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महाराष्ट्र
सीजेपी की कोर कमेटी पर उठे सवाल, कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन धरने की दी चेतावनी
Ratna Netam
6 Aug 2026 6:00 PM IST

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छत्रपति संभाजीनगर : कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की कोर कमेटी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं और जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से जुड़े युवाओं ने पार्टी नेतृत्व पर परिवारवाद, पक्षपात और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलन में सक्रिय रहे सैकड़ों युवाओं को नजरअंदाज कर केवल चुनिंदा लोगों को कोर कमेटी में जगह दी गई है। इस फैसले के विरोध में कार्यकर्ताओं ने अभिजीत दिपके के घर के बाहर धरना शुरू कर दिया है और मांगें पूरी नहीं होने तक अनशन जारी रखने की चेतावनी दी है।**
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया। पार्टी की कोर कमेटी के गठन को लेकर बड़ी संख्या में युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी अभिजीत दिपके के आवास के बाहर पहुंचे और आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करने के बजाय परिवारवाद और पक्षपात को बढ़ावा दिया है। उनका कहना है कि जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से जुड़े अधिकांश सक्रिय कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर केवल करीबी लोगों को निर्णय लेने वाली टीम में शामिल किया गया।
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का दावा है कि वे जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन की शुरुआत से ही जुड़े रहे और उन्होंने आंदोलन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार आंदोलन में देशभर से लगभग 450 कोऑर्डिनेटर सक्रिय थे, लेकिन हाल ही में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में इनमें से अधिकांश को आमंत्रित तक नहीं किया गया। इससे कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष है और वे इसे आंदोलन की मूल भावना के विपरीत बता रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका से देर रात तक बैठक और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती रही, लेकिन उन्होंने किसी भी सवाल का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि लगातार संवाद के बावजूद उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके कारण उन्हें सार्वजनिक रूप से विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा।
सीजेपी कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आंदोलन का उद्देश्य हमेशा लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना रहा है। यदि पार्टी के भीतर ही फैसले पारदर्शी तरीके से नहीं लिए जाएंगे तो आंदोलन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि यदि कुछ चुनिंदा लोग ही सभी निर्णय लेंगे और बाकी कार्यकर्ताओं को प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा तो यह आंदोलन पूरे देश का आंदोलन नहीं कहलाएगा।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उन्हें यह कदम उठाने का दुख है, लेकिन जब तक आवाज नहीं उठाई जाती तब तक किसी की बात नहीं सुनी जाती। उन्होंने घोषणा की कि वे और उनके साथी अन्न-जल त्याग कर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे। उनका कहना है कि जब तक सभी राज्यों के प्रतिनिधियों और आंदोलन से जुड़े वास्तविक कार्यकर्ताओं को संगठन में समान प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि बैठकों में केवल परिवार के सदस्यों, मित्रों और करीबी लोगों को शामिल किया जा रहा है, जबकि आंदोलन के लिए लगातार काम करने वाले कार्यकर्ताओं को बाहर रखा जा रहा है। उनके अनुसार किसी भी लोकतांत्रिक संगठन में इस प्रकार की कार्यशैली स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत ही भाई-भतीजावाद और पक्षपात के खिलाफ हुई थी, इसलिए संगठन के भीतर भी इन प्रवृत्तियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि हाल ही में राहुल गांधी ने आंदोलन से जुड़े कुछ प्रमुख चेहरों से मुलाकात की थी। उनका मानना है कि यदि आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाता और उनसे सलाह ली जाती, तो वर्तमान स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने कहा कि आंदोलन के वास्तविक चेहरों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले युवाओं की अनदेखी संगठन को कमजोर कर सकती है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग केवल इतनी है कि संगठन की पूरी संरचना लोकतांत्रिक तरीके से बनाई जाए। प्रत्येक राज्य के स्वयंसेवकों और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों को समान अवसर मिले तथा सभी महत्वपूर्ण फैसले पारदर्शी प्रक्रिया के तहत लिए जाएं। उनका कहना है कि इससे संगठन मजबूत होगा और लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक पार्टी नेतृत्व उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेता। उन्होंने कहा कि यदि संगठन वास्तव में देश के युवाओं की आवाज बनना चाहता है तो उसे जवाबदेही, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। फिलहाल इस पूरे विवाद पर पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन छत्रपति संभाजीनगर में शुरू हुआ यह विरोध संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
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