महाराष्ट्र

Parth पवार की कंपनी को ₹21 करोड़ स्टाम्प ड्यूटी मामले में राहत नहीं

Kavita2
13 May 2026 11:09 AM IST
Parth पवार की कंपनी को ₹21 करोड़ स्टाम्प ड्यूटी मामले में राहत नहीं
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Maharashtra महाराष्ट्र: राज्यसभा सदस्य पार्थ पवार (Parth Pawar) से जुड़ी कंपनी Ms Amedea Enterprises LLP (Ms Amedea Enterprises LLP) को पुणे में हुए एक बड़े जमीन सौदे से जुड़े स्टाम्प ड्यूटी विवाद में बड़ा झटका लगा है। कंपनी को राज्य अधिकारियों द्वारा लगाए गए लगभग ₹21 करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी और पेनल्टी के भुगतान से फिलहाल कोई राहत नहीं मिल पाई है।

यह मामला महाराष्ट्र के पुणे (Pune) जिले के मुंधवा क्षेत्र में 40 एकड़ जमीन की खरीद से जुड़ा बताया जा रहा है। राज्य के जॉइंट रजिस्ट्रार और कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स ने पिछले वर्ष दिसंबर में कंपनी को यह निर्देश दिया था कि कथित स्टाम्प ड्यूटी चोरी के मामले में तय की गई पूरी राशि जमा की जाए।

आरोप है कि जमीन की इस बड़ी डील में स्टाम्प ड्यूटी को लेकर नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसके चलते सरकार को राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई। इसी आधार पर विभाग ने कंपनी पर कुल मिलाकर लगभग ₹21 करोड़ की ड्यूटी और जुर्माना लगाया था।

इस पूरे लेन-देन में यह भी सामने आया है कि सेल डीड पर कंपनी की ओर से पार्थ पवार के चचेरे भाई दिग्विजय पाटिल (Digvijay Patil) ने हस्ताक्षर किए थे। यह जानकारी सामने आने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है और राजनीतिक हलकों में भी इसकी निगरानी की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, स्टाम्प ड्यूटी विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी राशि का भुगतान किया जाए, लेकिन कंपनी की ओर से इस आदेश के खिलाफ राहत पाने के प्रयास सफल नहीं हो सके। फिलहाल मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्टाम्प ड्यूटी और पेनल्टी जैसे मामलों में नियमों का पालन अनिवार्य होता है और किसी भी प्रकार की छूट केवल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही दी जा सकती है। इस मामले में भी सभी दस्तावेजों और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की जांच की गई है और उसी के आधार पर आदेश जारी किया गया था।

इस विवाद ने पुणे में बड़े पैमाने पर हुई जमीन खरीद-फरोख्त और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन पर भी सवाल खड़े किए हैं। खासकर जब मामला एक राजनीतिक परिवार से जुड़े व्यक्ति और उनकी कंपनी से संबंधित हो, तो इसकी संवेदनशीलता और भी बढ़ जाती है।

हालांकि अभी तक इस मामले में किसी तरह की आपराधिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर स्टाम्प ड्यूटी वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। कंपनी के पास अभी भी कानूनी विकल्प मौजूद हैं, जिसके तहत वह आदेश को चुनौती दे सकती है।

फिलहाल पूरे मामले पर नजर बनी हुई है और आने वाले समय में इस पर आगे की कार्रवाई और स्पष्ट हो सकती है। इस घटना ने एक बार फिर बड़े जमीन सौदों में पारदर्शिता और नियमों के पालन की जरूरत को चर्चा में ला दिया है।

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