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पुणे में खराब सड़कों पर मेयर सख्त आठ दिनों में गड्ढे भरने और रिपोर्ट देने का आदेश

पुणे: शहर की खराब सड़कों और लगातार बढ़ रही गड्ढों की शिकायतों को लेकर पुणे की मेयर मंजूषा नागपुरे ने नगर निगम प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। मेयर ने पुणे नगर निगम (PMC) को आदेश दिया है कि शहर भर के सभी गड्ढों को आठ दिनों के भीतर भरा जाए। इसके साथ ही पिछले दो वर्षों में हुए सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट भी आठ दिनों के अंदर पेश करने को कहा गया है।
मेयर ने यह निर्देश सड़क विभाग के अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में शहर की सड़कों की वर्तमान स्थिति, मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता और नागरिकों की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में नगर आयुक्त नवल किशोर राम, अतिरिक्त आयुक्त ओमप्रकाश दिवाटे, सड़क विभाग प्रमुख राजेश बांकर समेत नगर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मेयर ने अधिकारियों से सड़क निर्माण कार्यों की पूरी जानकारी मांगी और काम की गुणवत्ता पर जवाब तलब किया।
मेयर मंजूषा नागपुरे ने कहा कि पिछले दो वर्षों में शहर में किए गए सभी सड़क कार्यों की समीक्षा जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि रिपोर्ट में सड़क मरम्मत की लागत, दोबारा डामर बिछाने का काम, संबंधित ठेकेदारों की जानकारी और डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (DLP) जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल की जाएं।
डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड के तहत सड़क निर्माण के बाद तय अवधि तक खराबी आने पर उसकी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होती है। मेयर ने अधिकारियों से यह भी जानकारी मांगी है कि किन सड़कों पर निर्माण के बाद दोबारा मरम्मत की जरूरत पड़ी और इसके लिए जिम्मेदार कौन था।
पुणे में पिछले कुछ समय से खराब सड़कों और गड्ढों को लेकर नागरिकों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। बारिश के मौसम में कई इलाकों की सड़कें खराब हो गई हैं, जिससे वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम पहले ही गड्ढे भरने और विभिन्न विकास कार्यों के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत पर बड़ी राशि खर्च कर चुका है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में सड़कों की हालत खराब होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मेयर ने अधिकारियों से कहा कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा। सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि बार-बार एक ही सड़क पर पैसा खर्च न करना पड़े।
बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शहर के सभी क्षेत्रों में गड्ढों की पहचान कर तुरंत उन्हें भरा जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को समय सीमा के भीतर काम पूरा करने को कहा गया है।
नगर निगम प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मरम्मत कार्यों की निगरानी प्रभावी तरीके से हो। मेयर ने कहा कि नागरिकों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सड़क विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे क्षेत्रवार रिपोर्ट तैयार करें और यह जानकारी दें कि पिछले दो वर्षों में किन-किन सड़कों पर काम हुआ, कितना खर्च किया गया और वर्तमान स्थिति क्या है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता की कमी और जल निकासी व्यवस्था की समस्या के कारण बारिश के दौरान सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।
पुणे जैसे तेजी से बढ़ते शहर में बेहतर सड़क व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। शहर में बढ़ते यातायात दबाव के कारण खराब सड़कों से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
मेयर के निर्देश के बाद अब नगर निगम प्रशासन के सामने आठ दिनों के भीतर गड्ढे भरने और सड़क कार्यों की पूरी रिपोर्ट तैयार करने की चुनौती है। अधिकारियों का कहना है कि तय समय सीमा के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुणे नगर निगम की ओर से सड़क मरम्मत अभियान तेज करने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन की नजर अब इस बात पर होगी कि दिए गए निर्देशों का कितना प्रभावी पालन होता है।





