महाराष्ट्र

फर्जी शलार्थ ID मामले में रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी गिरफ्तार

Kavita2
25 July 2026 5:41 PM IST
फर्जी शलार्थ ID मामले में रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी गिरफ्तार
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नासिक: महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में नासिक रोड पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जलगांव के रिटायर्ड सेकेंडरी एजुकेशन ऑफिसर शशिकांत हिंगोनेकर को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि हिंगोनेकर ने फर्जी ‘शलार्थ’ (Shalarth) ID ऑर्डर तैयार कर सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग किया और सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया।

शुक्रवार शाम को उनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया। यह मामला राज्य में सामने आए बड़े शिक्षा घोटालों में से एक बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, फर्जी शलार्थ ID के जरिए सरकारी खजाने को करीब ₹160 करोड़ का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

फर्जी शलार्थ ID से जुड़ा है मामला

जानकारी के अनुसार, शलार्थ महाराष्ट्र शिक्षा विभाग का एक ऑनलाइन सिस्टम है, जिसमें शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों से जुड़ी सेवा संबंधी जानकारी दर्ज की जाती है। इसी सिस्टम के माध्यम से कर्मचारियों के वेतन और अन्य वित्तीय लाभों की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इसी सिस्टम का गलत इस्तेमाल करते हुए फर्जी शलार्थ ID ऑर्डर तैयार किए। इन फर्जी आदेशों के आधार पर कई लोगों का डेटा सिस्टम में अपलोड किया गया और उन्हें वेतन व अन्य आर्थिक लाभ मिलने लगे।

पुलिस का कहना है कि यह पूरा मामला योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया और इसमें कई स्तरों पर अनियमितताएं सामने आई हैं।

चार जिलों में जारी किए गए फर्जी आदेश

नासिक रोड पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले के अनुसार, नासिक डिवीजन के चार जिलों—नासिक, धुले, जलगांव और नंदुरबार—में बड़ी संख्या में फर्जी शलार्थ ID ऑर्डर जारी किए गए।

जांच के मुताबिक, करीब 587 शिक्षकों और नॉन-टीचिंग स्टाफ के लिए बिना किसी व्यक्तिगत मंजूरी और आधिकारिक प्रस्ताव के फर्जी आदेश तैयार किए गए। इन आदेशों के आधार पर संबंधित कर्मचारियों की जानकारी शलार्थ सिस्टम में दर्ज कर दी गई।

इसके बाद संबंधित लोगों को सरकारी नियमों के तहत मिलने वाले वेतन और अन्य वित्तीय सुविधाएं मिलनी शुरू हो गईं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे और किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।

रिटायर्ड अधिकारी पर गंभीर आरोप

पुलिस ने शशिकांत हिंगोनेकर को धुले से गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद और अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए फर्जी शलार्थ ID ऑर्डर तैयार करने में भूमिका निभाई।

हालांकि, पुलिस जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप

रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद शिक्षा विभाग में चिंता का माहौल है। इतने बड़े स्तर पर फर्जी ID तैयार किए जाने के मामले ने विभागीय व्यवस्था और निगरानी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा रिकॉर्ड और वेतन प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल सिस्टम में पारदर्शिता और कड़ी निगरानी बेहद जरूरी है। इस तरह की घटनाएं सरकारी तंत्र में सुधार की आवश्यकता को उजागर करती हैं।

पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच

नासिक रोड पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी आदेश कैसे तैयार किए गए, उन्हें मंजूरी किस स्तर पर मिली और किन-किन लोगों को इसका लाभ पहुंचा।

जांच के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित विभागीय प्रक्रियाओं की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला

पुलिस के अनुसार, फर्जी शलार्थ ID के जरिए सरकार को लगभग ₹160 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है। इतनी बड़ी राशि से जुड़े मामले ने प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है।

सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए अब विभागीय स्तर पर भी जांच और समीक्षा की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को कैसे रोका जा सके।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल शशिकांत हिंगोनेकर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ रही है। मामले में जुड़े दस्तावेजों और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन की नजर अब इस बात पर है कि इस कथित फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।

फर्जी शलार्थ ID मामला सरकारी डिजिटल व्यवस्था की सुरक्षा और निगरानी को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब पुलिस की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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