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Pune : कचरा प्रबंधन पर संकट गहराया, मानसून से पहले सिस्टम पर बढ़ा दबाव

Maharashtra महाराष्ट्र: मानसून से पहले पुणे शहर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। शहर के कई म्युनिसिपल कचरा-प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट अपनी निर्धारित क्षमता से कम पर काम कर रहे हैं, जिससे पूरे कचरा निपटान नेटवर्क पर दबाव बढ़ गया है। इस स्थिति के कारण कचरा उठाने वाली गाड़ियों को समय पर खाली नहीं किया जा रहा है, जिससे ट्रांसफर स्टेशनों और शहर के विभिन्न इलाकों में कचरे का जमाव बढ़ता जा रहा है।
नगर निकाय के रिकॉर्ड के अनुसार, पुणे में प्रतिदिन लगभग 2,800 टन कचरा उत्पन्न होता है। इसमें से करीब 2,500 टन कचरे का प्रसंस्करण शहर में संचालित 27 कचरा-प्रबंधन परियोजनाओं के माध्यम से किया जा रहा है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कई प्रोसेसिंग सेंटर अपनी पूरी क्षमता पर काम नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते कचरे के संग्रहण और परिवहन प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव बन गया है।
इस स्थिति का असर शहर के कई हिस्सों में साफ देखा जा रहा है, जहां समय पर कचरा न उठने और प्रोसेस न होने के कारण गंदगी बढ़ रही है। बारिश के मौसम से पहले यह समस्या और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि नालियों में कचरा जमा होने से जलभराव और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ सकते हैं।
यह मुद्दा पिछले महीने पुणे महानगरपालिका (PMC) की जनरल बॉडी मीटिंग में भी उठाया गया था। बैठक में चुने हुए प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कुछ कचरा प्रबंधन कॉन्ट्रैक्टरों ने जानबूझकर कचरा उठाने और प्रोसेसिंग की गति धीमी कर दी है। उनका दावा था कि यह स्थिति नए टेंडर हासिल करने के लिए दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
इन आरोपों के बाद नगर प्रशासन ने स्थिति को सुधारने के लिए मौजूदा प्रोसेसिंग केंद्रों की क्षमता को प्रतिदिन 300 टन तक बढ़ाने की योजना की घोषणा की थी। हालांकि, यह प्रस्तावित वृद्धि अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और कचरा प्रबंधन प्रणाली को सुचारू बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो मानसून के दौरान शहर में स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने भी गंदगी और कचरा प्रबंधन में देरी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कई इलाकों में कचरे के ढेर लगने लगे हैं, जिससे बदबू और संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।
फिलहाल पुणे महानगरपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती कचरा प्रोसेसिंग क्षमता को पूरी तरह सक्रिय करना और पूरे सिस्टम को सुचारू रूप से चलाना है, ताकि आने वाले मानसून में शहर को किसी बड़े संकट से बचाया जा सके।





