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पुणे की ‘सहेली’ संस्था: सेक्स वर्कर्स के नेतृत्व में तीन दशकों से बदलाव की कहानी

पुणे : लगभग तीन दशकों से पुणे की एक संस्था समाज के सबसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों में से एक, सेक्स वर्कर्स, के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार काम कर रही है। वर्ष 1998 में शुरू हुई नॉन-प्रॉफिट संस्था ‘सहेली’ की खासियत यह है कि यह केवल सेक्स वर्कर्स के लिए काम करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि इसे खुद इसी समुदाय के लोग संचालित करते हैं।
‘सहेली’ की स्थापना और संचालन में सेक्स वर्कर्स की सक्रिय भागीदारी रही है। संस्था के संस्थापक और बोर्ड के कई सदस्य इसी समुदाय से जुड़े हैं। यही वजह है कि संस्था की योजनाएं और पहल बाहरी सोच या अनुमान पर नहीं, बल्कि समुदाय के वास्तविक अनुभवों और जरूरतों पर आधारित होती हैं।
समुदाय के नेतृत्व से शुरू हुई बदलाव की पहल
‘सहेली’ की शुरुआत ऐसे समय में हुई थी, जब HIV महामारी सेक्स वर्कर्स के समुदाय के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आई थी। उस दौर में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, सामाजिक भेदभाव और जागरूकता के अभाव के कारण इस समुदाय के लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
शुरुआत में संस्था का मुख्य उद्देश्य HIV संक्रमण से बचाव, स्वास्थ्य जागरूकता और सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देना था। इसके लिए समुदाय के भीतर ही जागरूकता अभियान चलाए गए और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया।
समय के साथ ‘सहेली’ का काम केवल HIV जागरूकता तक सीमित नहीं रहा। संस्था ने सेक्स वर्कर्स और उनके परिवारों के सामने आने वाली सामाजिक, स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियों को समझते हुए अपने काम का दायरा बढ़ाया।
स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर मानसिक सहायता तक
आज ‘सहेली’ सेक्स वर्कर्स, उनके बच्चों, साथियों और परिवारों के लिए कई तरह की सेवाएं उपलब्ध कराती है। संस्था का काम प्रजनन स्वास्थ्य, यौन स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, सुरक्षित गर्भपात सेवाओं और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
संस्था समुदाय आधारित पीयर एजुकेशन मॉडल पर भी काम करती है। इसमें समुदाय के लोग ही अपने साथियों को स्वास्थ्य, अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जानकारी देते हैं। इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जानकारी देने वाले लोग खुद उसी समुदाय से आते हैं, जिससे भरोसा और संवाद बेहतर बनता है।
भेदभाव और चुनौतियों के खिलाफ प्रयास
सेक्स वर्कर्स समुदाय को अक्सर सामाजिक भेदभाव, कानूनी जटिलताओं और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ‘सहेली’ इन चुनौतियों से निपटने के लिए समुदाय के लोगों को जागरूक करने और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का काम करती है।
संस्था का मानना है कि किसी भी समुदाय के विकास के लिए जरूरी है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसी समुदाय के लोगों की भागीदारी हो। इसी सोच के तहत ‘सहेली’ ने सेक्स वर्कर्स को केवल सहायता प्राप्त करने वाले लोगों के रूप में नहीं, बल्कि बदलाव की प्रक्रिया में नेतृत्व करने वाले लोगों के रूप में आगे बढ़ाया है।
बच्चों और परिवारों पर भी ध्यान
सेक्स वर्कर्स के बच्चों और परिवारों को भी कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ‘सहेली’ ने इन पहलुओं पर भी काम किया है और बच्चों तथा परिवारों को जरूरी सहायता, मार्गदर्शन और संसाधनों से जोड़ने की कोशिश की है।
संस्था का उद्देश्य केवल तत्काल समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि समुदाय के लोगों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना भी है।
तीन दशक की यात्रा और आगे का रास्ता
1998 से अब तक ‘सहेली’ ने कई उतार-चढ़ाव के बीच अपनी पहचान बनाई है। संस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि यह मानी जाती है कि उसने सेक्स वर्कर्स को अपनी आवाज खुद उठाने और अपने अधिकारों के लिए आगे आने का मंच दिया।
समुदाय के नेतृत्व में चलने वाला यह मॉडल सामाजिक कार्य के क्षेत्र में एक अलग उदाहरण पेश करता है। यह दिखाता है कि जिन लोगों के लिए नीतियां बनाई जाती हैं, अगर उन्हें ही निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाए तो बदलाव अधिक प्रभावी और स्थायी हो सकता है।
आज भी ‘सहेली’ स्वास्थ्य, अधिकारों और सम्मानजनक जीवन के लिए काम कर रही है। संस्था की यात्रा यह संदेश देती है कि सामाजिक बदलाव केवल बाहर से किए गए प्रयासों से नहीं, बल्कि समुदाय की भागीदारी और नेतृत्व से भी संभव है।





