महाराष्ट्र

रोहित पवार का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

Ratna Netam
27 Sept 2026 7:13 PM IST
रोहित पवार का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला
x
मुंबई । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब जनता के बजाय केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहा है।रोहित पवार ने कहा कि चुनाव आयोग देश की एक संवैधानिक संस्था है और इसके प्रमुखों की जिम्मेदारी निष्पक्ष तरीके से चुनावी प्रक्रिया को संचालित करना होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि पहले के चुनाव आयुक्तों ने हमेशा संविधान की भावना का सम्मान किया और संस्था की स्वतंत्रता को बनाए रखने का काम किया। रोहित पवार के अनुसार, चुनाव आयोग का दायित्व किसी सरकार या राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व करना नहीं, बल्कि देश के नागरिकों और संविधान के प्रति जवाबदेह रहना है।
रोहित पवार ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए कहा कि मौजूदा समय में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर लोगों के मन में सवाल पैदा हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार जनता का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं, बल्कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधि की तरह काम कर रहे हैं।उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। इसके प्रमुख सरकार के प्रतिनिधि नहीं होते, बल्कि वे भारत की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। पहले के चुनाव आयुक्तों ने सचमुच जनता और भारत के संविधान का प्रतिनिधित्व किया। लेकिन मौजूदा हालात में, ज्ञानेश कुमार जनता का प्रतिनिधित्व नहीं करते; अगर वे किसी का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो वह भारत सरकार है।"
रोहित पवार ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग की निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उन्हें स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत में चुनाव प्रक्रिया को मजबूत बनाने में चुनाव आयोग की अहम भूमिका रही है। जनता का भरोसा तभी कायम रह सकता है, जब चुनाव कराने वाली संस्था सभी पक्षों के प्रति समान व्यवहार करे और संविधान के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभाए।
रोहित पवार का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। अलग-अलग राजनीतिक दल समय-समय पर चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर अपनी राय रखते रहे हैं।एनसीपी (शरदचंद्र पवार) नेता ने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि ऐसी संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
उन्होंने पुराने चुनाव आयुक्तों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले संस्था के प्रमुखों ने संविधान के मूल सिद्धांतों को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार, चुनाव आयोग को हमेशा जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए।रोहित पवार ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के फैसले और उसकी कार्यप्रणाली देश की चुनावी व्यवस्था पर सीधा प्रभाव डालते हैं। इसलिए संस्था के हर कदम में पारदर्शिता और निष्पक्षता दिखाई देनी चाहिए।उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के बीच संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, उनके आरोपों पर चुनाव आयोग या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस बयान में सामने नहीं आई है।
चुनाव आयोग भारत में चुनावों के संचालन, मतदाता सूची तैयार करने और चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिम्मेदार संवैधानिक संस्था है। इसकी भूमिका को निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।राजनीतिक दल समय-समय पर चुनाव आयोग के फैसलों पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं। कुछ दल आयोग की कार्यप्रणाली की सराहना करते हैं, जबकि कुछ दल अलग-अलग मुद्दों को लेकर सवाल भी उठाते रहे हैं।रोहित पवार ने अपने बयान के जरिए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को किसी भी सरकार या राजनीतिक प्रभाव से अलग रहकर काम करना चाहिए।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपनी आपत्ति जताते हुए कहा कि चुनाव आयोग को जनता और संविधान के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में चुनावी संस्थाओं की भूमिका निष्पक्ष और स्वतंत्र होनी चाहिए।कुल मिलाकर एनसीपी (शरदचंद्र पवार) विधायक रोहित पवार ने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि संस्था की निष्पक्षता प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को सरकार के प्रतिनिधि के बजाय देश की जनता और संविधान के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। हालांकि, उनके आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Next Story