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Maharashtra महाराष्ट्र: पुणे के उंद्री इलाके में रविवार को औतादेवी झील पर बड़े पैमाने पर पर्यावरण संरक्षण और पुनर्जीवन का अभियान चलाया गया, जिसमें कॉर्पोरेटर निवृत्ति अन्ना बंदल के मार्गदर्शन और सोशल वर्कर सचिन पुणेकर के सक्रिय समन्वय से गोदरेज प्राण ग्रीन ग्रुप ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पहल को एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए।
इस अभियान की खास बात यह रही कि इसमें अलग-अलग पीढ़ियों के लोग एक साथ शामिल हुए। बच्चों से लेकर युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक सभी ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। सभी ने मिलकर झील के आसपास के क्षेत्र को साफ करने और उसे फिर से प्राकृतिक स्वरूप में लाने का प्रयास किया।
अभियान की शुरुआत झील के आसपास फैले कचरे की सफाई से की गई। वॉलंटियर्स ने प्लास्टिक बैग, डिस्पोजेबल कप, पानी की बोतलें, खाने के रैपर और अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे को इकट्ठा किया। इसके बाद इस कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर सुरक्षित रूप से हटाया गया ताकि वह झील के पानी में न पहुंच सके और प्रदूषण को और न बढ़ाए।
सफाई अभियान के बाद क्षेत्र में वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया गया। प्रतिभागियों ने झील के चारों ओर पौधे लगाए, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में हरियाली बढ़ाना और स्थानीय जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) को मजबूत करना था। इस प्रयास का लक्ष्य पक्षियों, कीड़ों और अन्य वन्य जीवों के लिए एक बेहतर और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना था।
आयोजकों के अनुसार, यह पहल केवल एक सामान्य वृक्षारोपण या सफाई अभियान नहीं थी, बल्कि एक व्यापक पर्यावरण जागरूकता अभियान था। इसमें लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि किस तरह प्लास्टिक प्रदूषण, अनियंत्रित कचरा निपटान, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और हरियाली की कमी पुणे की झीलों और जलस्रोतों के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में झीलें और जलस्रोत न केवल पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी हैं, बल्कि वे स्थानीय जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनकी सफाई और संरक्षण समय की आवश्यकता बन गई है।
गोदरेज प्राण ग्रीन ग्रुप के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि लोगों में लंबे समय तक पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि जब समाज के सभी वर्ग एक साथ आकर ऐसे प्रयास करते हैं, तो उसका प्रभाव अधिक व्यापक और स्थायी होता है।
कॉर्पोरेटर निवृत्ति अन्ना बंदल ने इस पहल को सराहते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन और समाज मिलकर ही पर्यावरण संरक्षण को सफल बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि झीलों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
सोशल वर्कर सचिन पुणेकर ने भी इस अभियान को सकारात्मक दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां न केवल पर्यावरण को सुधारती हैं, बल्कि लोगों को अपने आसपास के प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूक भी बनाती हैं।
अभियान में शामिल बच्चों और युवाओं ने भी इस अनुभव को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार उन्होंने इतने बड़े स्तर पर किसी झील की सफाई और वृक्षारोपण में हिस्सा लिया और इससे उन्हें पर्यावरण की वास्तविक स्थिति को समझने का मौका मिला।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया और कहा कि यदि इस तरह के अभियान नियमित रूप से चलाए जाएं, तो झीलों और अन्य जलस्रोतों की स्थिति में काफी सुधार हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल भविष्य में और लोगों को प्रेरित करेगी।
कुल मिलाकर, औतादेवी झील पर चला यह अभियान न केवल सफाई और वृक्षारोपण का कार्यक्रम था, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी और जागरूकता का एक मजबूत संदेश भी था। इसने यह साबित किया कि जब समाज एकजुट होकर काम करता है, तो प्राकृतिक संसाधनों को बचाना और उन्हें पुनर्जीवित करना संभव है।





