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Salim डोला के खुलासे: 1991 से अपराध की शुरुआत और 1998 तस्करी का दावा

Maharashtra महाराष्ट्र: कथित ड्रग किंगपिन सलीम डोला ने अपने आपराधिक करियर को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं, जिनसे उसके लंबे समय से चले आ रहे नशीले पदार्थों के नेटवर्क और अंडरवर्ल्ड से जुड़े संबंधों पर नई रोशनी पड़ती है। सूत्रों का कहना है कि डोला ने स्वीकार किया है कि उसका अपराधी जीवन वर्ष 1991-92 के आसपास शुरू हुआ था, जब वह स्थानीय स्तर पर चरस की तस्करी से जुड़ा हुआ था। बाद में उसने सिंथेटिक नशीले पदार्थों के बड़े व्यापार में कदम रखा और धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से जुड़ता गया।
जांचकर्ताओं के सामने दिए गए अपने कथित बयान में सलीम डोला ने यह भी कहा कि शुरुआती दौर में वह एक छोटा तस्कर था, लेकिन समय के साथ उसने सिंथेटिक ड्रग्स के कारोबार में अपनी पकड़ मजबूत की। उसने कई पुराने मामलों की जानकारी भी साझा की है, जो मौजूदा जांच एजेंसी के डोजियर में पूरी तरह दर्ज नहीं थे। इन खुलासों को एजेंसियां अब गंभीरता से जांच रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, डोला ने वर्ष 1998 के एक बड़े ड्रग तस्करी मामले का भी उल्लेख किया है। उसने बताया कि जुलाई 1998 में मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) की आज़ाद मैदान यूनिट के अधिकारियों ने उसे मुंबई हवाई अड्डे पर रोका था। उस समय वह कथित रूप से 40 किलोग्राम मैन्ड्रेक्स गोलियों की तस्करी करने की कोशिश कर रहा था, जिसे वह विदेश भेजने की योजना में था।
डोला ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि उस समय उसने खुद को ड्रग व्यापार में एक छोटा खिलाड़ी बताया था, ताकि गंभीर कार्रवाई से बचा जा सके। हालांकि इस मामले में उसे गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में उसे न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद सलीम डोला को लगभग छह महीने तक मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा गया था। जेल में रहने के दौरान उसका संपर्क कई कुख्यात अपराधियों और अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों से हुआ, जिससे उसके नेटवर्क और अधिक फैलने की आशंका जताई जा रही है।
उसने अपने बयान में यह भी बताया कि उस समय आर्थर रोड जेल में 1993 मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के कई आरोपी भी बंद थे। इसके अलावा, जेल में डी-कंपनी और छोटा राजन गुट से जुड़े शूटर, गुर्गे और सहयोगी भी मौजूद थे। इन दोनों गुटों के बीच लंबे समय से चली आ रही हिंसक दुश्मनी का असर जेल के अंदर भी देखा जाता था, जिससे जेल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहता था।
जांचकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के माहौल में डोला जैसे अपराधियों को विभिन्न नेटवर्क और संगठित अपराध की कार्यप्रणाली को समझने और उनसे जुड़ने का मौका मिला होगा। इससे उसके अपराधी नेटवर्क के विस्तार की संभावना और मजबूत हो गई।
एजेंसियां अब डोला द्वारा दिए गए बयानों की पुष्टि करने में जुटी हैं और पुराने रिकॉर्ड, गिरफ्तारी दस्तावेज और जेल रिकॉर्ड को दोबारा खंगाला जा रहा है। साथ ही, उसके द्वारा बताए गए तस्करी नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इन नए खुलासों से कई पुराने ड्रग मामलों और संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क की कड़ियां जुड़ सकती हैं। हालांकि अभी तक किसी भी नए आरोप या निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर मुंबई के अंडरवर्ल्ड और ड्रग नेटवर्क के पुराने संबंधों को चर्चा में ला दिया है, जहां अपराध, तस्करी और संगठित गिरोहों के बीच लंबे समय से गहरे संबंधों की बात सामने आती रही है।





