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सासाराम। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को सासाराम केंद्रीय विद्यालय परिसर में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि मार्च 2027 से पहले सासाराम और औरंगाबाद शहर में सोन नदी से पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि दोनों शहरों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बढ़ने से लंबे समय से बनी पानी की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर घर तक शुद्ध और स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी योजना के तहत सोन नदी के डेहरी स्थित एनीकट क्षेत्र में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। इस प्लांट से पानी को शुद्ध करने के बाद सासाराम और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य लोगों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना है। गर्मी के मौसम में सासाराम और औरंगाबाद के कई क्षेत्रों में पानी की समस्या बढ़ जाती है। भूजल स्तर में गिरावट और बढ़ती आबादी के कारण पेयजल आपूर्ति पर भी दबाव रहता है। नई व्यवस्था शुरू होने के बाद सोन नदी को स्थायी जल स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नल-जल योजना को केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि पानी की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लोगों तक पहुंचने वाला पानी साफ और पीने योग्य हो, इसके लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
डेहरी स्थित एनीकट के पास निर्माणाधीन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में सोन नदी के पानी को कई स्तर पर शुद्ध किया जाएगा। इसके बाद पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से पानी शहरों और आसपास के इलाकों में पहुंचाया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2027 से पहले इस परियोजना से नियमित जलापूर्ति शुरू हो जाए। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने और तय समयसीमा के भीतर परियोजना पूरी करने के निर्देश भी दिए।
सासाराम और डेहरी क्षेत्र में पेयजल समस्या लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। गर्मी बढ़ने के साथ कई मोहल्लों में पानी का दबाव कम हो जाता है और लोगों को वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई इलाकों में भूजल पर अधिक निर्भरता के कारण भी समस्या गंभीर होती रही है।
ऐसे में सोन नदी से पानी लाने की योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नदी आधारित पेयजल व्यवस्था से भूजल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए विभिन्न जिलों में जलापूर्ति योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि नई परियोजनाओं में केवल पानी पहुंचाने पर ही ध्यान नहीं है, बल्कि शोधन, भंडारण और वितरण की पूरी व्यवस्था विकसित की जा रही है।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले पानी को शहर के अलग-अलग हिस्सों में बने जलाशयों और वितरण केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद नल कनेक्शन के जरिए घरों तक आपूर्ति की जाएगी।
परियोजना के तहत पाइपलाइन नेटवर्क तैयार करना भी महत्वपूर्ण काम है। जहां पुरानी पाइपलाइन मौजूद है, वहां उसकी क्षमता और स्थिति की जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर नई लाइन बिछाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। दूषित पानी से कई तरह की बीमारियों का खतरा रहता है, इसलिए पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच भी जरूरी है।
सोन नदी से जलापूर्ति शुरू होने के बाद पानी की उपलब्धता के साथ गुणवत्ता निगरानी की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों को नियमित नमूना जांच और प्लांट की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
औरंगाबाद शहर में भी पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। यहां भी सोन नदी के पानी को शुद्ध कर शहर तक पहुंचाने की योजना है।
दोनों शहरों में बढ़ती आबादी के कारण आने वाले वर्षों में पानी की मांग और बढ़ने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए परियोजना को दीर्घकालीन जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है।
सासाराम में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विकास योजनाओं और स्थानीय समस्याओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है और पेयजल इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और जहां किसी तरह की बाधा हो, उसे समय रहते दूर किया जाए।
डेहरी का एनीकट सोन नदी पर स्थित महत्वपूर्ण जल संरचना है। यहां से पानी उपलब्ध होने के कारण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जलापूर्ति परियोजना विकसित करने की संभावना बनी है।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार होने के बाद नदी का कच्चा पानी सीधे लोगों तक नहीं भेजा जाएगा। पहले उसे शुद्ध किया जाएगा और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाने के बाद ही वितरण नेटवर्क में छोड़ा जाएगा।
इस परियोजना से सासाराम और डेहरी के लोगों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही औरंगाबाद में भी जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी।
स्थानीय लोगों के लिए मार्च 2027 की समयसीमा महत्वपूर्ण है। यदि परियोजना निर्धारित समय पर पूरी होती है तो अगली गर्मियों से पहले ही नए जल स्रोत से आपूर्ति शुरू हो सकती है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने के साथ पाइपलाइन नेटवर्क और वितरण व्यवस्था को भी तैयार करना है। केवल ट्रीटमेंट प्लांट बन जाने से योजना पूरी नहीं होगी, बल्कि हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए पूरा नेटवर्क सक्रिय करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना का उद्देश्य केवल तात्कालिक समस्या का समाधान नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्थायी जलापूर्ति व्यवस्था तैयार करना है।
फिलहाल डेहरी स्थित एनीकट में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण जारी है। संबंधित विभाग परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है।
मार्च 2027 से पहले सोन नदी से सासाराम और औरंगाबाद को पेयजल आपूर्ति शुरू करने की घोषणा के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद बढ़ी है। यदि योजना समय पर पूरी होती है तो दोनों शहरों में लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या को काफी राहत मिल सकती है।





