महाराष्ट्र

पुणे एयरपोर्ट पर हब-एंड-स्पोक मॉडल की तैयारी

Kavita2
27 July 2026 12:30 PM IST
पुणे एयरपोर्ट पर हब-एंड-स्पोक मॉडल की तैयारी
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पुणे : एयरपोर्ट पर हवाई यातायात को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से ‘हब-एंड-स्पोक’ ऑपरेशनल मॉडल लागू करने की संभावनाओं पर काम शुरू हो गया है। इसी दिशा में शनिवार को पुणे एयरपोर्ट पर एक शुरुआती आकलन बैठक आयोजित की गई, जिसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA), एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और अन्य प्रमुख स्टेकहोल्डर्स के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य पुणे एयरपोर्ट पर इस मॉडल की व्यवहारिकता, ऑपरेशनल जरूरतों और संभावित लाभों का अध्ययन करना था। अधिकारियों ने प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने के लिए जरूरी बदलावों और सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधिकारी, पुणे एयरपोर्ट के एयरपोर्ट डायरेक्टर, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि, सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF), इमिग्रेशन विभाग, कस्टम्स अधिकारी, शेड्यूल एयरलाइंस और एयरपोर्ट से जुड़े अन्य हितधारक शामिल हुए।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रस्तावित ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसमें मॉडल के संचालन ढांचे, यात्रियों के लिए संभावित सुविधाओं, एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों और इसे लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियात्मक बदलावों की जानकारी दी गई।

हब-एंड-स्पोक मॉडल विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें एक प्रमुख एयरपोर्ट को ‘हब’ के रूप में विकसित किया जाता है और छोटे या क्षेत्रीय एयरपोर्ट ‘स्पोक’ के रूप में उससे जुड़े होते हैं। इस व्यवस्था के तहत यात्रियों और उड़ानों को एक केंद्रीय स्थान के माध्यम से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकता है।

अधिकारियों का मानना है कि इस मॉडल से एयर कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिल सकता है और यात्रियों के लिए अधिक उड़ान विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। इसके अलावा एयरलाइंस को भी अपने संचालन को अधिक प्रभावी ढंग से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

बैठक में इस मॉडल के संभावित लाभों पर चर्चा की गई। इनमें उड़ानों के बेहतर समन्वय, यात्रियों के ट्रांजिट समय में कमी, संसाधनों के बेहतर उपयोग और एयरपोर्ट संचालन की दक्षता बढ़ाने जैसे पहलुओं को शामिल किया गया।

हालांकि, अधिकारियों ने इस मॉडल को लागू करने से पहले कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। इनमें एयरपोर्ट की मौजूदा क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था, यात्रियों की आवाजाही, बैगेज हैंडलिंग, इमिग्रेशन और कस्टम्स प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।

सुरक्षा एजेंसियों और अन्य विभागों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी भूमिका और आवश्यकताओं को लेकर सुझाव दिए। CISF और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए नई व्यवस्था को लागू करने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की।

एयरलाइंस प्रतिनिधियों ने भी संचालन से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने उड़ानों के समय निर्धारण, कनेक्टिविटी और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं पर सुझाव दिए।

पुणे एयरपोर्ट महाराष्ट्र के प्रमुख हवाई अड्डों में से एक है और यहां से घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शहर की औद्योगिक, शैक्षणिक और आईटी क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका के कारण एयर कनेक्टिविटी की मांग भी बढ़ी है।

ऐसे में हब-एंड-स्पोक मॉडल को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो इससे पुणे एयरपोर्ट की क्षमता और कनेक्टिविटी दोनों में सुधार हो सकता है।

बैठक के दौरान यह भी चर्चा हुई कि मॉडल को लागू करने से पहले विस्तृत अध्ययन और चरणबद्ध योजना की जरूरत होगी। सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय इस योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।

एयरपोर्ट प्रशासन और संबंधित एजेंसियां अब बैठक में सामने आए सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार करेंगी। आने वाले समय में इस मॉडल को लेकर और बैठकें आयोजित किए जाने की संभावना है।

पुणे एयरपोर्ट पर हब-एंड-स्पोक मॉडल की दिशा में शुरू हुई यह पहल विमानन क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और यात्रियों की सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब यह देखना होगा कि विस्तृत अध्ययन के बाद इस मॉडल को किस तरह लागू किया जाता है और इससे पुणे की हवाई सेवाओं को कितना लाभ मिलता है।

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