महाराष्ट्र

IIT बॉम्बे छात्र मौत मामले में नया मोड़

Kavita2
20 Sept 2026 10:16 AM IST
IIT बॉम्बे छात्र मौत मामले में नया मोड़
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मुंबई। देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT Bombay) में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। घटना के एक दिन बाद मुंबई पुलिस ने संस्थान के एक फैकल्टी सदस्य सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ छात्र को आत्महत्या के लिए उकसाने और जाति के आधार पर उत्पीड़न के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर में दर्ज आरोपों की जांच की जा रही है और इस स्तर पर इन्हें सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक द्वितीय वर्ष का छात्र था। उसकी मौत के बाद छात्रों के एक वर्ग ने संस्थान परिसर में प्रदर्शन किया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। छात्र की मौत की परिस्थितियों और उससे पहले हुई घटनाओं को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

हॉस्टल के कमरे में मिला छात्र

रिपोर्टों के अनुसार साहिल की मौत संस्थान के हॉस्टल में हुई। घटना सामने आने के बाद पुलिस को सूचना दी गई और जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। छात्र की मौत ने परिसर में कई सवाल खड़े कर दिए और इसके बाद विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया।

मामले में पुलिस छात्र के साथ घटना से पहले हुए घटनाक्रम, संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध डिजिटल तथा अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि छात्र की मौत से पहले वास्तव में क्या हुआ था और उस पर किसी तरह का दबाव या उत्पीड़न था या नहीं।

परीक्षा के दौरान अनुचित साधन इस्तेमाल करने का आरोप

IIT बॉम्बे की ओर से जारी बयान में कहा गया कि साहिल को परीक्षा के दौरान अनुचित साधन का इस्तेमाल करते पाया गया था। रिपोर्टों के अनुसार संस्थान ने कहा कि छात्र परीक्षा के दौरान ChatGPT का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के तहत मामला आगे बढ़ाया गया।

हालांकि छात्र की आत्महत्या को केवल इसी घटना का सीधा परिणाम मानना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। पुलिस अब उन सभी परिस्थितियों की जांच कर रही है जो घटना से पहले सामने आई थीं।

फैकल्टी मेंबर के खिलाफ FIR

छात्र की मौत के बाद पुलिस ने फैकल्टी सदस्य सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित कानूनी प्रावधानों के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।

एफआईआर दर्ज होना जांच की शुरुआत है और इससे आरोपी की दोषसिद्धि स्वतः स्थापित नहीं होती। पुलिस को आरोपों के समर्थन में साक्ष्य जुटाने होंगे और आगे की कानूनी प्रक्रिया में अदालत उपलब्ध सामग्री के आधार पर निर्णय करेगी।

जाति के आधार पर उत्पीड़न का आरोप

मामले में जातिगत उत्पीड़न के आरोप ने जांच को और संवेदनशील बना दिया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्र के साथ कथित तौर पर किस तरह का व्यवहार किया गया था और क्या उसके खिलाफ जाति के आधार पर कोई टिप्पणी, भेदभाव या उत्पीड़न हुआ था।

इस संबंध में छात्र के साथियों, शिक्षकों और अन्य संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। डिजिटल रिकॉर्ड, संदेश और अन्य दस्तावेज भी जांच का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।

छात्रों ने परिसर में किया प्रदर्शन

साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे परिसर में छात्रों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की। कुछ छात्र समूहों ने संस्थान में विद्यार्थियों के साथ होने वाले व्यवहार और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

पुलिस और संस्थान दोनों की ओर से मामले से जुड़े तथ्यों को सामने लाने की प्रक्रिया जारी है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि छात्र ने घटना से पहले किसी दोस्त, परिवार के सदस्य या अन्य व्यक्ति से अपनी परेशानी साझा की थी या नहीं।

IIT बॉम्बे ने जताया दुख

IIT बॉम्बे प्रशासन ने छात्र की मौत पर दुख व्यक्त किया है। संस्थान ने कहा है कि वह जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है। साथ ही संस्थान ने छात्र समुदाय से संवेदनशीलता बनाए रखने और अपुष्ट जानकारियों को फैलाने से बचने की अपील की है।

इस तरह की घटना के बाद संस्थान की आंतरिक प्रक्रियाओं पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्धारित नियम होते हैं। पुलिस अब यह जांच रही है कि साहिल के मामले में उन प्रक्रियाओं का पालन कैसे किया गया और इस दौरान क्या घटनाक्रम हुआ।

हर पहलू की जांच में जुटी पुलिस

जांच एजेंसी के सामने अब कई पहलू हैं। इनमें परीक्षा के दौरान कथित तौर पर ChatGPT इस्तेमाल करने की घटना, उसके बाद छात्र और फैकल्टी के बीच हुई बातचीत, कथित जातिगत उत्पीड़न और छात्र की मानसिक स्थिति से जुड़े उपलब्ध प्रत्यक्ष साक्ष्य शामिल हैं।

पुलिस संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने के साथ तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है। छात्र के मोबाइल फोन, संदेश और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड से घटना से पहले की परिस्थितियों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है।

जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

साहिल वाकोडे की मौत के बाद दर्ज एफआईआर ने मामले को नया मोड़ दिया है। एक तरफ IIT बॉम्बे ने कहा है कि छात्र को परीक्षा में अनुचित साधन का इस्तेमाल करते पकड़ा गया था, वहीं दूसरी तरफ फैकल्टी सदस्य के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और जातिगत उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

फिलहाल दोनों पहलुओं की पुलिस जांच जारी है। जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्र की मौत से पहले क्या परिस्थितियां बनी थीं और मामले में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी बनती है या नहीं।

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