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भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक मतभेद भुलाएं: अमित शाह

नवी मुंबई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक उपयोग के लिए सभी राजनीतिक दलों से मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाषा का विषय राजनीति या दलगत विचारधारा तक सीमित नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध देश की संस्कृति, ज्ञान परंपरा और नई पीढ़ी के भविष्य से है। कोई भी बच्चा अपने देश, समाज और सांस्कृतिक विरासत को सबसे सहज रूप से अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही समझ सकता है।
अमित शाह नवी मुंबई के वाशी स्थित सिडको प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से राजभाषा अधिकारी, कर्मचारी, साहित्यकार, शिक्षाविद् और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में राजभाषा हिंदी के विकास के साथ अन्य भारतीय भाषाओं से उसके समन्वय, तकनीक, अनुवाद और प्रशासनिक उपयोग जैसे विषयों पर विमर्श किया जा रहा है।
भाषा को राजनीति से दूर रखने की अपील
अपने संबोधन में गृह मंत्री ने कहा कि भारतीय भाषाओं को मजबूत बनाने के विषय पर राजनीतिक मतभेदों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। देश की प्रत्येक भाषा भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। इसलिए सभी दलों, सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को भारतीय भाषाओं के प्रसार के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी को आगे बढ़ाने का अर्थ किसी अन्य भारतीय भाषा को कमजोर करना नहीं है। हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक हैं। एक भाषा के साहित्य, शब्दों और ज्ञान को दूसरी भाषा तक पहुंचाने से सभी भाषाएं समृद्ध होंगी। अनुवाद और तकनीक इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मातृभाषा में शिक्षा पर दिया जोर
अमित शाह ने कहा कि बच्चा जिस भाषा में घर-परिवार से संवाद करता है, उसी में उसकी सोच और समझ का प्रारंभिक विकास होता है। मातृभाषा में शिक्षा मिलने से विद्यार्थी जटिल विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकता है और अपनी बात अधिक सहजता से व्यक्त कर सकता है। विदेशी भाषा का ज्ञान उपयोगी हो सकता है, लेकिन वह मातृभाषा का विकल्प नहीं बन सकता।
उन्होंने अभिभावकों से घर में बच्चों के साथ मातृभाषा में संवाद करने की अपील भी की। उनके अनुसार, यदि नई पीढ़ी अपनी भाषा पढ़ना, लिखना और बोलना छोड़ देगी तो वह धीरे-धीरे अपने इतिहास, लोक साहित्य, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से भी दूर हो सकती है। इसीलिए शिक्षा व्यवस्था में मातृभाषाओं को उचित स्थान देना आवश्यक है।
प्रशासन की भाषा बनाने का लक्ष्य
गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार भारतीय भाषाओं को केवल साहित्य और सामान्य बातचीत तक सीमित नहीं रखना चाहती। सरकार का लक्ष्य इन्हें प्रशासन, विज्ञान, तकनीक, न्याय और अनुसंधान की प्रभावी भाषा बनाना है। जब सरकारी योजनाओं, कानूनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी आम लोगों को उनकी भाषा में मिलेगी, तो शासन में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में भारतीय भाषाओं का उपयोग बढ़ने से नागरिकों और प्रशासन के बीच दूरी कम होगी। आम व्यक्ति अपनी शिकायत, सुझाव और अधिकारों से संबंधित जानकारी अधिक आसानी से समझ सकेगा। इससे पारदर्शिता तथा जवाबदेही को भी बढ़ावा मिलेगा।
अमित शाह इससे पहले भी कह चुके हैं कि हिंदी को प्रशासन के साथ विज्ञान, तकनीक, न्याय और पुलिस व्यवस्था की भाषा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच बेहतर संवाद और अनुवाद व्यवस्था विकसित करने पर लगातार जोर दिया है। वर्ष 2025 के राजभाषा सम्मेलन में भी उन्होंने भारतीय भाषाओं को परस्पर पूरक बताया था।
साहित्य से समृद्ध होंगी देश की भाषाएं
शाह ने भारतीय भाषाओं के साहित्य को एक-दूसरे तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि देश की अलग-अलग भाषाओं में उपलब्ध श्रेष्ठ साहित्य, इतिहास, लोककथाओं, वैज्ञानिक सामग्री और विचारों का अनुवाद किया जाना चाहिए। इससे एक क्षेत्र का ज्ञान दूसरे क्षेत्र के लोगों तक पहुंचेगा और राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक संवाद मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। प्रत्येक भाषा के पास अपना विशाल शब्द भंडार, साहित्य और ऐतिहासिक अनुभव है। यदि इन भाषाओं के बीच आदान-प्रदान बढ़ाया जाए तो देश की संपूर्ण ज्ञान संपदा अधिक समृद्ध हो सकती है।
तकनीक और अनुवाद की भूमिका महत्वपूर्ण
सम्मेलन में भाषा और आधुनिक तकनीक के मेल पर भी विशेष जोर दिया गया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शब्दकोश और स्वचालित अनुवाद प्रणाली के माध्यम से सरकारी दस्तावेज तथा शैक्षणिक सामग्री विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे उन लोगों को विशेष लाभ होगा जो हिंदी या अंग्रेजी में सहज नहीं हैं।
गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए भारतीय भाषा अनुभाग स्थापित किया है। इसका उद्देश्य अनुवाद, शब्दावली निर्माण और तकनीकी माध्यमों से भाषाओं के बीच संवाद को मजबूत करना है।
दो दिवसीय सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में हिंदी को राजभाषा, जनभाषा और संपर्क भाषा के रूप में विकसित करने के साथ भारतीय भाषाओं के संरक्षण और तकनीकी उपयोग पर चर्चा होगी। अमित शाह के संबोधन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि भाषाई विकास का रास्ता प्रतिस्पर्धा या विवाद से नहीं, बल्कि परस्पर सम्मान, सहयोग और मातृभाषा के प्रति गौरव से निकलेगा।





