महाराष्ट्र

प्याज के दाम 60 रुपये किलो तक पहुंचे, नवंबर से पहले राहत के आसार कम

Kavita2
30 Sept 2026 3:31 PM IST
प्याज के दाम 60 रुपये किलो तक पहुंचे, नवंबर से पहले राहत के आसार कम
x

छत्रपति संभाजीनगर: प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। बाजार में इस समय गुणवत्ता के अनुसार प्याज की कीमत करीब 40 से 60 रुपये प्रति किलो के बीच चल रही है। व्यापारियों का कहना है कि यदि मंडियों में आवक कम हुई तो आने वाले दिनों में दाम और बढ़ सकते हैं। मौजूदा हालात में कीमतें 80 से 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

इस बार मॉनसून के दौरान कम बारिश और कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति को प्याज की कीमतों में तेजी का बड़ा कारण माना जा रहा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण प्याज की फसल प्रभावित हुई है और उत्पादन को लेकर भी दबाव बना हुआ है। इसका सीधा असर मंडियों में आने वाली नई फसल और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर पड़ रहा है।

बाजार में अभी जो प्याज बिक रहा है, उसकी कीमत उसकी गुणवत्ता पर निर्भर कर रही है। सामान्य गुणवत्ता का प्याज करीब 40 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है, जबकि बेहतर गुणवत्ता वाले प्याज के दाम 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

खुदरा बाजार में कीमतों का अंतर अलग-अलग इलाकों और दुकानों पर भी देखा जा रहा है। थोक मंडी से खुदरा दुकानों तक पहुंचने के दौरान परिवहन, छंटाई और अन्य खर्च जुड़ने के कारण अंतिम कीमत और बढ़ जाती है।

व्यापारियों का कहना है कि प्याज की कीमतों में फिलहाल तत्काल बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। नवंबर में नई फसल की आवक बढ़ने के बाद ही बाजार में स्थिति सामान्य होने की संभावना है।

नई फसल आने तक पुराने स्टॉक और वर्तमान आवक पर ही बाजार निर्भर रहेगा। यदि इस दौरान आवक कमजोर हुई तो कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी यानी APMC में प्याज की आवक पिछले महीने से शुरू हुई है। फिलहाल प्रतिदिन करीब 1,700 से 1,800 क्विंटल प्याज मंडी में पहुंच रहा है।

मंडी कारोबारियों के अनुसार यह आवक अभी बाजार की मांग को संभाल रही है, लेकिन इसमें थोड़ी भी गिरावट आई तो थोक कीमतों में तेजी आ सकती है। थोक बाजार में दाम बढ़ने का असर कुछ ही दिनों में खुदरा बाजार पर भी दिखाई देने लगता है।

प्याज ऐसी सब्जी है जिसका उपयोग लगभग हर घर में नियमित रूप से होता है। इसलिए इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ता है। होटल, ढाबे, रेस्तरां और अन्य खाद्य कारोबार पर भी बढ़ी हुई कीमतों का प्रभाव दिखाई देता है।

घरेलू उपभोक्ता महंगा प्याज खरीदने के कारण अब जरूरत के अनुसार कम मात्रा में खरीदारी करने लगे हैं। कुछ दुकानदारों का कहना है कि पहले जहां लोग एक साथ पांच से दस किलो तक प्याज खरीदते थे, वहीं अब कई ग्राहक एक या दो किलो तक ही खरीद रहे हैं।

प्याज की मौजूदा स्थिति में स्टॉक की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण कारक बन गई है। यदि मंडियों में नियमित रूप से 1,700 से 1,800 क्विंटल की आवक बनी रहती है तो कीमतों में कुछ स्थिरता रह सकती है। लेकिन यदि मौसम या परिवहन की वजह से आवक घटी तो कीमत तेजी से ऊपर जा सकती है।

कम बारिश के कारण किसानों को सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ा है। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं था, वहां उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इससे किसानों की लागत बढ़ने के साथ बाजार में उपलब्धता पर भी असर पड़ा है।

व्यापारियों का कहना है कि आने वाले कुछ सप्ताह प्याज बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। नवंबर तक नई फसल की बड़ी खेप मंडियों में नहीं आती है तो कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।

कुछ व्यापारियों का अनुमान है कि कमजोर आवक की स्थिति में प्याज का खुदरा भाव 80 से 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है। हालांकि यह केवल बाजार की संभावित स्थिति पर आधारित अनुमान है और वास्तविक कीमतें आवक तथा मांग पर निर्भर करेंगी।

नई फसल के बाजार में आने के बाद आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है। आम तौर पर नई फसल की बड़ी मात्रा मंडियों में पहुंचने पर पुराने स्टॉक पर निर्भरता कम होती है और थोक भाव पर दबाव पड़ता है।

फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी चिंता आने वाले त्योहारों और शादियों के सीजन की मांग भी है। इस दौरान प्याज की खपत बढ़ती है। यदि मांग बढ़ी और आपूर्ति उसी अनुपात में नहीं बढ़ी तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।

मंडी स्तर पर व्यापारी रोजाना आवक पर नजर रख रहे हैं। किस क्षेत्र से कितना प्याज आ रहा है और उसकी गुणवत्ता कैसी है, उसी आधार पर भाव तय हो रहे हैं।

उपभोक्ताओं के लिए राहत की उम्मीद अब नवंबर की नई फसल से जुड़ी हुई है। तब तक प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

मौजूदा समय में 40 से 60 रुपये प्रति किलो का प्याज पहले ही आम लोगों के बजट पर दबाव डाल रहा है। यदि व्यापारियों की आशंका के अनुसार दाम 80 से 90 रुपये तक पहुंचते हैं तो रसोई पर बोझ और बढ़ जाएगा।

फिलहाल बाजार की पूरी नजर APMC की दैनिक आवक और नई फसल के समय पर पहुंचने पर टिकी है। आने वाले दिनों में आवक यदि स्थिर रही तो कीमतों को कुछ सहारा मिल सकता है, लेकिन इसमें कमी होते ही प्याज फिर महंगाई का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

Next Story