महाराष्ट्र

केंद्रीय कृषि मंत्री ने संसद में बताया: महाराष्ट्र से अत्यधिक वर्षा और सूखे की रिपोर्ट नहीं मिली

SHIDDHANT
3 Dec 2025 10:42 PM IST
केंद्रीय कृषि मंत्री ने संसद में बताया: महाराष्ट्र से अत्यधिक वर्षा और सूखे की रिपोर्ट नहीं मिली
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Maharashtra महाराष्ट्र: पूर्व सांसद उमेश पाटिल ने जानकारी दी है कि संसद में कृषि क्षेत्र को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा में केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्य सरकार पर स्पष्ट रूप से चूक का आरोप लगाया। संसद सत्र के दौरान जब सांसद ओमप्रकाश राजे और सुप्रिया सुळे ने राज्य की ओर से केंद्र सरकार को भेजी गई अत्यधिक वर्षा और सूखे से संबंधित रिपोर्ट का स्थिति विवरण पूछा, तो केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि किसी भी प्रस्ताव या रिपोर्ट को केंद्र सरकार को राज्य की ओर से नहीं भेजा गया है। पूर्व सांसद उमेश पाटिल ने कहा कि यह स्थिति महाराष्ट्र के कृषि संकट को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों से अत्यधिक वर्षा और सूखे की स्थिति लगातार बनी हुई है, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और आर्थिक
नुकसान
बढ़ रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार को सही समय पर जानकारी देना जरूरी था, ताकि प्रभावित किसानों की मदद के लिए उचित योजना बनाई जा सके।
पाटिल ने बताया कि सांसदों द्वारा राज्य की रिपोर्ट की जानकारी लेने का उद्देश्य किसानों को राहत प्रदान करना और कृषि उत्पादन को सुरक्षित करना था। लेकिन केंद्रीय मंत्री के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार ने अभी तक केंद्र को कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है, जिससे राहत और उपाय में देरी हो सकती है। संसद में यह चर्चा कृषि संकट और मौसमी असमानताओं के प्रभाव पर हुई, जिसमें सांसदों ने किसानों के हितों की सुरक्षा और सूखा-ग्रस्त क्षेत्रों में तत्काल सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान उमेश पाटिल ने भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार की यह लापरवाही किसानों के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है।
केंद्रीय कृषि मंत्री के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि राज्य और केंद्र के बीच सूचना और संवाद की कमी अभी भी बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जानकारी और रिपोर्ट केंद्र सरकार को आपातकालीन योजनाओं को लागू करने में मदद करती है, जिससे प्रभावित किसानों को आर्थिक राहत मिल सकती है। महाराष्ट्र में कृषि और जलवायु संकट के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, राज्य सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह शीघ्र ही केंद्र को आवश्यक रिपोर्ट भेजे और किसानों के हित में तत्काल कदम उठाए।
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