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Maharashtra में 1865 से पुराने प्रॉपर्टी रिकॉर्ड होंगे डिजिटाइज़

Maharashtra महाराष्ट्र: डिजिटाइज़ेशन और बेहतर प्रशासनिक सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महाराष्ट्र सरकार के स्टैम्प और रजिस्ट्रेशन विभाग ने ऐतिहासिक प्रॉपर्टी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में बदलने की एक बड़ी पहल शुरू की है। इस प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 1865 से भी पुराने भूमि और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों को स्कैन कर सुरक्षित डिजिटल सिस्टम में स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे नागरिक भविष्य में कभी भी और कहीं से भी इन रिकॉर्ड्स को ऑनलाइन एक्सेस कर सकेंगे।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। इसके लिए एक विशेष फर्म को नियुक्त किया गया है, जो इस पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से संचालित करेगी। यह पहल न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान बनाएगी बल्कि रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ाएगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि इस परियोजना में कई चरण शामिल हैं। इनमें दस्तावेजों का प्रारंभिक मूल्यांकन, उनकी सुरक्षा के लिए संरक्षण कार्य, आवश्यक रेस्टोरेशन, हाई-क्वालिटी स्कैनिंग, इंडेक्सिंग और मेटाडेटा एंट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही पूरे डेटा को एक आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यवस्थित किया जाएगा।
इस पूरी प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (DMS) का उपयोग किया जाएगा। इसके जरिए सभी रिकॉर्ड्स को क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे डेटा की सुरक्षा और उपलब्धता दोनों सुनिश्चित हो सके।
अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना न केवल पुराने रिकॉर्ड्स को संरक्षित करने में मदद करेगी, बल्कि नागरिकों और प्रशासन के बीच दस्तावेजों की उपलब्धता को भी आसान बनाएगी। पहले जहां पुराने रिकॉर्ड खोजने में लंबा समय लगता था, वहीं अब यह प्रक्रिया कुछ ही क्लिक में पूरी की जा सकेगी।
सरकार का मानना है कि इस पहल से भूमि और संपत्ति से जुड़े विवादों के समाधान में भी तेजी आएगी, क्योंकि सभी ऐतिहासिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप में आसानी से उपलब्ध होंगे। इससे रजिस्ट्रेशन और सत्यापन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।
इसके अलावा, यह परियोजना राज्य में ई-गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम लागू होने से न केवल कागजी कार्यवाही कम होगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी समय और संसाधनों की बचत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारत में डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत होगा।





