महाराष्ट्र

Jalna में DySP के हमले पर SHRC ने लिया संज्ञान

SHIDDHANT
20 Aug 2025 11:52 PM IST
Jalna में DySP के हमले पर SHRC ने लिया संज्ञान
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MAHARASHTRA महाराष्ट्र : राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने राजनीतिक संगठन वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर संज्ञान लिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जालना के दो VBA कार्यकर्ताओं को मंत्री पंकजा मुंडे से मिलने का प्रयास करते समय जालना के उपअधीक्षक पुलिस (DySP) अनंत कुलकर्णी ने लातों से हमला किया। आयोग ने आदेश में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को जवाब देने के लिए कहा है और पीड़ितों को उचित मुआवजा न देने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके अलावा आयोग ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ अभियोजन और विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश भी दिया है। SHRC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एएम बादर ने जालना के पुलिस अधीक्षक को प्रारंभिक तथ्य-जांच रिपोर्ट तैयार कर चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित की है। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं की गई, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी और मामला एकतरफा निर्णय (ex parte) के आधार पर निपटाया जाएगा।

VBA की शिकायत में कहा गया है कि जालना में दोनों कार्यकर्ता मंत्री से मुलाकात करने गए थे, तभी DySP अनंत कुलकर्णी ने उनकी पिटाई की। आरोपियों द्वारा किया गया यह कृत्य संविधान और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। आयोग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत विभागीय और कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया है। आयोग ने पुलिस विभाग को निर्देश दिया है कि पीड़ितों के खिलाफ किसी प्रकार का प्रतिशोध न किया जाए और जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए। इसके अलावा SHRC ने गृह विभाग को नोटिस जारी कर मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है। आयोग ने कहा है कि यदि जांच रिपोर्ट और पीड़ितों की शिकायतों का समाधान समय पर नहीं किया गया, तो आयोग स्वयं मुआवजा और कार्रवाई का निर्णय ले सकता है।

इस मामले से जालना में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार सभी नागरिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना पुलिस का दायित्व है। DySP के खिलाफ विभागीय जांच और संभावित अभियोजन यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे उल्लंघनों पर किसी भी तरह की सहमति या छूट नहीं दी जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि SHRC का यह कदम राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। आयोग की सख्त कार्रवाई यह संदेश देती है कि मानवाधिकारों के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। इस मामले में आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को निर्देश दिया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो। जालना पुलिस को चार सप्ताह के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी और आयोग की अगली सुनवाई में इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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