महाराष्ट्र

मरीन ड्राइव पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को पुलिस ने रोका, शिवाजी पार्क प्रदर्शन को अनुमति नहीं

Kavita2
2 Oct 2026 2:40 PM IST
मरीन ड्राइव पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को पुलिस ने रोका, शिवाजी पार्क प्रदर्शन को अनुमति नहीं
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मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मुंबई में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर पुलिस कार्रवाई की खबर सामने आई। पुलिस के अनुसार, गुरुवार को दिपके अपने समर्थकों के साथ मरीन ड्राइव पर प्लेकार्ड लेकर मौजूद थे। इसके बाद पुलिस टीम उन्हें मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन ले गई, जहां कुछ देर पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि, CJP ने बाद में इस कार्रवाई को लेकर अलग दावा किया और कहा कि दिपके को हिरासत में नहीं लिया गया था।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक दिपके मरीन ड्राइव पर कुछ समर्थकों के साथ प्लेकार्ड लेकर खड़े थे। मौके पर पहुंची पुलिस टीम, जिसमें एक महिला निरीक्षक भी शामिल थीं, ने उनसे उनकी पहचान और अन्य जानकारी के बारे में पूछताछ की। इसके बाद उन्हें पुलिस वाहन से मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन ले जाया गया। वहां उन्हें कुछ देर इंतजार कराया गया और वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात कराई गई। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद दिपके को लेकर हिरासत की चर्चा शुरू हुई। हालांकि CJP ने इसे खारिज कर दिया। संगठन ने कहा कि दिपके को हिरासत में लिए जाने की खबर सही नहीं है और उन्होंने घटना के बाद अपनी तस्वीर भी साझा की। इस तरह एक ही घटनाक्रम को लेकर पुलिस और संगठन के पक्ष में शब्दों का अंतर सामने आया है।

यह घटनाक्रम CJP के 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रस्तावित ‘जेल भरो आंदोलन’ से पहले हुआ। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर अपनी आपत्तियों के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया था। दिपके ने पहले ही घोषणा की थी कि उनकी मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

हालांकि मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति पहले ही देने से इनकार कर दिया था। पुलिस की ओर से जारी सूचना में कहा गया कि मौजूदा न्यायिक आदेशों और महाराष्ट्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत पुलिस विभाग शिवाजी पार्क मैदान में इस तरह की सभा की अनुमति देने के लिए अधिकृत नहीं है। संगठन को मुंबई में किसी वैकल्पिक स्थान के लिए अनुमति मांगने की सलाह भी दी गई थी।

पुलिस ने अनुमति से इनकार के पीछे ट्रैफिक और ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं का भी उल्लेख किया था। शिवाजी पार्क आवासीय क्षेत्र के पास स्थित है और वहां बड़ी भीड़ जुटने से सार्वजनिक यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई। इसके अलावा पुलिस ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के आदेश तथा बाद के राज्य सरकार के दिशानिर्देशों का हवाला दिया।

CJP ने अनुमति नहीं मिलने के बाद अपने आंदोलन का स्वरूप बदलते हुए ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान किया था। अभिजीत दिपके ने कहा था कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाती है तो संगठन बड़ी संख्या में लोगों के साथ विरोध दर्ज कराएगा। संगठन ने इसे चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विरोध के रूप में पेश किया।

CJP की मुख्य मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है। संगठन ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का भी मुद्दा उठाया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और प्रक्रिया को लेकर सवालों का समाधान होना चाहिए। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होने वाली कवायद बताया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है।

2 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले CJP ने मुंबई के अलावा दूसरे शहरों में भी आंदोलन फैलाने की बात कही थी। दिपके और संगठन के अन्य नेताओं ने गोवा, बेंगलुरु, कोलकाता समेत कई जगहों पर आगे कार्यक्रम करने का संकेत दिया। संगठन का कहना है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती।

मरीन ड्राइव की घटना ऐसे समय हुई जब मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में कार्यक्रम को लेकर पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। इसके बावजूद CJP नेता और समर्थक सार्वजनिक स्थानों पर अपनी मांगों के समर्थन में नजर आए। पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई को इसी व्यापक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था व्यवस्था के संदर्भ में देखा जा रहा है।

शिवाजी पार्क में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर भी विरोध के स्वर सामने आए हैं। कुछ स्थानीय निवासियों ने प्रदर्शन से शोर, यातायात और सुरक्षा संबंधी परेशानियों की आशंका जताई। हालांकि CJP का कहना है कि संगठन अपने लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का इस्तेमाल करना चाहता है।

CJP के प्रदर्शन के केंद्र में चुनाव आयोग से जुड़े सवाल हैं। संगठन का दावा है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर आवाज उठाना जरूरी है। हालांकि इन दावों की वास्तविकता और SIR प्रक्रिया से जुड़े आरोपों का आकलन संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के आधार पर किया जाना है। चुनाव आयोग ने अपनी तरफ से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को कानून के मुताबिक बताया है।

मरीन ड्राइव पर दिपके को पुलिस स्टेशन ले जाने की घटना को लेकर भी फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक उन्हें कुछ देर के लिए थाने ले जाकर पूछताछ की गई और बाद में छोड़ दिया गया। दूसरी तरफ CJP का कहना है कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया। ऐसे में घटना की कानूनी प्रकृति को लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड ही अंतिम स्थिति स्पष्ट करेगा।

इस बीच 2 अक्टूबर को मुंबई में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस का जोर भीड़ नियंत्रण और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने पर है। प्रदर्शन की जगह और अनुमति को लेकर संगठन तथा प्रशासन के बीच मतभेद पहले से सार्वजनिक हैं।

दिपके की मरीन ड्राइव वाली घटना ने प्रदर्शन से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल को और बढ़ा दिया है। एक ओर CJP मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना अभियान जारी रखने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस अनुमति और सार्वजनिक व्यवस्था के नियमों को आधार बनाकर कार्यक्रमों पर नियंत्रण की स्थिति स्पष्ट कर चुकी है।

फिलहाल शिवाजी पार्क में प्रस्तावित ‘जेल भरो आंदोलन’ और उससे जुड़े पुलिस बंदोबस्त पर नजर बनी हुई है। मरीन ड्राइव पर दिपके को कुछ देर पुलिस स्टेशन ले जाने की घटना के बाद अब 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में संगठन और प्रशासन के बीच स्थिति किस तरह रहती है, यह महत्वपूर्ण होगा। चुनाव आयोग और SIR को लेकर जारी बहस के बीच मुंबई में यह घटनाक्रम राजनीतिक विरोध और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े सवालों को एक साथ सामने ला रहा है।

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