- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- पवई झील ओवरफ्लो, मुंबई...

Maharashtra महाराष्ट्र: मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच शहर के पूर्वी उपनगरों में स्थित पवई झील बुधवार सुबह ओवरफ्लो हो गई। यह घटना लगभग सुबह 5:30 बजे दर्ज की गई, जिससे आसपास के इलाकों में हलचल बढ़ गई। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि झील अपने निर्धारित जलस्तर से ऊपर भर गई है।
बीएमसी के अनुसार, पवई झील शहर की प्रमुख कृत्रिम झीलों में से एक है, जिसकी कुल जल धारण क्षमता 545 करोड़ लीटर है। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि इस झील के पानी का उपयोग केवल औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है, और इसे पीने के पानी की आपूर्ति में शामिल नहीं किया जाता।
नगर निगम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि झील में जलस्तर बढ़ने के कारण यह ओवरफ्लो स्थिति में पहुंच गई है। लगातार बारिश और जलग्रहण क्षेत्रों में बढ़ते पानी के दबाव को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका क्षेत्रातील कृत्रिम तलावांपैकी महत्त्वाचा असणारा पवई तलाव आज पहाटे ५:३० वाजेच्या सुमारास पूर्ण भरुन वाहू लागला आहे. ५४५ कोटी लीटर एवढी जलधारण क्षमता असणाऱ्या या तलावाचे पाणी फक्त औद्योगिक कारणांसाठी वापरले जाते.
— माझी Mumbai, आपली BMC (@mybmc) July 1, 2026
💧Powai lake, one of the most important… pic.twitter.com/PMrAEz8fsb
इस बीच, मुंबई की पेयजल आपूर्ति प्रणाली को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। शहर को पानी सप्लाई करने वाले सात प्रमुख जलाशयों में इस वर्ष पानी का स्टॉक पिछले साल की तुलना में कम दर्ज किया गया है। हालांकि मानसून सक्रिय है, फिर भी जल भंडारण के स्तर में अपेक्षित वृद्धि नहीं देखी जा रही है।
बीएमसी के अधिकारियों के अनुसार, मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह इन सात जलाशयों पर निर्भर करती है, जो शहर की दैनिक पानी की जरूरतों को पूरा करते हैं। ऐसे में जलस्तर में किसी भी तरह की गिरावट भविष्य में आपूर्ति व्यवस्था पर असर डाल सकती है।
पवई झील के ओवरफ्लो होने की घटना को फिलहाल बारिश के कारण सामान्य स्थिति माना जा रहा है, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि जल स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। नगर निगम की टीमें मौके पर स्थिति का आकलन कर रही हैं और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, झील के आसपास पानी का स्तर बढ़ने से कुछ निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका भी बनी रहती है। हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या जलभराव की सूचना नहीं मिली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में मानसून के दौरान झीलों और जलाशयों का भरना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जल प्रबंधन की दृष्टि से इसका संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि जलाशयों का स्तर लगातार कम बना रहता है, तो आने वाले महीनों में पानी की आपूर्ति को लेकर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
बीएमसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर में जलापूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक योजनाएं लागू की जाएंगी। नगर निगम ने नागरिकों से भी पानी के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की है।
मुंबई में हर साल मानसून के दौरान जलस्तर में उतार-चढ़ाव देखा जाता है। पवई झील जैसे जलस्रोत जहां अतिरिक्त पानी को संभालने में मदद करते हैं, वहीं अन्य जलाशय शहर की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस बार के मानसून में जहां कुछ जलस्रोतों में पानी बढ़ा है, वहीं कुल मिलाकर जल भंडारण का स्तर अभी भी पिछले साल की तुलना में कम बताया जा रहा है। यह स्थिति आने वाले समय में जल प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकती है।
फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है और कहा है कि किसी भी तरह की आपात स्थिति नहीं है। लेकिन जल स्तर की निगरानी और प्रबंधन को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
कुल मिलाकर, पवई झील का ओवरफ्लो होना जहां भारी बारिश का सामान्य परिणाम माना जा रहा है, वहीं शहर के अन्य जलाशयों में कम जल स्तर आने वाले दिनों में मुंबई की जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए अहम विषय बना हुआ है।





