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Sanjay निरुपम का उद्धव ठाकरे पर हमला, नेतृत्व शैली को बताया पार्टी के लिए नुकसानदायक

Maharashtra महाराष्ट्र: बीजेपी के डिप्टी लीडर और प्रवक्ता संजय निरुपम ने एक बार फिर बीजेपी (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला है। वे पार्टी के नेतृत्व के तौर-तरीकों और वकीलों तथा चुने हुए ठिकानों से कथित दूरी को लेकर गंभीर सवाल उठाते हैं।
संजय निरुपम ने आरोप लगाया कि शिवसेना (UBT) की वर्तमान नेतृत्व शैली में संवाद की कमी है, जिसके कारण पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि कार्यकर्ताओं और नेताओं से दूरी बनाए रखने की प्रवृत्ति संगठन को कमजोर कर रही है और इसका असर जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी नेतृत्व का “अहंकार” भविष्य में शिवसेना (UBT) के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। निरुपम के अनुसार, जब संगठन में सामूहिक निर्णय और संवाद की कमी होती है, तो इससे अंदरूनी असंतोष पैदा होता है और कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है।
निरुपम ने आगे कहा कि पिछले कुछ महीनों में कई सांसदों और पार्टी पदाधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी और असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने दावा किया कि यह स्थिति पार्टी के भीतर बढ़ती अस्थिरता को दर्शाती है और यदि इसे समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर कई स्तरों पर असंतोष की आवाजें उठ रही हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना संगठन के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। उनके अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती उसके आंतरिक लोकतंत्र और संवाद पर निर्भर करती है, और यदि यह कमजोर होता है तो संगठन की पकड़ भी कमजोर हो जाती है।
संजय निरुपम के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (UBT) और उसके नेतृत्व को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान पार्टी के भीतर जारी मतभेदों को और अधिक सार्वजनिक कर रहे हैं।
हालांकि, शिवसेना (UBT) की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस तरह के आरोपों का जवाब संगठनात्मक मंच पर दिया जा सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच चल रही खींचतान पहले से ही चर्चा में है, और ऐसे बयानों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।
कुल मिलाकर, संजय निरुपम के इस बयान ने एक बार फिर शिवसेना (UBT) की अंदरूनी राजनीति और नेतृत्व शैली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





