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महाराष्ट्र में ड्राइवरों का सड़क किनारे होगा ड्रग टेस्ट, स्वैब किट से मिनटों में होगी शुरुआती जांच

Kavita2
6 Oct 2026 10:32 AM IST
महाराष्ट्र में ड्राइवरों का सड़क किनारे होगा ड्रग टेस्ट, स्वैब किट से मिनटों में होगी शुरुआती जांच
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मुंबई। महाराष्ट्र में शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच के लिए होने वाले ब्रेथलाइज़र टेस्ट की तरह अब ड्रग्स के प्रभाव में गाड़ी चलाने वालों की भी सड़क किनारे जांच की तैयारी है। राज्य का परिवहन विभाग एक ऐसा सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसमें स्वैब-आधारित किट के जरिए कुछ ही मिनटों में शुरुआती ड्रग स्क्रीनिंग की जा सकेगी। प्रस्ताव को जल्द ही एक हाई-पावर कमेटी के सामने रखा जा सकता है।

मौजूदा व्यवस्था में अगर किसी ड्राइवर पर नशीले या साइकोट्रोपिक पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाने का संदेह होता है, तो मौके पर उसकी तत्काल पुष्टि करने के लिए शराब जांच जैसी सरल व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। अधिकारियों को संदिग्ध ड्राइवर को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजना पड़ता है। इसके बाद खून या दूसरे जैविक नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई जा सकती है। पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है, जिससे मौके पर तुरंत कार्रवाई करने में मुश्किल आती है।

इसी कमी को दूर करने के लिए महाराष्ट्र परिवहन विभाग सड़क किनारे ड्रग स्क्रीनिंग सिस्टम पर काम कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ड्राइवर के मुंह या लार से स्वैब लिया जाएगा। इसके बाद विशेष टेस्टिंग किट कुछ मिनटों में यह संकेत दे सकेगी कि व्यक्ति ने किसी संदिग्ध नशीले पदार्थ का सेवन किया है या नहीं। यह जांच शुरुआती स्क्रीनिंग होगी, अंतिम कानूनी पुष्टि नहीं। अगर शुरुआती जांच में परिणाम पॉजिटिव आता है तो संबंधित व्यक्ति को आगे मेडिकल और पुष्टि संबंधी परीक्षण से गुजरना होगा।

रिपोर्ट के अनुसार इस रोडसाइड ड्रग टेस्टिंग सिस्टम के लिए पहले तैयार किए गए प्रस्ताव की अनुमानित लागत जीएसटी समेत करीब 25.81 करोड़ रुपये थी। परिवहन विभाग अब इसे हाई-पावर कमेटी के सामने रखने की तैयारी में है। कमेटी से मंजूरी मिलने के बाद इसकी खरीद, प्रशिक्षण, टेस्टिंग प्रक्रिया और अलग-अलग क्षेत्रों में लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जा सकती है।

प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ऐसे ड्राइवरों की पहचान करना है, जो शराब के बजाय ड्रग्स या साइकोट्रोपिक पदार्थों के असर में वाहन चला रहे हों। ब्रेथलाइज़र मशीन शराब की मौजूदगी का संकेत दे सकती है, लेकिन नशीली दवाओं या अन्य पदार्थों के लिए अलग जांच की जरूरत होती है। सड़क किनारे शुरुआती टेस्ट उपलब्ध होने से यातायात पुलिस और परिवहन अधिकारियों को संदिग्ध मामलों में तुरंत निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

महाराष्ट्र सरकार ने इससे पहले राज्य परिवहन सेवाओं में भी नशे की जांच बढ़ाने की तैयारी शुरू की है। सितंबर में महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल यानी MSRTC ने “ड्रग-फ्री ST, सेफ ट्रैवल” अभियान के तहत ड्राइवरों और कंडक्टरों के लिए शराब तथा ड्रग स्क्रीनिंग की व्यापक व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की थी। इसमें ड्यूटी से पहले शराब की जांच, निर्धारित और अचानक ड्रग टेस्ट तथा उचित संदेह की स्थिति में अतिरिक्त स्क्रीनिंग शामिल है।

MSRTC के प्रस्तावित अभियान में ड्रग टेस्टिंग के लिए विशेष किट के पायलट इस्तेमाल की भी योजना है। प्रशिक्षित कर्मचारियों, प्रमाणित उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इस अभियान को 2026 से 2029 के दौरान चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बताई गई है।

राज्य परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी सितंबर में नशीले पदार्थों के सेवन की जांच बढ़ाने की घोषणा की थी। उस समय यह बताया गया था कि व्यवस्था केवल राज्य परिवहन बसों तक सीमित रखने के बजाय नगर निगम बसों, निजी वाहनों, ऐप आधारित कैब, स्कूल वाहनों और दूसरे परिवहन साधनों तक विस्तार करने पर विचार किया जा रहा है। उच्च जोखिम वाली श्रेणियों के लिए अलग मानक संचालन प्रक्रिया बनाने की भी योजना है।

रोडसाइड ड्रग टेस्टिंग सिस्टम लागू होने पर सबसे महत्वपूर्ण पहलू टेस्ट की विश्वसनीयता और कानूनी प्रक्रिया होगी। शुरुआती स्वैब टेस्ट केवल किसी पदार्थ की संभावित मौजूदगी का संकेत देगा। अंतिम कार्रवाई के लिए मेडिकल पुष्टि और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया की जरूरत होगी। इससे गलत पॉजिटिव परिणाम की स्थिति में ड्राइवर के अधिकारों की रक्षा भी की जा सकेगी।

ऐसे सिस्टम के लिए अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देना भी जरूरी होगा। उन्हें यह समझना होगा कि किन परिस्थितियों में किसी वाहन चालक की जांच की जाए, स्वैब नमूना कैसे लिया जाए और शुरुआती पॉजिटिव परिणाम आने पर आगे की कार्रवाई किस तरीके से की जाए। इसके साथ टेस्टिंग उपकरणों के रखरखाव और जांच रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी करनी होगी।

महाराष्ट्र परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार राज्य में सड़क परिवहन सेवाओं, मोटर वाहनों और सार्वजनिक परिवहन से संबंधित नियमों की जिम्मेदारी विभाग के दायरे में आती है। वर्तमान में राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक हैं।

ड्रग्स के प्रभाव में वाहन चलाना सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाता है क्योंकि कई नशीले पदार्थ प्रतिक्रिया क्षमता, एकाग्रता, निर्णय लेने की शक्ति और वाहन पर नियंत्रण को प्रभावित कर सकते हैं। सड़क किनारे तुरंत स्क्रीनिंग की सुविधा होने से संदिग्ध मामलों में देरी कम हो सकती है और ऐसे ड्राइवरों को आगे वाहन चलाने से रोका जा सकता है।

हालांकि प्रस्ताव अभी मंजूरी की प्रक्रिया में है। इसलिए यह साफ नहीं है कि यह व्यवस्था कब से शुरू होगी, किन जिलों या शहरों में पहले लागू होगी और शुरुआत में कितनी टेस्टिंग किट खरीदी जाएंगी। हाई-पावर कमेटी की मंजूरी के बाद ही इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

अगर योजना लागू होती है तो महाराष्ट्र उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां सड़क सुरक्षा के लिए शराब के साथ ड्रग्स के प्रभाव में वाहन चलाने वालों की भी मौके पर शुरुआती जांच की जाएगी। फिलहाल परिवहन विभाग प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में जुटा है और अगला अहम कदम हाई-पावर कमेटी से मिलने वाली मंजूरी होगी।

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