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महाराष्ट्र
शरद पवार हुए डिस्चार्ज, अब NCP के विलय पर सबकी नजरें
Rajeshwari Nishad
7 Nov 2026 3:15 PM IST

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता शरद पवार को ब्रीच कैंडी अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अब उनका आगे का इलाज उनके आवास पर ही किया जाएगा। उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच चिंता बनी हुई थी। इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के साथ उनकी मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
इस मुलाकात और राजनीतिक गतिविधियों को NCP के दोनों गुटों के संभावित विलय से जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के बीच सुनेत्रा पवार की गैर-मौजूदगी भी राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गई है। हालांकि, दोनों गुटों के विलय को लेकर अभी किसी आधिकारिक फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।
ब्रोंकाइटिस और सीने में संक्रमण का हुआ था इलाज
85 वर्षीय शरद पवार को सांस लेने में परेशानी और सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इससे पहले 2 नवंबर को उन्हें पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में भर्ती कराया गया था। वहां से 4 नवंबर को छुट्टी मिलने के बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया।डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें ब्रोंकाइटिस का अटैक और सीने में संक्रमण हुआ था। उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार आया। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. प्रतीत समदानी ने बताया कि शरद पवार की हालत स्थिर है और वह इलाज पर अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
प्रफुल्ल पटेल से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
शरद पवार के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल की मुलाकात को लेकर हुई। प्रफुल्ल पटेल ने गुरुवार को ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचकर शरद पवार का हालचाल जाना था।रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। इसके बाद इस मुलाकात का एक वीडियो सामने आया, जिसमें दोनों नेताओं के बीच 10 नवंबर के बाद फिर बैठकर बातचीत करने की बात होती दिखाई देती है।इस वीडियो के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। राजनीतिक जानकार इसे NCP के दोनों गुटों के बीच संभावित बातचीत से जोड़कर देख रहे हैं।
10 नवंबर के बाद होने वाली बैठक पर नजर
प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार के बीच सामने आए वीडियो में 10 नवंबर के बाद दोबारा मिलने की सहमति की बात ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।महाराष्ट्र की राजनीति में इस संभावित बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि वर्ष 2023 में NCP के विभाजन के बाद दोनों गुट अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर चल रहे हैं।एक तरफ शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) है, जबकि दूसरी तरफ अजित पवार के नेतृत्व में अलग हुआ गुट है। अजित पवार गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न मिला था।अब दोनों गुटों के बीच दोबारा बातचीत की संभावना को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता है। हालांकि, 10 नवंबर के बाद होने वाली संभावित बैठक का एजेंडा और उसमें किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सुनेत्रा पवार की गैर-मौजूदगी भी चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम में सुनेत्रा पवार की गैर-मौजूदगी भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है। शरद पवार से मिलने के लिए कई बड़े नेता अस्पताल पहुंचे, लेकिन सुनेत्रा पवार की मुलाकात नहीं होने को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सुनेत्रा पवार की ओर से मुलाकात के लिए समय लेने की कोशिश भी हुई थी, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। हालांकि, इसके पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है।राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या NCP के भीतर नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर कोई मतभेद चल रहा है? क्या दोनों गुटों के वरिष्ठ नेता फिर से एक साथ आने की संभावनाएं तलाश रहे हैं?
2023 में दो हिस्सों में बंट गई थी NCP
NCP का विभाजन महाराष्ट्र की राजनीति की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक रहा है। जुलाई 2023 में अजित पवार ने कई विधायकों के साथ अलग राजनीतिक रास्ता अपनाते हुए एकनाथ शिंदे सरकार को समर्थन दिया था।इसके बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर लंबी लड़ाई चली। चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को NCP का नाम और घड़ी चुनाव चिह्न आवंटित किया। वहीं शरद पवार के गुट को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) नाम मिला।इस विभाजन का असर महाराष्ट्र की राजनीति पर भी पड़ा। दोनों गुटों ने अलग-अलग चुनावी रणनीतियां अपनाईं और अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश की।अब दोनों के संभावित विलय की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
क्या फिर एक होंगे NCP के दोनों गुट?
NCP के दोनों गुटों के विलय की अटकलें पिछले कुछ समय से राजनीतिक चर्चाओं में बनी हुई हैं। प्रफुल्ल पटेल की शरद पवार से मुलाकात और 10 नवंबर के बाद फिर बैठने की बात ने इन चर्चाओं को नया आधार दिया है।हालांकि, विलय का फैसला केवल दो वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात से नहीं हो सकता। इसके लिए दोनों गुटों के नेताओं, विधायकों, संगठन और राजनीतिक सहयोगियों के बीच सहमति जरूरी होगी।इसके अलावा यह भी देखना होगा कि दोनों गुटों के बीच नेतृत्व, पार्टी संगठन, चुनाव चिह्न और राजनीतिक गठबंधन जैसे मुद्दों पर क्या सहमति बनती है।फिलहाल किसी भी गुट की ओर से विलय का औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है। इसलिए इसे अभी राजनीतिक संभावना और अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
महाराष्ट्र की राजनीति में आगे क्या होगा?
शरद पवार की अस्पताल से छुट्टी के बाद अब उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर भी नजर रहेगी। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है, इसलिए तत्काल सार्वजनिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी सीमित रह सकती है।दूसरी ओर, प्रफुल्ल पटेल के साथ प्रस्तावित अगली मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 10 नवंबर के बाद होने वाली बातचीत NCP के दोनों गुटों को करीब लाएगी या यह केवल व्यक्तिगत और संगठनात्मक संवाद तक सीमित रहेगी?
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