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प्याज की कीमतों में जबरदस्त उछाल, एक हफ्ते में 700 रुपये महंगा हुआ क्विंटल

नासिक। देश में प्याज की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र के नासिक जिले की प्रमुख प्याज मंडी लासलगांव में थोक कीमतों में एक सप्ताह से कुछ अधिक समय के भीतर लगभग 700 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पुराने रबी प्याज का भंडार कम होने और नई खरीफ फसल के बाजार में पहुंचने में देरी के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है। लासलगांव कृषि उपज मंडी समिति में गर्मियों वाले प्याज की अधिकतम कीमत 10 अक्टूबर को 3,601 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो 19 अक्टूबर को बढ़कर 4,525 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई। इसी अवधि में औसत कीमत 3,351 रुपये से बढ़कर 4,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। मंडी में दैनिक आवक लगभग 15 प्रतिशत घटने से कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
लासलगांव मंडी में तेजी से बढ़े प्याज के दाम
देश की प्रमुख प्याज मंडियों में शामिल लासलगांव में पिछले कुछ दिनों से कीमतों में लगातार मजबूती देखी जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, 10 अक्टूबर को गर्मियों वाले प्याज का अधिकतम थोक भाव 3,601 रुपये प्रति क्विंटल था।
19 अक्टूबर तक यह बढ़कर 4,525 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया।
इस तरह अधिकतम कीमत में 924 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई।
वहीं, औसत थोक भाव 3,351 रुपये से बढ़कर 4,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। औसत कीमत में 699 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि दर्ज की गई।
कीमतों में इस तेजी ने प्याज के थोक बाजार का ध्यान खींचा है।
मंडी में 15 प्रतिशत कम हुई आवक
प्याज की कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण बाजार में आपूर्ति कम होना बताया जा रहा है।
हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के विक्रम सिंह के अनुसार, लासलगांव मंडी में प्याज की दैनिक आवक लगभग 15 प्रतिशत घट गई है।
आवक कम होने का सीधा असर थोक बाजार में उपलब्ध माल की मात्रा पर पड़ता है।
जब मंडी में बिक्री के लिए कम प्याज पहुंचता है और खरीद की मांग बनी रहती है, तो कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना रहती है।
फिलहाल लासलगांव में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है।
पुराने रबी प्याज का स्टॉक घटा
बाजार में कीमतें बढ़ने के पीछे पुराने रबी प्याज का भंडार कम होना भी महत्वपूर्ण कारण है।
रबी सीजन में उत्पादित प्याज का एक हिस्सा भंडारण करके बाद के महीनों में बाजार में बेचा जाता है।
इससे नई फसल आने तक बाजार में आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलती है।
लेकिन समय बीतने के साथ भंडारित प्याज की उपलब्धता कम होने लगती है।
मौजूदा स्थिति में पुराने स्टॉक की कमी से मंडियों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।
व्यापारियों और खरीदारों के लिए उपलब्ध प्याज की मात्रा घटने से थोक कीमतों में तेजी आई है।
नई खरीफ फसल आने में हो रही देरी
प्याज की कीमतों में उछाल का दूसरा प्रमुख कारण नई खरीफ फसल की बाजार में आवक में देरी है।
आमतौर पर नई फसल आने से मंडियों में उपलब्धता बढ़ती है और कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
लेकिन इस बार नई खरीफ फसल समय पर पर्याप्त मात्रा में बाजार तक नहीं पहुंच पाई है।
इससे पुराने स्टॉक और नई फसल के बीच आपूर्ति का अंतर बढ़ गया है।
हालांकि, खरीफ फसल की आवक में देरी के पीछे मौसम या किसी अन्य विशिष्ट कारण की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
शनिवार के मुकाबले भी कीमतों में तेजी
