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महाराष्ट्र में कम बारिश से रबी पर संकट, कृषि मंत्री भरणे ने केंद्र से मांगी विशेष मदद

मुंबई। महाराष्ट्र में कम और असमान बारिश के कारण किसानों की बढ़ती मुश्किलों के बीच राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने केंद्र सरकार से विशेष उपायों की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात का असर खरीफ के साथ आने वाले रबी सीजन पर भी पड़ सकता है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त आर्थिक मदद, सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने और प्रभावित क्षेत्रों का जल्द जमीनी सर्वे कराने का अनुरोध किया है।
भरणे ने नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026’ में महाराष्ट्र की स्थिति रखी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से राज्य के सूखा और कम बारिश से प्रभावित इलाकों का जल्द दौरा करने का आग्रह किया। भरणे ने कहा कि केंद्र की टीम किसानों से सीधे बातचीत करे और खेतों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करे।
महाराष्ट्र में इस मानसून के दौरान बारिश का वितरण काफी असमान रहा है। राज्य के कई हिस्सों, खासकर मराठवाड़ा और विदर्भ में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में कुल बारिश सामान्य से करीब 18 प्रतिशत कम रही, जबकि कुछ क्षेत्रों में कमी इससे भी ज्यादा दर्ज की गई। राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में तहसीलों में सूखे जैसे हालात को देखते हुए राहत उपाय शुरू किए हैं।
कृषि मंत्री ने केंद्र से कृषि यंत्रीकरण और सूक्ष्म सिंचाई के लिए 500-500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता की मांग भी रखी है। यानी इन दोनों क्षेत्रों के लिए कुल 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद मांगी गई है। राज्य का तर्क है कि कम बारिश की स्थिति में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था किसानों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इससे सीमित पानी का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है।
भरणे ने रबी सीजन के लिए किसानों को पर्याप्त बीज उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने केंद्र से रबी ज्वार के करीब 10 लाख बीज किट उपलब्ध कराने की मांग की है। कम मिट्टी की नमी और सिंचाई की सीमित उपलब्धता को देखते हुए राज्य सरकार ऐसी फसलों पर ज्यादा ध्यान देना चाहती है, जिन्हें अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है।
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राज्यों से रबी फसल योजना तैयार करते समय उपलब्ध पानी और मिट्टी की नमी का वैज्ञानिक आकलन करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कम पानी वाले क्षेत्रों में ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों की जगह दलहन और तिलहन जैसी अपेक्षाकृत कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। केंद्र ने राज्यों से जिला स्तर पर ‘वॉटर बजट’ तैयार करने पर भी जोर दिया है।
महाराष्ट्र की स्थिति को लेकर केंद्र ने भी चिंता जताई है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे जैसे हालात का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम भेजने की बात कही है। केंद्र की टीम प्रभावित क्षेत्रों में जाकर फसल, पानी और मिट्टी की स्थिति की समीक्षा करेगी। शिवराज सिंह चौहान ने खुद भी दोनों राज्यों का दौरा करने की योजना जताई है।
महाराष्ट्र के कई इलाकों में कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों पर दिखाई देने लगा है। विशेषकर सोयाबीन, अरहर और अन्य फसलों की उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका है। मराठवाड़ा में बारिश की कमी करीब 38 प्रतिशत और विदर्भ में करीब 27 प्रतिशत बताई गई है। कुछ जिलों में सामान्य बारिश का लगभग आधा ही पानी मिला है। इससे मिट्टी में नमी कम हुई है और जलस्रोतों पर भी दबाव बढ़ा है।
रबी सीजन के लिए यही स्थिति सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। गेहूं, चना, ज्वार और अन्य रबी फसलों की बुआई के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी और सिंचाई की उपलब्धता जरूरी होती है। यदि आने वाले हफ्तों में जल उपलब्धता नहीं सुधरती है तो किसानों को फसल चयन बदलना पड़ सकता है। केंद्र ने भी राज्यों को सलाह दी है कि ऐसी स्थिति में पहले से वैकल्पिक फसल योजना तैयार रखी जाए।
कृषि मंत्री भरणे ने फसल नुकसान के आकलन की मौजूदा प्रणाली को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने सैटेलाइट आधारित आकलन के साथ खेत स्तर पर वास्तविक स्थिति को भी ध्यान में रखने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि किसानों को समय पर सहायता तभी मिल सकती है, जब नुकसान का सही और तेजी से आकलन किया जाए।
राज्य सरकार ने अपने स्तर पर भी सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए कदम बढ़ाए हैं। महाराष्ट्र में एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की गई है, जिसे पानी, चारा, फसल नुकसान और राहत से जुड़े मामलों पर त्वरित निर्णय लेने की जिम्मेदारी दी गई है। यह समिति प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात की समीक्षा करेगी और सरकार को नियमित रिपोर्ट देगी।
भरणे ने हाल में प्रभावित इलाकों का दौरा कर अधिकारियों को फसल नुकसान का आकलन तेज करने के निर्देश भी दिए थे। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार संकट की स्थिति में उन्हें सहायता देने के लिए कदम उठाएगी।
अब महाराष्ट्र सरकार की नजर केंद्र से मिलने वाली सहायता और प्रस्तावित केंद्रीय दौरे पर है। राज्य को उम्मीद है कि जमीनी आकलन के बाद सूखा प्रभावित किसानों के लिए अतिरिक्त राहत, सिंचाई और रबी तैयारी से जुड़े विशेष उपायों पर निर्णय लिया जाएगा।
महाराष्ट्र में कम बारिश और घटती मिट्टी की नमी ने रबी सीजन की चुनौती बढ़ा दी है। ऐसे में राज्य सरकार का जोर तत्काल राहत के साथ दीर्घकालिक सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने पर भी है। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने केंद्र से कहा है कि किसानों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए खेतों तक पहुंचना जरूरी है और समय रहते मदद मिलने से आने वाले रबी सीजन में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।





