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राज ठाकरे का चुनाव आयोग पर हमला, SIR रद्द करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने रविवार को मुंबई में आयोजित ‘गर्जना मोर्चा’ के दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने मौजूदा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को रद्द करने और भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग रखी। राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे लंबे समय बाद एक साझा राजनीतिक मंच पर नजर आए और दोनों ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया।
राज ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि SIR की मौजूदा प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए। उनकी दूसरी प्रमुख मांग रही कि देश में भविष्य के चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय पेपर बैलेट से कराए जाएं। उन्होंने कहा कि इन दोनों मांगों को लेकर विपक्षी दलों को आगे की लड़ाई एक साथ लड़नी चाहिए।
महाराष्ट्रात आजपर्यंत जी SIR प्रक्रिया झाली ती संपूर्णपणे रद्द झाली पाहिजे. यापुढील सर्व निवडणुकांमध्ये EVM मशीनच्या ऐवजी बॅलेटपेपरवर मतदान झालं पाहिजे ही आजच्या या मोर्चामधून मी मागणी करत आहे. #RajThackeray
— Manse Speaks (@ManseSpeaks) October 4, 2026
मुंबई में हुए इस प्रदर्शन का मुख्य केंद्र चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े सवाल रहे। राज ठाकरे के साथ उद्धव ठाकरे और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। रिपोर्टों के अनुसार मार्च में कांग्रेस और शरद पवार गुट के नेताओं की भी मौजूदगी रही।
SIR को लेकर राज ठाकरे का दावा
राज ठाकरे ने SIR की वैधता पर सवाल उठाते हुए पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह की कानूनी राय का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि SIR जैसी व्यापक प्रक्रिया केवल असाधारण परिस्थितियों में और निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत ही की जा सकती है। उनके मुताबिक, देशभर में एक साथ SIR लागू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा, बाढ़, भूकंप या बड़े पैमाने पर विस्थापन जैसी परिस्थितियों में विशेष पुनरीक्षण किया जा सकता है, लेकिन इसे व्यापक रूप से लागू करने के लिए स्पष्ट कानूनी आधार और कारण जरूरी हैं। राज ठाकरे ने इसी आधार पर मौजूदा SIR प्रक्रिया को चुनौती दी। ये उनके राजनीतिक दावे हैं; इनकी स्वतंत्र कानूनी पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
महाराष्ट्र में SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं चुनाव अधिकारियों की ओर से मतदाता सूची के सत्यापन और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया भी जारी है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR 2026 से संबंधित प्रारूप मतदाता सूची, दावे-आपत्तियां और हेल्पलाइन की जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
बैलेट पेपर की वापसी की मांग
राज ठाकरे ने EVM के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया और कहा कि चुनाव प्रक्रिया में फिर से बैलेट पेपर को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगे जब यह मुद्दा दिल्ली में उठाया जाएगा, तब SIR को रद्द करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की दोनों मांगों को प्रमुखता से रखा जाना चाहिए।
बैलेट पेपर की मांग महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। हाल के महीनों में विपक्षी दलों के कुछ नेता EVM और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग से सवाल करते रहे हैं। हालांकि भारत में मौजूदा चुनावी व्यवस्था में EVM का उपयोग जारी है और बैलेट पेपर की वापसी के लिए निर्वाचन प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की आवश्यकता होगी।
उद्धव-राज फिर एक मंच पर
मुंबई के इस मोर्चे की एक बड़ी राजनीतिक विशेषता राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का एक साथ मंच साझा करना रहा। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। यह दोनों के बीच लंबे समय बाद सार्वजनिक राजनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण दृश्य रहा। मार्च में पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगे के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।
इस संयुक्त कार्यक्रम को चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर व्यापक राजनीतिक एकजुटता के प्रयास के रूप में देखा गया। हालांकि इसे औपचारिक गठबंधन की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता। फिलहाल यह सहयोग मुख्य रूप से SIR और चुनाव आयोग से जुड़े विरोध तक सीमित दिखाई देता है।
