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गरीबी हटाने पर मोदी का बड़ा दावा
पुणे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में गरीबी कम होने को लेकर विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले गरीबी हटाने के नाम पर केवल नारे लगाए जाते थे, लेकिन उनकी सरकार ने गरीबों को सशक्त बनाने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 से 12 वर्षों में भारत के लगभग 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं। प्रधानमंत्री ने इसे देश की आर्थिक प्रगति और गरीब कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के साथ गरीबी कम करने में भी उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को पुणे मेट्रो से जुड़ी लगभग 21,800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश के आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे में निवेश और गरीबी उन्मूलन को लेकर सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास और गरीबी में कमी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, तो गरीब परिवारों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है।
प्रधानमंत्री ने विश्व बैंक के हालिया आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में अत्यधिक गरीबी की दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक से अधिक समय के दौरान करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उनके मुताबिक, सरकार की नीतियों का मुख्य उद्देश्य केवल योजनाएं घोषित करना नहीं, बल्कि उनका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाना रहा है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी की दर वर्ष 2011-12 में लगभग 27.1 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2023-24 में घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। इस आकलन के लिए प्रतिदिन तीन अमेरिकी डॉलर की अंतरराष्ट्रीय गरीबी सीमा का उपयोग किया गया है। यह सीमा वर्ष 2021 की क्रय शक्ति समता यानी पीपीपी पर आधारित है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में इस दौरान भारत में गरीबी कम होने की महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है।
विश्व बैंक के आकलन में निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए निर्धारित गरीबी सीमा पर भी भारत की स्थिति में सुधार दिखाई देता है। प्रतिदिन 4.20 डॉलर की सीमा के आधार पर गरीबी में रहने वाली आबादी का अनुपात वर्ष 2011 में लगभग 57.7 प्रतिशत था, जो वर्ष 2023 में घटकर करीब 16.1 प्रतिशत रह गया। इस व्यापक गरीबी मापदंड के अनुसार लगभग 50 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का अनुमान है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने गरीबों को केवल सहायता प्राप्त करने वाला वर्ग मानने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब भी गरीब कल्याण योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए गए थे। उन्होंने गरीब कल्याण मेलों जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि योजनाओं के लाभार्थियों को सशक्त बनाना उनकी प्राथमिकता रही है।
मोदी ने कहा कि गरीबों को यदि उचित अवसर, संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो वे अपनी आर्थिक स्थिति बदलने की क्षमता रखते हैं। उनके अनुसार, सरकार का प्रयास ऐसे अवसर पैदा करना है, जिनसे गरीब परिवारों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, आवास, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
प्रधानमंत्री ने आर्थिक विकास में बुनियादी ढांचे की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सड़क, रेलवे, मेट्रो और अन्य परिवहन सुविधाओं का विस्तार केवल निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि इससे लोगों का जीवन आसान होता है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। उन्होंने पुणे मेट्रो परियोजनाओं को इसी विकास प्रक्रिया का उदाहरण बताया। बेहतर परिवहन व्यवस्था से लोगों का समय बचता है, कामकाज के लिए आवागमन आसान होता है और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही शहरों की आर्थिक प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शहरी परिवहन व्यवस्था विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों तक सरकारी सहायता पहुंचाने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इसके माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र और ग्रामीण विकास को देश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताया। विश्व बैंक के व्यापक आर्थिक आकलन में भी भारत की विकास दर और गरीबी में कमी के बीच संबंध दिखाई देता है। हालांकि, गरीबी घटने के पीछे आर्थिक विकास के अलावा रोजगार, उपभोग में वृद्धि, सामाजिक सहायता और सरकारी योजनाओं सहित कई कारकों की भूमिका होती है। इसलिए इस उपलब्धि को किसी एक योजना या कारण तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि पहले गरीबी हटाने के वादे किए जाते थे, लेकिन उनकी सरकार ने गरीबों की स्थिति में वास्तविक बदलाव लाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की सोच गरीबों को सशक्त बनाने की रही है, ताकि वे अपनी मेहनत और अवसरों के बल पर बेहतर भविष्य तैयार कर सकें। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत के आर्थिक विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उनके अनुसार, सरकार की नीतियों में गरीब, किसान, महिला और युवा वर्ग को प्राथमिकता दी गई है।
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