लासलगांव मंडी में सोमवार को प्याज का अधिकतम भाव 4,525 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।
यह शनिवार के मुकाबले लगभग दो रुपये प्रति किलोग्राम अधिक बताया गया है।
इससे संकेत मिलता है कि थोक बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
हालांकि, अलग-अलग गुणवत्ता और आकार के प्याज की कीमतों में अंतर हो सकता है।
मंडी में अधिकतम कीमत उच्च गुणवत्ता वाले प्याज की बिक्री से जुड़ी हो सकती है, जबकि औसत कीमत व्यापक कारोबार की स्थिति को दर्शाती है।
इसलिए बाजार की वास्तविक स्थिति समझने के लिए औसत और अधिकतम दोनों कीमतों को देखना महत्वपूर्ण है।
खुदरा बाजार पर पड़ सकता है असर
थोक बाजार में प्याज महंगा होने का असर आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
हालांकि, खुदरा बाजार में कीमतें परिवहन खर्च, स्थानीय आपूर्ति, गुणवत्ता और व्यापारिक लागत जैसे कई कारकों पर निर्भर करती हैं।
इसलिए थोक भाव में हुई बढ़ोतरी का पूरा असर तुरंत खुदरा कीमतों पर पड़े, यह जरूरी नहीं है।
फिर भी प्याज की आपूर्ति सीमित रहने पर आम उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
फिलहाल विभिन्न शहरों में प्याज की खुदरा कीमतों का ताजा तुलनात्मक विवरण उपलब्ध नहीं है।
आम परिवारों के रसोई बजट पर नजर
प्याज भारतीय रसोई में रोजमर्रा के इस्तेमाल की प्रमुख सब्जियों में शामिल है।
घरों के अलावा होटल, रेस्तरां और खानपान से जुड़े व्यवसायों में भी इसकी नियमित मांग रहती है।
ऐसे में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
विशेष रूप से उन परिवारों के लिए परेशानी बढ़ सकती है, जो सीमित मासिक बजट में घरेलू खर्च चलाते हैं।
हालांकि, उपभोक्ताओं पर वास्तविक असर स्थानीय खुदरा कीमतों के अनुसार अलग-अलग होगा।
किसानों और व्यापारियों के लिए अलग स्थिति
प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी किसानों और उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग मायने रखती है।
जिन किसानों के पास बिक्री योग्य प्याज उपलब्ध है, उन्हें ऊंचे बाजार भाव का लाभ मिल सकता है।
वहीं, जिन किसानों का पुराना स्टॉक समाप्त हो चुका है, उन्हें वर्तमान तेजी से सीधा फायदा नहीं मिलेगा।
व्यापारियों के लिए भी खरीद मूल्य, भंडारण लागत और बाजार में उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है।
इसलिए बढ़ते भाव का लाभ सभी उत्पादकों और कारोबारियों को समान रूप से मिलने की संभावना नहीं होती।
नई फसल की आवक से मिल सकती है राहत
बाजार विशेषज्ञों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नई खरीफ फसल मंडियों में कब और कितनी मात्रा में पहुंचेगी।
यदि नई फसल की आवक बढ़ती है, तो बाजार में प्याज की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
इससे कीमतों पर बना दबाव कम होने की संभावना रहेगी।
हालांकि, नई फसल आने के बाद कीमतें कितनी घटेंगी, इसका अभी निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
आने वाले दिनों में मंडियों की दैनिक आवक और मांग की स्थिति कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आपूर्ति की कमी से बाजार में बनी तेजी
लासलगांव मंडी के आंकड़े बताते हैं कि प्याज की कीमतों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
10 से 19 अक्टूबर के बीच औसत थोक भाव में 699 रुपये और अधिकतम भाव में 924 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई।
वहीं, दैनिक आवक में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
पुराने रबी प्याज का स्टॉक कम होने और नई खरीफ फसल के आने में देरी से बाजार में आपूर्ति सीमित बनी हुई है। अब कीमतों में राहत की संभावना काफी हद तक नई फसल की आवक पर निर्भर करेगी। यदि आपूर्ति जल्द नहीं बढ़ी, तो खुदरा बाजार में भी प्याज की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।