चुनाव आयोग पर पारदर्शिता को लेकर सवाल
राज ठाकरे और अन्य प्रदर्शनकारी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और SIR की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है। इन आरोपों की चुनाव आयोग की ओर से अपनी प्रक्रिया और रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जानी होगी।
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR 2026 के लिए मतदाता सूची खोजने और दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रक्रिया के दौरान नागरिकों को अपने रिकॉर्ड की जांच और आपत्ति दर्ज करने का औपचारिक अवसर दिया गया है।
मोर्चे में कई विपक्षी नेता शामिल
‘गर्जना मोर्चा’ में ठाकरे परिवार के दोनों नेताओं के अलावा कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट से जुड़े नेताओं की भागीदारी भी सामने आई। प्रदर्शन को किसी एक पार्टी की रैली के बजाय चुनाव प्रक्रिया को लेकर व्यापक विरोध के रूप में पेश करने की कोशिश की गई।
मार्च को लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था के संबंध में तैयारियां भी की गई थीं। पुलिस के अनुरोध के बाद मार्च के मार्ग में बदलाव किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
मुंबई से दिल्ली तक मुद्दा ले जाने की तैयारी
राज ठाकरे ने संकेत दिया कि SIR और बैलेट पेपर का मुद्दा आगे राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया जाएगा। उनका कहना है कि इन दोनों मांगों को लेकर दिल्ली में भी आवाज उठाई जाएगी। इससे यह साफ है कि MNS प्रमुख इस मुद्दे को महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रखना चाहते।
उनके अनुसार, चुनाव व्यवस्था में जनता का विश्वास और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण हैं। SIR को लेकर उनकी आपत्ति का केंद्र मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया है, जबकि बैलेट पेपर की मांग चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक से जुड़ी है।
महाराष्ट्र में SIR को लेकर जारी बहस
महाराष्ट्र में SIR को लेकर राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ा जब अलग-अलग दलों ने मतदाता सूची में संभावित बदलावों पर सवाल उठाने शुरू किए। विपक्षी दलों का कहना है कि बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चुनावी अधिकारियों की प्रक्रिया में दावे और आपत्तियों की व्यवस्था शामिल है।
इस बहस में सबसे अहम मुद्दा यही है कि मतदाता सूची में बदलाव किन कारणों से हुए और नागरिकों को अपने नाम तथा विवरण की जांच और सुधार का कितना अवसर मिल रहा है। आधिकारिक रिकॉर्ड और प्रक्रिया के आंकड़े इस विवाद को समझने में महत्वपूर्ण होंगे।
SIR प्रक्रिया पर आगे क्या?
राज ठाकरे की मांग के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि चुनाव आयोग और महाराष्ट्र के निर्वाचन अधिकारी इन राजनीतिक आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल SIR 2026 से जुड़ी प्रक्रिया राज्य में चल रही है और मतदाताओं को सूची से अपने नाम की जांच करने तथा दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यदि SIR को लेकर कोई कानूनी चुनौती सामने आती है तो इसकी वैधता का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होगा। इसी तरह बैलेट पेपर पर वापसी का सवाल भी व्यापक चुनावी और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा विषय है।
राज ठाकरे के भाषण में राजनीतिक संदेश के साथ चुनाव प्रणाली से जुड़े दो स्पष्ट मुद्दे केंद्र में रहे। पहला, मौजूदा SIR प्रक्रिया को खत्म करना और दूसरा, भविष्य के चुनावों में बैलेट पेपर की वापसी। उन्होंने इन मांगों को आगे भी उठाने की बात कही।
कुल मिलाकर, मुंबई के ‘गर्जना मोर्चा’ में राज ठाकरे ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा और प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। उन्होंने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह की बताई गई कानूनी राय का हवाला देते हुए SIR की व्यापकता पर सवाल उठाए, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनकी दूसरी प्रमुख मांग भविष्य के चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान कराने की रही। प्रदर्शन में उद्धव ठाकरे समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। अब आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग SIR को लेकर उठाए गए सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और यह राजनीतिक मुद्दा आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ता है।





