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हिंजवडी IT पार्क में जलभराव पर PMRDA ने कहा—कई एजेंसियां जिम्मेदार

Maharashtra महाराष्ट्र: मॉनसून से पहले पुणे ज़िले में विभिन्न सरकारी एजेंसियां अपने-अपने क्षेत्रों में तैयारी में जुटी हैं, ताकि बारिश के मौसम में समस्याओं को कम किया जा सके। इस बीच, पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMRDA) ने भी अपने काम में तेजी दिखाई है। हिंजवडी IT पार्क और इसके आसपास के इलाकों में हर साल बारिश के दौरान पानी जमा होने की समस्या देखी जाती है, जिससे व्यवसायिक और आवासीय क्षेत्रों में परेशानी होती है।
हालांकि, PMRDA के कमिश्नर डॉ. अभिजीत चौधरी ने स्पष्ट किया है कि अगर इस साल भी हिंजवडी इलाके में जलभराव होता है, तो इसके लिए केवल PMRDA को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि हिंजवडी IT पार्क के विकास और रखरखाव में कई एजेंसियां सक्रिय हैं, और सभी की भूमिका मिलकर इस समस्या का समाधान तय करती है।
डॉ. चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हिंजवडी IT पार्क और उसके आसपास के इलाके में PMRDA, महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MIDC), स्थानीय ग्राम पंचायतें, पुणे ज़िला परिषद और राज्य के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) जैसी कई सरकारी एजेंसियां काम कर रही हैं। उनका कहना है कि जलभराव जैसी समस्याओं के समाधान में इन सभी एजेंसियों की सहभागिता महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक एजेंसी की ज़िम्मेदारी अलग-अलग है। PMRDA मुख्य रूप से सड़क और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर ध्यान देता है, जबकि MIDC औद्योगिक क्षेत्रों के जल निकासी सिस्टम का प्रबंधन करता है। स्थानीय ग्राम पंचायतें और ज़िला परिषद स्थानिक समस्याओं को देखती हैं, वहीं PWD मुख्य सड़क और पुलों की देखभाल करता है।
डॉ. चौधरी ने यह भी बताया कि PMRDA इस बार मॉनसून से पहले कई उपाय कर रहा है। इसमें पुराने ड्रेनेज सिस्टम की सफ़ाई, जल निकासी नालियों का निरीक्षण और नए जल निकासी मार्गों का निर्माण शामिल है। उनका कहना है कि इन उपायों से इलाके में जलभराव की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है, लेकिन पूरी तरह से यह समस्या सभी संबंधित एजेंसियों के सहयोग से ही हल होगी।
हिंजवडी IT पार्क के व्यवसायियों और निवासियों के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर मॉनसून में जलभराव से प्रभावित होते हैं। डॉ. चौधरी का कहना है कि जनता को भी एजेंसियों के काम और जिम्मेदारियों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि किसी भी समस्या के लिए केवल एक एजेंसी को दोष न दिया जाए।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि मॉनसून के दौरान पानी जमा होने की स्थिति में सभी संबंधित एजेंसियों को एक साथ मिलकर काम करना होगा, ताकि प्रभावित इलाकों में जल निकासी सुचारू रूप से हो सके और व्यवसायिक गतिविधियों पर असर न पड़े।





