महाराष्ट्र

Shiv Sena पार्षद रमेश म्हात्रे 13 जुलाई तक रिमांड पर

Kavita2
11 July 2026 9:59 AM IST
Shiv Sena पार्षद रमेश म्हात्रे 13 जुलाई तक रिमांड पर
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डोंबिवली: महाराष्ट्र के डोंबिवली स्थित कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट के मामले में शुक्रवार को महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया। कल्याण की अदालत ने शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे और तीन अन्य सह-आरोपियों को 13 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। अदालत ने साथ ही पुलिस को निर्देश दिया कि हिरासत के दौरान रमेश म्हात्रे का हर छह घंटे में मेडिकल परीक्षण कराया जाए, क्योंकि रिमांड सुनवाई के दौरान उनके वकील ने उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया था।

यह मामला सामने आने के बाद पूरे महाराष्ट्र के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। सरकारी अस्पताल के भीतर डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट की घटना ने चिकित्सा समुदाय में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार देर रात डोंबिवली के सरकारी शास्त्रीनगर अस्पताल में हुई। आरोप है कि कुछ लोगों ने अस्पताल परिसर में घुसकर डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनके साथ मारपीट की। घटना के दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कुछ समय के लिए स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुईं।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद विष्णुनगर पुलिस थाना में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एक महिला सहित पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।

जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी के रूप में शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे और अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया। शुक्रवार को सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस ने आगे की जांच के लिए उनकी रिमांड की मांग की।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि रमेश म्हात्रे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस पर अदालत ने पुलिस हिरासत तो मंजूर कर दी, लेकिन साथ ही यह भी निर्देश दिया कि आरोपी का हर छह घंटे में मेडिकल परीक्षण कराया जाए ताकि उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि हिरासत के दौरान आरोपी के स्वास्थ्य संबंधी अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और अस्पताल के डॉक्टरों, कर्मचारियों तथा अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किस-किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही।

इस घटना के बाद राज्यभर के डॉक्टरों और स्वास्थ्य संगठनों में रोष व्याप्त है। कई चिकित्सक संगठनों ने अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अस्पतालों में आए दिन स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की घटनाएं चिंता का विषय हैं और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार दबाव में काम करते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर के भीतर हिंसा या मारपीट की घटनाएं न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिराती हैं, बल्कि मरीजों की चिकित्सा सेवाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। सभी उपलब्ध साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की भूमिका का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल प्रशासन ने भी घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि चिकित्सा सेवाओं को सुरक्षित वातावरण में संचालित करना आवश्यक है। अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

फिलहाल अदालत के आदेश के अनुसार रमेश म्हात्रे और तीन अन्य आरोपी 13 जुलाई तक पुलिस हिरासत में रहेंगे। इस दौरान पुलिस उनसे पूछताछ कर घटना से जुड़े सभी तथ्यों को स्पष्ट करने का प्रयास करेगी। मामले की जांच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

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