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नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियां तेज, मंत्री गिरीश महाजन ने राज्यपाल को दिया निमंत्रण

मुंबई। महाराष्ट्र में नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसी सिलसिले में राज्य के कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने गुरुवार को राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से मुलाकात कर उन्हें 31 अक्टूबर को आयोजित होने वाले ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया। यह समारोह वर्ष 2027 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के औपचारिक शुभारंभ का प्रतीक होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भी इस विशेष आयोजन के लिए आमंत्रित किया गया है। महाराष्ट्र सरकार आयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां कर रही है।
गिरीश महाजन ने राज्यपाल को सिंहस्थ कुंभ मेले से जुड़ी तैयारियों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नासिक और त्र्यंबकेश्वर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं।
राज्यपाल को ध्वजारोहण समारोह का निमंत्रण
महाराष्ट्र के जल संसाधन, आपदा प्रबंधन और कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से मुलाकात के दौरान उन्हें ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया।
महाजन नासिक जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। ऐसे में कुंभ मेले की तैयारियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुलाकात के दौरान उन्होंने सिंहस्थ कुंभ मेले के धार्मिक महत्व और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला। महाजन ने कहा कि यह आयोजन देशभर के संतों, साधुओं, धार्मिक संगठनों और लाखों श्रद्धालुओं को एक मंच पर लाने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि नासिक और त्र्यंबकेश्वर लंबे समय से हिंदू धर्म की प्रमुख तीर्थस्थलियों में शामिल हैं। सिंहस्थ कुंभ मेले के आयोजन से इन दोनों क्षेत्रों के आध्यात्मिक महत्व को और व्यापक पहचान मिलेगी।
31 अक्टूबर को होगा सिंहस्थ कुंभ का ध्वजारोहण
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले का ध्वजारोहण समारोह 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम कुंभ मेले के धार्मिक आयोजन की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
नासिक के रामकुंड में वैष्णव परंपरा से जुड़े संतों की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया जाएगा, जबकि त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में शैव परंपरा से जुड़े संत शामिल होंगे।
इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। मुख्य स्नान पर्व वर्ष 2027 में होंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भी मिला निमंत्रण
इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार, 21 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की थी।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को 31 अक्टूबर को होने वाले ध्वजारोहण समारोह का औपचारिक निमंत्रण दिया।
इस प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार, मंत्री गिरीश महाजन सहित राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
राष्ट्रपति को ध्वजारोहण समारोह के अलावा गोदावरी आरती, कुंभ मेला प्राधिकरण की वेबसाइट के शुभारंभ, कुंभ मेला गीत के विमोचन और स्मारक डाक टिकट के अनावरण के लिए भी आमंत्रित किया गया है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दे रहा है।
गिरीश महाजन ने इससे पहले आयोजित समीक्षा बैठक में कहा था कि भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।
नासिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में इन स्थानों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
प्रशासन की योजना के अनुसार, श्रद्धालुओं के आवागमन, आपातकालीन सेवाओं और भीड़ प्रबंधन के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की जा रही है।
35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य
सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के लिए केंद्र और महाराष्ट्र सरकार मिलकर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास कर रही हैं।
गिरीश महाजन ने अगस्त में बताया था कि कुंभ मेले से संबंधित बुनियादी सुविधाओं और विकास परियोजनाओं के लिए 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है।
इसके तहत सड़कों का विकास, घाटों का निर्माण एवं सुधार, परिवहन सुविधाओं का विस्तार और श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
सरकार का उद्देश्य केवल कुंभ मेले के दौरान व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि नासिक और त्र्यंबकेश्वर में दीर्घकालिक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना भी है।
धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र
नासिक और त्र्यंबकेश्वर का हिंदू धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान है। नासिक गोदावरी नदी के तट पर स्थित है, जबकि त्र्यंबकेश्वर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक के लिए प्रसिद्ध है।
सिंहस्थ कुंभ मेला इन दोनों धार्मिक स्थलों की परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
इस आयोजन में विभिन्न अखाड़ों के संत, साधु और धार्मिक प्रतिनिधि भाग लेते हैं। श्रद्धालु गोदावरी नदी में पवित्र स्नान के साथ पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हैं।
कुंभ मेले का महत्व केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं, संत समाज और धार्मिक विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी सामने लाता है।
विशेष निमंत्रण में दिखी महाराष्ट्र की संस्कृति
राष्ट्रपति को दिए गए विशेष निमंत्रण और उपहारों में महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत की झलक भी प्रस्तुत की गई।
उपहारों में येवला की प्रसिद्ध पैठणी साड़ी, आदिवासी समुदायों द्वारा तैयार उत्पाद, बांस की वस्तुएं, वन उपज और नासिक क्षेत्र के कृषि उत्पाद शामिल किए गए।
निमंत्रण को इस प्रकार तैयार किया गया कि उसमें कुंभ मेले की पौराणिक पृष्ठभूमि, आध्यात्मिक महत्व और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विविधता दिखाई दे।
इस पहल का उद्देश्य आयोजन की धार्मिक महत्ता के साथ स्थानीय परंपराओं और हस्तशिल्प को भी प्रोत्साहित करना है।
2027 में होंगे प्रमुख स्नान पर्व
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले के मुख्य स्नान पर्व वर्ष 2027 में आयोजित किए जाएंगे। पहला प्रमुख अमृत स्नान 2 अगस्त 2027 को निर्धारित है।
इन आयोजनों के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
धार्मिक स्थलों के आसपास सड़क, पेयजल, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्रशासनिक तैयारियों की लगातार समीक्षा
महाराष्ट्र सरकार सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों की नियमित समीक्षा कर रही है। गिरीश महाजन के अनुसार, आयोजन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
31 अक्टूबर के ध्वजारोहण समारोह के साथ सिंहस्थ कुंभ मेले की धार्मिक गतिविधियों का औपचारिक शुभारंभ होगा। हालांकि, राष्ट्रपति की उपस्थिति के अंतिम कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
फिलहाल राज्य सरकार का पूरा ध्यान आयोजन की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने पर केंद्रित है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।





