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Maharashtra में खरीफ 2026-27 की तैयारी, 145 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य

Maharashtra महाराष्ट्र: सरकार ने खरीफ सीजन 2026-27 के लिए व्यापक कृषि योजना तैयार की है। राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने घोषणा की कि इस सीजन में कुल 145.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें सोयाबीन, धान, मक्का, अरहर, उड़द, कपास और गन्ना जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं।
यह जानकारी पुणे में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक और कार्यशाला के दौरान दी गई, जिसमें आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह कार्यक्रम पुणे के शिवाजीनगर स्थित सारथी ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री भरणे ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग के अनुमानों के अनुसार इस वर्ष राज्य में दीर्घकालिक औसत वर्षा का लगभग 92 प्रतिशत ही होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि मौसम की यह स्थिति किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि मौजूदा अल नीनो प्रभाव के कारण राज्य के कुछ हिस्सों में अनियमित बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में कृषि विभाग को पहले से ही तैयार रहने की आवश्यकता है।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और कृषि विभाग इस स्थिति से निपटने के लिए “एक्टिव मोड” में काम कर रहे हैं। किसानों को समय पर मार्गदर्शन, बीज वितरण और जल प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
कार्यशाला में अधिकारियों ने आगामी खरीफ सीजन की रणनीति, सिंचाई व्यवस्था, बीज उपलब्धता और फसल सुरक्षा उपायों पर भी विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि बदलते मौसम को देखते हुए फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
इस दौरान मंत्री भरणे ने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य बजट में पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर लोन वेवर योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत किसानों को कर्ज माफी का लाभ दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि किसानों का डेटा एकत्र करने और पात्रता मानदंड तय करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि यह लोन वेवर योजना 30 जून तक लागू कर दी जाएगी, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को राहत मिलेगी।
सरकार का मानना है कि समय पर तैयारी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संभावित कम वर्षा और जल संकट की स्थिति में भी कृषि उत्पादन को स्थिर रखा जा सकेगा। इस बैठक को किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





