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UPI पर MDR को लेकर राज ठाकरे का केंद्र पर हमला, बोले- देश को ‘डिजिटल जाल’ में फंसाया

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने का विरोध किया है। शनिवार को सोशल मीडिया पर जारी बयान में उन्होंने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए इसे व्यापारियों और आम लोगों के लिए एक तरह का “डिजिटल जाल” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले लोगों को डिजिटल भुगतान की आदत डाली गई और अब उसी व्यवस्था में शुल्क जोड़ा जा रहा है।
नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। इसके तहत व्यक्ति से व्यापारी यानी P2M के चुनिंदा UPI लेनदेन में 2,000 रुपये से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि, प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। सरकार के मुताबिक व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे और छोटे व्यापारियों सहित लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
राज ठाकरे ने अपने बयान में नोटबंदी और उसके बाद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिए जाने का उल्लेख किया। उनका आरोप है कि सरकार ने पहले डिजिटल लेनदेन को सुविधाजनक और मुफ्त विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया, जिससे बड़ी संख्या में लोग और कारोबारी UPI पर निर्भर हो गए। अब जब यह व्यवस्था दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है, तब शुल्क लगाने की शुरुआत की जा रही है। यह राज ठाकरे का राजनीतिक आरोप है; सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य UPI प्रणाली के संचालन और दीर्घकालिक विस्तार को टिकाऊ बनाना है।
MNS प्रमुख ने सवाल किया कि यदि डिजिटल भुगतान व्यवस्था शुरू करते समय ही यह स्पष्ट था कि इसके संचालन, रखरखाव और साइबर सुरक्षा पर लगातार खर्च होगा, तो उसके लिए पहले से स्थायी वित्तीय व्यवस्था क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को डिजिटल भुगतान प्रणाली के रखरखाव और सुरक्षा के लिए बजटीय प्रावधान करना चाहिए था, ताकि बाद में व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत डालने की जरूरत न पड़े।
राज ठाकरे ने इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि MDR का सीधा बोझ ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि यदि किसी दुकानदार या कारोबारी को प्रत्येक पात्र डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत उठानी पड़ेगी तो यह आशंका बनी रहेगी कि वह किसी न किसी तरीके से उस खर्च को वस्तुओं या सेवाओं की कीमत में समायोजित कर सकता है। उन्होंने पूछा कि ऐसी स्थिति रोकने के लिए प्रभावी निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स या सरकार अथवा NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। इससे मिलने वाली राशि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, पेमेंट एप और अन्य प्रतिभागियों के बीच वितरित होगी, ताकि UPI इकोसिस्टम का संचालन और विस्तार जारी रखा जा सके। सरकार के अनुसार छोटे व्यापारियों और आम उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त शुल्क से बचाने के प्रावधान भी नई व्यवस्था में शामिल किए गए हैं।
नई व्यवस्था में कुछ आवश्यक क्षेत्रों के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं। रेलवे, ईंधन और दूरसंचार जैसे कुछ क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र भुगतान पर फ्लैट MDR व्यवस्था रखी गई है। वहीं QR कोड के माध्यम से प्रति माह एक लाख रुपये तक UPI भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को सामान्य MDR से छूट दी गई है। 75,000 रुपये और उससे अधिक के सामान्य पात्र लेनदेन में भी MDR अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
राज ठाकरे ने सरकार की पुरानी नीति का भी जिक्र किया, जिसमें UPI को शुल्क मुक्त रखने पर जोर दिया गया था। उन्होंने नीति में आए बदलाव को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए और कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर परिस्थितियों में ऐसा क्या परिवर्तन हुआ कि अब चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर MDR की जरूरत महसूस हुई।
MNS ने औपचारिक रूप से इस व्यवस्था का विरोध किया है। राज ठाकरे ने महाराष्ट्र समेत देशभर के व्यापारियों और कारोबारी संगठनों से नए MDR का विरोध करने की अपील भी की। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के बाद व्यापारियों पर नई लागत डालने से डिजिटल लेनदेन को लेकर लोगों के व्यवहार पर असर पड़ सकता है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक विरोध के साथ कारोबारी वर्ग के कुछ हिस्सों में भी चिंता सामने आई है। वहीं सरकार का पक्ष है कि अधिकांश UPI लेनदेन मुफ्त बने रहेंगे और नई व्यवस्था सीमित श्रेणी के बड़े मर्चेंट भुगतान पर ही लागू होगी। ऐसे में 15 अक्टूबर से लागू होने वाला नया MDR ढांचा अब डिजिटल भुगतान की लागत और UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता को लेकर नई बहस का केंद्र बन गया है।





