महाराष्ट्र

एंटीलिया केस में वाजे की जमानत पर NIA ने उठाए सवाल

Ratna Netam
7 Oct 2026 7:56 PM IST
एंटीलिया केस में वाजे की जमानत पर NIA ने उठाए सवाल
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मुंबई। एंटीलिया बम धमकी और कारोबारी मनसुख हिरेन हत्या मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को मिली जमानत को चुनौती देने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट में बुधवार को सुनवाई जारी रही। NIA ने विशेष अदालत के जमानत आदेश पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि निचली अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों और जांच एजेंसी की चार्जशीट से अलग निष्कर्ष निकाले हैं। हाई कोर्ट ने NIA की दलीलें सुनीं और मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रखने का फैसला किया।
मामला वर्ष 2021 के चर्चित एंटीलिया प्रकरण से जुड़ा है। 25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के पास एक SUV मिली थी, जिसमें जिलेटिन की छड़ें और धमकी भरा पत्र बरामद हुआ था। इसके कुछ दिनों बाद उस वाहन से जुड़े कारोबारी मनसुख हिरेन का शव ठाणे के पास मिला था। NIA ने अपनी जांच में सचिन वाजे को दोनों मामलों की साजिश में प्रमुख आरोपी बताया था।विशेष NIA अदालत ने 29 सितंबर 2026 को वाजे को जमानत दे दी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह दिखाने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि अंबानी परिवार वास्तव में आतंकित हुआ था। विशेष अदालत ने यह भी कहा था कि प्रथम दृष्टया वाजे की कथित भूमिका को UAPA की धारा 15 के तहत आतंकवादी कृत्य की परिभाषा में रखने के लिए रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं है। अदालत ने वाजे की लंबी हिरासत अवधि को भी जमानत देते समय ध्यान में रखा था।
विशेष अदालत ने वाजे को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। साथ ही उनका पासपोर्ट जमा कराने और मुकदमे की सुनवाई के अलावा मुंबई, ठाणे, रायगढ़ तथा पालघर जिलों में प्रवेश नहीं करने जैसी शर्तें भी लगाई गई थीं। हालांकि जमानत मिलने के तुरंत बाद NIA ने इस आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दे दी।30 सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट की जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने विशेष अदालत के जमानत आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके कारण सचिन वाजे जेल से रिहा नहीं हो सके। हाई कोर्ट ने मामले को 7 अक्टूबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।
बुधवार की सुनवाई में NIA की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने हाई कोर्ट के सामने अपनी दलीलें शुरू कीं। एजेंसी ने कहा कि विशेष अदालत की टिप्पणियां कई जगह अनुमान और ऐसी व्याख्याओं पर आधारित हैं, जो 3 सितंबर 2021 की NIA चार्जशीट से मेल नहीं खातीं। NIA ने विशेष अदालत के आदेश को तथ्यों और कानून दोनों के स्तर पर गलत बताया।NIA ने हाई कोर्ट में दावा किया कि सचिन वाजे ने मनसुख हिरेन की गाड़ी में 20 जिलेटिन की छड़ें और धमकी भरा पत्र रखवाने की योजना बनाई थी। एजेंसी का आरोप है कि इसका उद्देश्य सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर भय पैदा करना था। NIA ने अदालत से कहा कि यह घटना आबादी वाले इलाके में हुई और वाहन में विस्फोटक सामग्री तथा धमकी भरा पत्र मौजूद होना अपने आप में गंभीर तथ्य है। ये NIA के आरोप हैं और मामले का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है।
NIA ने विशेष अदालत के उस निष्कर्ष पर भी आपत्ति जताई, जिसमें वास्तविक आतंक पैदा होने के प्रमाण पर सवाल उठाया गया था। एजेंसी का तर्क है कि UAPA की धारा 15 में केवल वास्तविक रूप से आतंक पैदा होना जरूरी नहीं है, बल्कि ऐसा कृत्य जो लोगों में आतंक पैदा करने की संभावना रखता हो, वह भी कानून के दायरे में आ सकता है। इसी आधार पर NIA ने कहा कि कथित घटना का मूल्यांकन केवल इस बात पर नहीं किया जा सकता कि अंबानी परिवार का बयान दर्ज हुआ या नहीं।NIA ने जमानत आदेश में विशेष अदालत की कुछ टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। एजेंसी ने कहा कि निचली अदालत ने जांच को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं और कुछ ऐसे तथ्य जोड़े, जो चार्जशीट का हिस्सा नहीं थे। NIA ने हाई कोर्ट से इन टिप्पणियों को हटाने की मांग की है।
एजेंसी ने मनसुख हिरेन हत्या मामले में भी वाजे की कथित भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। NIA के अनुसार, हिरेन को कथित साजिश की जानकारी थी और उन्हें “कमजोर कड़ी” माना गया। एजेंसी का आरोप है कि इसी कारण उनकी हत्या की योजना बनाई गई। जांच एजेंसी ने कहा कि वाजे उस समय पुलिस अधिकारी थे और शुरुआती स्तर पर उन्हीं मामलों की जांच से जुड़े हुए थे, जिनमें बाद में उन्हें आरोपी बनाया गया। ये आरोप चार्जशीट का हिस्सा हैं और इन पर मुकदमे में अंतिम फैसला होना बाकी है।विशेष अदालत ने जमानत देते समय यह भी कहा था कि वाहन एंटीलिया के ठीक सामने नहीं, बल्कि कारमाइकल रोड के एक अन्य हिस्से में खड़ा था और यह साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं है कि अंबानी परिवार की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। अदालत ने जांच एजेंसी द्वारा परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज नहीं करने पर भी सवाल उठाया था। NIA ने हाई कोर्ट में इन टिप्पणियों को चुनौती देते हुए कहा कि आतंक से जुड़ा अपराध स्थापित करने के लिए लक्षित व्यक्ति का बयान हर स्थिति में अनिवार्य तत्व नहीं है।
NIA ने यह भी कहा कि UAPA के तहत जमानत देते समय सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में अधिक सख्त कसौटी लागू होती है। एजेंसी के मुताबिक विशेष अदालत ने इसी कानूनी कसौटी को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। NIA का तर्क है कि जब विशेष अदालत ने पहले आरोप तय करते समय उपलब्ध सामग्री के आधार पर UAPA के तहत मामले को आगे बढ़ाने का आधार पाया था, तो जमानत देते समय उसी रिकॉर्ड पर अलग निष्कर्ष निकालना विरोधाभासी है।बुधवार को NIA की दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई गुरुवार तक जारी रखने का निर्णय लिया है। फिलहाल 29 सितंबर का जमानत आदेश हाई कोर्ट की अंतरिम रोक के कारण प्रभावी नहीं है और सचिन वाजे जेल में ही रहेंगे, जब तक अदालत आगे कोई आदेश पारित नहीं करती।
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