महाराष्ट्र

मुंबई में प्रदूषण का कहर, अधिकारियों पर हाईकोर्ट सख्त

Rajeshwari Nishad
22 Oct 2026 3:44 PM IST
मुंबई में प्रदूषण का कहर, अधिकारियों पर हाईकोर्ट सख्त
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मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में लगातार बढ़ रहे वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने शहर की बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि समुद्र किनारे बसे मुंबई जैसे शहर में प्रदूषण का स्तर कई मौकों पर दिल्ली से भी ज्यादा खराब हो रहा है। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब लाखों लोग प्रदूषण के कारण परेशान हैं, तब इसे नियंत्रित करने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी चैन की नींद कैसे सो सकते हैं? अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) और मुंबई पुलिस को प्रदूषण रोकने के आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करने पर कड़ी फटकार लगाई है।
मुंबई की बिगड़ती हवा पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी
बॉम्बे हाईकोर्ट में बुधवार, 21 अक्टूबर को वायु और ध्वनि प्रदूषण से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला के. गोखले की खंडपीठ ने मुंबई की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
अदालत ने कहा कि मुंबई समुद्र के किनारे बसा शहर है, जहां समुद्री हवाएं चलती हैं और प्राकृतिक रूप से प्रदूषण फैलने की परिस्थितियां अपेक्षाकृत अनुकूल होनी चाहिए। इसके बावजूद यहां की हवा लगातार खराब होती जा रही है।
न्यायमूर्ति कुलकर्णी ने कहा कि मुंबई में प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि जब बड़ी संख्या में लोग प्रदूषित हवा में सांस लेने के लिए मजबूर हैं, तो प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को लेकर गंभीर क्यों नहीं हैं।
अधिकारियों की लापरवाही पर जताई नाराजगी
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण रोकने के लिए केवल दिशा-निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है। उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है।हाईकोर्ट ने बीएमसी, एमपीसीबी और मुंबई पुलिस के रवैये पर असंतोष जताया। अदालत का कहना था कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए पहले भी कई आदेश दिए गए, लेकिन उनका अपेक्षित पालन नहीं किया गया।
अदालत ने चेतावनी दी कि यदि जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।खंडपीठ ने कहा कि स्वच्छ वातावरण में जीवन जीना नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा विषय है। प्रशासन की निष्क्रियता से लोगों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होते हैं।
पुलिस स्टेशन के सामने फोड़े गए पटाखे
सुनवाई के दौरान अदालत ने दक्षिण मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट इलाके में हुई एक घटना का भी उल्लेख किया।बताया गया कि मंगलवार को व्यस्त सड़क पर पुलिस स्टेशन के सामने पटाखे फोड़े गए थे। अदालत ने इसे अपने पूर्व आदेशों का स्पष्ट उल्लंघन माना।हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस स्टेशन के सामने ही नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो शहर के दूसरे हिस्सों में नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।
अदालत ने त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता बताई।
संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का किया उल्लेख
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लेख किया।अदालत ने कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण से लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ रहा है।
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि वह प्रदूषण के मुद्दे को केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय मान रही है।
निर्माण स्थलों से उड़ती धूल पर भी सवाल
मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहनों का धुआं और विभिन्न गतिविधियों से निकलने वाले प्रदूषक शामिल हैं।अदालत ने निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लेकर भी बीएमसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि निर्माण कार्य करने वाले बिल्डरों और डेवलपर्स को निर्धारित पर्यावरणीय नियमों का पालन करना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना और अन्य आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
अदालत ने यह भी चिंता जताई कि शहर के कुछ इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब है, जबकि अपेक्षाकृत स्वच्छ इलाकों के आंकड़ों के आधार पर पूरे शहर की स्थिति का आकलन करना उचित नहीं होगा।
धुंध के कारण 500 मीटर से कम हुई दृश्यता
सुनवाई के दौरान मंगलवार को मुंबई में छाई धुंध का भी उल्लेख किया गया।रिपोर्ट के अनुसार, शहर के कुछ हिस्सों में धुंध के कारण दृश्यता घटकर 500 मीटर से भी कम रह गई थी।अदालत ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि लोगों को घर से बाहर निकलने से पहले हर बार एयर क्वालिटी इंडेक्स देखने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सांस संबंधी परेशानियों को बढ़ा सकते हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से श्वसन संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
पुलिस कमिश्नर को दिए सख्त निर्देश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे सभी पुलिस थानों के प्रभारी अधिकारियों के साथ बैठक कर अदालत के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही बीएमसी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।अदालत ने संबंधित संस्थाओं को 24 अक्टूबर तक सोशल मीडिया के माध्यम से जनजागरूकता संबंधी नोटिस जारी करने और अनुपालन की जानकारी देने के निर्देश भी दिए हैं।हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को पटाखों और ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना जरूरी है।
26 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले में अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।अदालत ने बीएमसी आयुक्त और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी को अगली सुनवाई में उपस्थित होकर प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।प्रशासन को यह बताना होगा कि अदालत के पहले दिए गए आदेशों को लागू करने के लिए क्या कार्रवाई की गई और भविष्य में प्रदूषण रोकने की क्या योजना है।
मुंबई में स्वच्छ हवा को लेकर बढ़ी चिंता
मुंबई में बढ़ते प्रदूषण ने आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से त्योहारों के दौरान पटाखों, तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम और निर्माण गतिविधियों के कारण होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अब बीएमसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस प्रशासन पर प्रभावी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
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