बनेगी खास आकर्षण
सिंहस्थ कुंभ में देश के विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों और महंतों की भागीदारी इसका प्रमुख आकर्षण होगी। नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ की खास परंपरा यह है कि यहां शैव और वैष्णव अखाड़ों के स्नान की अलग-अलग व्यवस्था रहती है।
कुंभ के दौरान धार्मिक शोभायात्राएं, प्रवचन, भजन-कीर्तन और विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। देशभर से आने वाले साधु-संत श्रद्धालुओं को धर्म और अध्यात्म से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे।
इसके साथ ही स्थानीय धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक गतिविधियों और गोदावरी आरती को भी विशेष महत्व दिया जाएगा। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से धार्मिक आयोजनों में शामिल होने का अवसर मिले।
24 जुलाई 2028 को ध्वज अवतरण के साथ होगा समापन
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ 2026-2028 का आयोजन लगभग 21 महीने तक चलेगा। 31 अक्टूबर 2026 को धर्मध्वजारोहण के साथ शुरू हुए इस पर्व का समापन 24 जुलाई 2028 को ध्वज अवतरण के साथ होगा।
इस दौरान नासिक और त्र्यंबकेश्वर में अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कुंभ का मुख्य आकर्षण अगस्त और सितंबर 2027 में होने वाले अमृत स्नान होंगे।
करीब 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाला यह सिंहस्थ कुंभ महाराष्ट्र के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल है। पिछला नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ 2015-2016 में आयोजित हुआ था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा धर्मध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ यह आयोजन अब देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था, अध्यात्म और धार्मिक परंपराओं का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।





