महाराष्ट्र

Mumbai में पेट्रोल ₹111 पार, प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र पर साधा निशाना

Kavita2
25 May 2026 10:19 AM IST
Mumbai में पेट्रोल ₹111 पार, प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र पर साधा निशाना
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Maharashtra महाराष्ट्र: देश में लगातार बढ़ रही पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सोमवार को मुंबई में पेट्रोल की कीमत ₹111 प्रति लीटर के पार पहुंच गई, जिसके बाद शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और इसे आम जनता पर आर्थिक बोझ बताया।

ईंधन कीमतों में यह बढ़ोतरी दो हफ्ते से भी कम समय में चौथी बार की गई है, जिससे उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर आम नागरिकों में भी चिंता देखी जा रही है, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां परिवहन खर्च तेजी से बढ़ रहा है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुंबई में पेट्रोल की कीमत अब ₹111 के ‘शगुन’ आंकड़े तक पहुंच गई है, जो आम जनता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जिस तरह से ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, उससे जल्द ही महानगरों में डीज़ल की कीमत भी ₹100 प्रति लीटर तक पहुंच सकती है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार बढ़ रही कीमतें आर्थिक नीतियों की विफलता को दर्शाती हैं। उनके अनुसार, पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन, माल ढुलाई और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है, जिससे आम लोगों का जीवन प्रभावित होता है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये की कमजोरी के कारण घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। तेल विपणन कंपनियों ने भी हाल के दिनों में कई बार कीमतों में संशोधन किया है।

इस बढ़ोतरी के बाद मेट्रो शहरों में ईंधन की कीमतें नए स्तर पर पहुंच गई हैं। मुंबई में पेट्रोल ₹111 प्रति लीटर से ऊपर चला गया है, जबकि डीज़ल भी तेजी से ₹100 के करीब पहुंचता दिख रहा है। इससे टैक्सी, ऑटो और ट्रांसपोर्ट सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को ईंधन पर टैक्स संरचना की समीक्षा करनी चाहिए ताकि आम जनता को राहत मिल सके। वहीं सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और रुपये में सुधार नहीं होता, तब तक घरेलू ईंधन कीमतों में राहत की संभावना कम है।

फिलहाल, बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर राजनीतिक और आर्थिक बहस को तेज कर दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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