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मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने टाटा पावर कंपनी लिमिटेड को बड़ी राहत देते हुए उसकी 75 साल पुरानी कालवा-कल्याण ट्रांसमिशन लाइन को अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना का उद्देश्य ग्रेटर मुंबई और ठाणे जिलों में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना के दौरान मैंग्रोव को काटने या किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने का काम नहीं किया जाएगा।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायाधीश गौतम अंखाड की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पुराने ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलना और आधुनिक बनाना बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम है। अदालत ने टाटा पावर को मौजूदा ट्रांसमिशन टावरों को बदलने और लाइन को 110 केवी से बढ़ाकर 220 केवी करने की अनुमति प्रदान की।
टाटा पावर की यह ट्रांसमिशन लाइन करीब 75 साल पुरानी है और लंबे समय से मुंबई महानगर क्षेत्र की बिजली आपूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और शहरी विस्तार के कारण क्षेत्र में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए कंपनी ने मौजूदा लाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई थी।
कंपनी का उद्देश्य इस अपग्रेडेशन के माध्यम से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाना और भविष्य की जरूरतों को पूरा करना है। 110 केवी क्षमता वाली पुरानी लाइन को 220 केवी में बदलने से अधिक बिजली वहन करने की क्षमता विकसित होगी और बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सुनवाई के दौरान पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए थे। खासतौर पर मैंग्रोव क्षेत्र को लेकर चिंता जताई गई थी। अदालत ने इस मामले में स्पष्ट निर्देश दिया कि परियोजना के दौरान मैंग्रोव को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
अदालत ने टाटा पावर को उन ट्रांसमिशन टावरों को बदलने की अनुमति दी है, जिनमें मैंग्रोव बफर जोन के 50 मीटर के दायरे में स्थित दो टावर भी शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि इस प्रक्रिया में मैंग्रोव की कटाई या विनाश नहीं होना चाहिए।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा के लिए मजबूत और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। पुराने उपकरणों और ट्रांसमिशन सिस्टम को समय के साथ अपग्रेड करना बिजली व्यवस्था की सुरक्षा और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई और ठाणे जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। नए आवासीय प्रोजेक्ट, व्यावसायिक गतिविधियां और औद्योगिक विकास के कारण बिजली आपूर्ति नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाएं भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगी।
टाटा पावर की ओर से बताया गया कि लाइन अपग्रेडेशन के बाद बिजली आपूर्ति की क्षमता में सुधार आएगा और उपभोक्ताओं को अधिक भरोसेमंद सेवा मिल सकेगी। कंपनी पर्यावरणीय नियमों का पालन करते हुए परियोजना को पूरा करेगी।
अदालत के फैसले के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। टाटा पावर को ट्रांसमिशन टावरों के बदलाव और लाइन अपग्रेडेशन का काम निर्धारित नियमों के तहत करना होगा।
मुंबई महानगर क्षेत्र में बिजली की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शहर और आसपास के इलाकों में लगातार बढ़ रहे बिजली भार को संभालने के लिए आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
फिलहाल बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के बाद टाटा पावर की 75 साल पुरानी कालवा-कल्याण ट्रांसमिशन लाइन के आधुनिकीकरण का रास्ता खुल गया है। यह अपग्रेडेशन मुंबई और ठाणे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।





