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Pune : तीन अष्टविनायक मंदिर एक महीने के लिए बंद, संरक्षण और मरम्मत कार्य के चलते निर्णय

Maharashtra महाराष्ट्र: पुणे जिले के तीन प्रमुख अष्टविनायक मंदिरों को एक महीने के लिए भक्तों के दर्शन हेतु बंद रखने का निर्णय लिया गया है। यह कदम अष्टविनायक डेवलपमेंट प्लान के तहत मंदिरों के संरक्षण, मरम्मत और रखरखाव कार्य को पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है। इस दौरान श्रद्धालु इन मंदिरों में दर्शन नहीं कर सकेंगे।
जानकारी के अनुसार, श्री क्षेत्र मोरगांव स्थित श्री मयूरेश्वर मंदिर, श्री क्षेत्र थेउर स्थित श्री चिंतामणि मंदिर और श्री क्षेत्र सिद्धटेक मंदिर को 10 मई 2026 से 9 जून 2026 तक अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा। यह निर्णय चिंचवड़ देवस्थान ट्रस्ट द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जारी किया गया है।
ट्रस्ट के अनुसार, भारतीय पुरातत्व विभाग (आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट) की देखरेख में सभी अष्टविनायक मंदिरों के संरक्षण और मरम्मत का कार्य शुरू किया गया है। इन ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले मंदिरों की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए विशेष कंजर्वेशन और रेस्टोरेशन कार्य किया जा रहा है।
पिछले लगभग दो महीनों से मोरगांव, थेउर और सिद्धटेक के मंदिर परिसरों में मरम्मत और संरक्षण से जुड़े कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों में मंदिर की दीवारों, संरचनात्मक हिस्सों और पुरानी निर्माण शैली को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में इन धरोहर स्थलों को नुकसान से बचाया जा सके।
देवस्थान ट्रस्ट ने बताया कि यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिरों की दीर्घकालिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। कार्य पूरा होने के बाद मंदिरों को फिर से भक्तों के लिए खोला जाएगा।
इस अवधि के दौरान भक्तों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा की योजना बनाने से पहले मंदिरों की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। ट्रस्ट ने यह भी आश्वासन दिया है कि मरम्मत कार्य के दौरान धार्मिक परंपराओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा और कार्य को वैज्ञानिक तरीके से पूरा किया जाएगा।
अष्टविनायक मंदिर महाराष्ट्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिने जाते हैं और हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में अस्थायी रूप से बंद होने से श्रद्धालुओं को कुछ समय के लिए असुविधा हो सकती है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह कदम मंदिरों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जरूरी है।
फिलहाल सभी संबंधित विभाग मिलकर इस परियोजना को तेजी से पूरा करने में जुटे हैं, ताकि निर्धारित समय के बाद मंदिरों को बेहतर स्थिति में पुनः भक्तों के लिए खोला जा सके।





