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महाराष्ट्र में नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण बनेगा, प्रदूषण नियंत्रण पर रहेगा फोकस: पंकजा मुंडे
SHIDDHANT
10 April 2026 11:19 PM IST

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Pune पुणे। महाराष्ट्र की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य सरकार नदी पुनर्जीवन के लिए एक विशेष प्राधिकरण के गठन के अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि अब नदी सौंदर्यीकरण के बजाय पूर्ण प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि यह प्राधिकरण जल प्रदूषण पर नियंत्रण और पर्यावरण नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए काम करेगा।
मंत्री मुंडे ने कहा कि स्थानीय निकायों, निजी संस्थानों और उद्योगों द्वारा बिना उपचारित सीवेज सीधे नदियों में छोड़ा जाना गंभीर समस्या है। कई उद्योगों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तो लगे हैं, लेकिन खराब रखरखाव के कारण वे काम नहीं कर रहे। उन्होंने चेतावनी दी, “अब केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर सख्त और सीधी कार्रवाई की जाएगी।”
मंत्री ने निर्देश दिए कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम नदी किनारों पर किए गए अतिक्रमण को तुरंत हटाएं। साथ ही, हर हाउसिंग सोसाइटी में अपना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अनिवार्य किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि हर नाले को एसटीपी से जोड़ा जाए, ताकि नदियों में केवल शुद्ध पानी ही पहुंचे।
बैठक में खराब होती वायु गुणवत्ता पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि निर्माण स्थलों पर उचित कवरिंग न होने से धूल प्रदूषण बढ़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे स्थलों पर तुरंत नोटिस जारी कर वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू करने के निर्देश दिए। इस दौरान इंद्रायणी, पवना और मुला-मुठा नदियों के पुनर्जीवन को लेकर तकनीकी प्रस्तुतियां भी दी गईं।
बैठक के बाद मंत्री ने तलावडे (इंद्रायणी नदी) और रावेत (पवना नदी) स्थित रॉ वॉटर पंपिंग स्टेशनों का निरीक्षण किया। इंद्रायणी नदी में जहरीला झाग, सीवेज और जलकुंभी देखकर उन्होंने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “इंद्रायणी नदी की पवित्रता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।” अधिकारियों को जलकुंभी हटाने और औद्योगिक अपशिष्ट का प्रवाह रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि सरकार कड़े कदम उठा रही है, लेकिन स्वच्छ और अविरल नदियां तभी संभव हैं जब नागरिक सहयोग करें और उद्योग नियमों का सख्ती से पालन करें।
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