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पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में अवैध शराब की तस्करी और बिक्री के खिलाफ राज्य आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की 'डी' डिवीजन की टीम ने माणिकबाग, पार्वती दर्शन और स्वारगेट सहित विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर गोवा में निर्मित विदेशी शराब और उसके परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहन जब्त किए हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार, जब्त शराब और वाहनों की कुल कीमत लगभग 69 लाख 26 हजार रुपये आंकी गई है। गोवा में बिक्री के लिए निर्धारित शराब को कथित तौर पर अवैध तरीके से महाराष्ट्र लाने और बेचने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, आबकारी विभाग को 30 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि गोवा में बनी विदेशी शराब की खेप अवैध रूप से पुणे लाई जा रही है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने सूचना की पड़ताल शुरू की और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई। सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने शहर के अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की योजना बनाई।
आबकारी विभाग की टीम ने सबसे पहले माणिकबाग इलाके में होटल ब्रह्मा के सामने संदिग्ध गतिविधियों की जांच की। इसके अलावा पार्वती दर्शन क्षेत्र में भी छापेमारी की गई। कार्रवाई का दायरा स्वारगेट इलाके तक बढ़ाया गया। इन स्थानों से गोवा निर्मित विदेशी शराब और उससे संबंधित वाहन जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
विभाग के अनुसार, बरामद शराब गोवा में बिक्री के लिए निर्धारित थी। आरोप है कि संबंधित लोग इसे बिना आवश्यक अनुमति के महाराष्ट्र लाकर बेच रहे थे। राज्य में शराब की बिक्री और परिवहन के लिए निर्धारित लाइसेंस, शुल्क और अन्य नियमों का पालन करना आवश्यक है। दूसरे राज्य में बिक्री के लिए निर्धारित शराब को बिना वैध अनुमति महाराष्ट्र में लाना और बेचना आबकारी नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई के दौरान चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इन व्यक्तियों पर अवैध शराब के परिवहन और बिक्री में शामिल होने का आरोप है। फिलहाल मामले में आरोपियों की भूमिका, शराब की आपूर्ति के स्रोत और संभावित खरीदारों की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
जब्त सामग्री की कुल कीमत 69.26 लाख रुपये बताई गई है। इसमें शराब के साथ-साथ कार्रवाई के दौरान कब्जे में लिए गए वाहन भी शामिल हैं। हालांकि, शराब की अलग कीमत, उसकी कुल मात्रा और वाहनों की संख्या का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
आबकारी विभाग की इस कार्रवाई को अवैध शराब की आपूर्ति रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुणे जैसे बड़े शहर में होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के कारण शराब की मांग बनी रहती है। ऐसे में अवैध आपूर्ति करने वाले लोग दूसरे राज्यों से शराब लाकर स्थानीय बाजार में बेचने का प्रयास कर सकते हैं।
गोवा और महाराष्ट्र में शराब की कीमतों तथा कर व्यवस्था में अंतर होने के कारण अवैध परिवहन की आशंका बनी रहती है। हालांकि, शराब का गोवा में निर्मित होना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। नियमों का उल्लंघन तब होता है, जब शराब को निर्धारित अनुमति, शुल्क या परिवहन दस्तावेजों के बिना किसी अन्य राज्य में बिक्री के उद्देश्य से लाया जाता है।
इस तरह की अवैध गतिविधियों से सरकार को आबकारी राजस्व का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा बिना अधिकृत आपूर्ति व्यवस्था के बाजार में पहुंचने वाली शराब की वैधता और उसके भंडारण पर निगरानी रखना कठिन हो जाता है।
राज्य आबकारी विभाग का प्रमुख कार्य शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित कराना है। विभाग लाइसेंस जारी करने, शुल्क संग्रह करने और अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जिम्मेदार है। इसी व्यवस्था के तहत संदिग्ध शराब की खेप और उससे जुड़े परिवहन साधनों की जांच की जाती है।
अधिकारियों के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि जब्त शराब किस स्थान से पुणे पहुंचाई गई थी। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि शराब की आपूर्ति किसी बड़े नेटवर्क के माध्यम से की जा रही थी या गिरफ्तार आरोपी सीमित स्तर पर इसका कारोबार कर रहे थे।
आबकारी विभाग गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की जांच कर सकता है। शराब की खरीद, परिवहन और बिक्री से संबंधित दस्तावेज भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई संभव है।
त्योहारों के समय विभिन्न शहरों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। ऐसे अवसरों पर अवैध शराब की तस्करी और बिक्री रोकने के लिए आबकारी विभाग की निगरानी का महत्व भी बढ़ जाता है। हाल के महीनों में पुणे और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब के खिलाफ अन्य अभियान भी चलाए गए हैं।
इस मामले में विभागीय टीम की कार्रवाई ने एक बार फिर दूसरे राज्यों से शराब लाकर बिना अनुमति बेचने की समस्या को सामने रखा है। जांच में यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि जब्त वाहनों का इस्तेमाल किस प्रकार किया जा रहा था और शराब को किन स्थानों तक पहुंचाने की योजना थी।
फिलहाल चार लोगों की गिरफ्तारी और 69.26 लाख रुपये की शराब व वाहनों की जब्ती को बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। आबकारी विभाग की आगे की जांच से अवैध आपूर्ति के पूरे घटनाक्रम और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।





